अयोध्या में जीवन्त होगी त्रेतायुग की दीपावली

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लम्बे वक्त के बाद यूपी की कोई सरकार अयोध्या में भव्य स्तर पर दीपावली मनाएगी। सरयू नदी के किनारे दीपोत्सव पर भव्य आयोजन होगा, जिसमें यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा राज्यपाल राम नाइक और कैबिनेट के तमाम मंत्रियों के अलावा प्रदेश सरकार के अफसर मौजूद रहेंगे।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
सरकारी सूत्रों के अनुसार दिवाली के दिन योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के गोरखनाथ मन्दिर में पूजा करेंगे लिहाजा दीपावली पर अयोध्या में मुख्य कार्यक्रम दिवाली से एक दिन पहले 18 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।

यहां पर हजारों की संख्या में दीपों को रौशन करने के बाद सरयू के तट पर रखा जाएगा। इस दौरान सरयू नदी की आरती भी होगी। समस्त घाट रौशनी से जगमगाएंगे, इसके लिए हर घाट, हर मन्दिर पर खास सजावट की जाएगी। हालांकि कानूनी पहलुओं को देखते हुए विवादित राम जन्मभूमि ढांचे के आस-पास किसी भी तरह की रौशनी नहीं की जाएगी।

लम्बे वक्त के बाद यूपी की कोई सरकार अयोध्या में भव्य स्तर पर दीपावली मनाएगी। सरयू नदी के किनारे दीपोत्सव पर भव्य आयोजन होगा, जिसमें यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा राज्यपाल राम नाइक और कैबिनेट के तमाम मंत्रियों के अलावा प्रदेश सरकार के अफसर मौजूद रहेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार दिवाली के दिन योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के गोरखनाथ मन्दिर में पूजा करेंगे लिहाजा दीपावली पर अयोध्या में मुख्य कार्यक्रम दिवाली से एक दिन पहले 18 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।

मान्यता के अनुसार जब त्रेतायुग में लंका विजय के पश्चात प्रभु राम के राज्याभिषेक का उत्सव मनाया गया, वह पर्व अब दीपावली के रूप में मनाया जाता है। प्रदेश सरकार की ओर से छोटी दीपावली को प्रस्तावित आयोजन त्रेतायुग के राम राज्याभिषेक की उन्हीं स्मृतियों को जीवन्त करने वाले होंगे। लंका विजय के बाद भगवान राम सरयू नदी के तट से होकर अयोध्या लौटे थे, इसी कारण 18 अक्टूबर को सरयू नदी के तट के किनारे दीप जलाये जाएंगे। यहां पर हजारों की संख्या में दीपों को रौशन करने के बाद सरयू के तट पर रखा जाएगा। इस दौरान सरयू नदी की आरती भी होगी। समस्त घाट रौशनी से जगमगाएंगे, इसके लिए हर घाट, हर मन्दिर पर खास सजावट की जाएगी। हालांकि कानूनी पहलुओं को देखते हुए विवादित राम जन्मभूमि ढांचे के आस-पास किसी भी तरह की रौशनी नहीं की जाएगी।

तैयारियों को लेकर फैजाबाद में हुई बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थानों, जैसे राम की पैड़ी, कनक भवन, हनुमानगढ़ी के अलावा शहर के कई दूसरे मन्दिरों को रंग-बिरंगी रौशनी से सजाया जाएगा। इसमें मिट्टी के दीयों का भी इस्तेमाल होगा। छोटी दीपावली पर हनुमान जयन्ती भी धूमधाम से मनाई जाएगी। बनारस की तर्ज पर पूरी अयोध्या में घी के स्पेशल दिये जलेंगे। इन दीपकों में घी के साथ कपूर व अन्य चीजें मिलाई जाएंगी, जिससे वह तेज हवा में न बुझें। अयोध्या को त्रेतायुग का रूप देने के लिए दो इवेंट कम्पनियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पूरा आयोजन अयोध्या के सांस्कृतिक महत्व को चित्रित करेगा। दीपावली पर्व पर साकेत महाविद्यालय से निकलने वाली राम राज्याभिषेक यात्रा को अद्भुत, आकर्षक बनाने की रूपरेखा तैयार हो रही है। इस यात्रा में खुशी मनाते अयोध्यावासी, बंदर, भालू व राजसी सेना मौजूद रहेगी। टीवी सीरियलों में रामायण के चित्रण की भांति अयोध्या की सड़कों पर कलाकारों के माध्यम से त्रेतायुग की झलक दिखाई जाएगी।

अयोध्या में भव्य पैमाने पर दीपावली मनाने की तैयारियों की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। वहीं संस्कृति मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय और बाकी विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है, ताकि दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके। पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में दिवाली मनाई जाएगी, जिसमें खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे। यहां दिवाली मनाने का मकसद साफ है, इसके जरिये सैलानियों को अयोध्या में मौजूद पर्यटक और धार्मिक महत्व के स्थलों के बारे में जानकारी मिलेगी, जिससे आने वाले दिनों में यहां पर्यटन बढ़ेगा। इतना ही नहीं अयोध्या की सूरत संवारने के लिए विकास के कई प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।

इसकी शुरुआत धार्मिक स्थानों को हेलीकॉप्टर सेवा से जोडऩे से होगी। राम राज्याभिषेक के उत्सव पर हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा के साथ उसी दिन से नगरी को हेलीकाप्टर सेवा से जोडऩे की योजना प्रस्तावित है। गुप्तारघाट से बाईपास पर बने पुल के बीच सरयू का 10 किलोमीटर तट पर दीप प्रज्ज्वलन, रामकथा पार्क में सांस्कृतिक आयोजन, नगरी के सभी प्रवेश मार्गों पर रंगोली सजाने, झांकी निकलने आदि की तैयारियां ही नहीं इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उनकी पूरी कैबिनेट की प्रस्तावित मौजूदगी रामनगरी के प्रति नयी उम्मीद और नयी दृष्टि की सम्भावना जगाएगी। इसमें कोई शक नहीं कि ऐसी कोशिश से अयोध्या के विकास का सवाल और प्रभावी होगा।

अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर होगा अयोध्या

लोककथाओं के नायक महान शासक विक्रमादित्य से संरक्षित-सेवित रामनगरी सूर्यवंश के प्रतापी नरेशों, भगवान राम सहित प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव, महान बौद्ध दार्शनिक अश्वघोष की जन्मभूमि, गौतमबुद्ध की साधना स्थली, सूफी संतों, सिख गुरुओं, सनातनियों और वैष्णव परम्परा के संतों की नगरी, जहां उत्तर मध्यकालीन रियासतों के सैकड़ों मन्दिरों एवं उद्यानों से सुसज्जित हुई वहीं मौजूदा अद्र्ध शताब्दी के दौरान वैष्णव संतों ने मठ-मन्दिरों के निर्माण से भी नगरी को रौनक देने का काम किया है। इसके बावजूद नगरी लम्बे समय से पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित होने के लिए कसमसा रही है। पौने तीन दशक पूर्व स्थापित राम की पैड़ी, पौने दो दशक पूर्व स्थापित रामकथा पार्क, कई राजकीय उद्यान, विभिन्न मार्ग, बुनियादी सुविधाओं के लिहाज से उपेक्षित हैं और रामनगरी की गरिमा के अनुरूप पर्यटन के क्षितिज पर गौरवान्वित होने की ललक मायूसी में बदल कर रह जा रही है।

सूबे में 6 माह पूर्व योगी सरकार के काबिज होने के बाद सरकार की नजर में अयोध्या के महत्वपूर्ण होने के संकेत मिलने लगे हैं। ध्यातव्य है कि सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ दो बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं और खुद योगी सीएम ने इस बार अयोध्या में भव्य दिवाली मनाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में दीपावली का प्रस्तावित महोत्सव नयी उम्मीद के तौर पर सामने है। गौरतलब है कि अयोध्या को पर्यटन मंत्रालय के उन शहरों की सूची में शामिल किया गया है जिन्हें पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आलीशान होटलों, हाईटेक रेलवे स्टेशन और अत्याधुनिक परिसर से सुसज्जित किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के दो ही महीने बाद केन्द्र का अयोध्या पर ध्यान बढ़ गया है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद 225 करोड़ रुपये के रामायण संग्रहालय के लिए काफी समय से लम्बित भूखण्ड को मंजूरी दे दी गई। अयोध्या को रामायण में भगवान राम का जन्मस्थल बताया गया है यह स्थान मंत्रालय द्वारा आयोजित बहु प्रचारित रामायण सर्किट का भी केन्द्र बिन्दु बन गया है।

दीगर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के समय अयोध्या के व्यापक व विस्तृत पर्यटन की दृष्टि से विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की है। अयोध्या के समग्र विकास के लिए 250 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान अयोध्या में होने वाली पंचकोसी, चौदह कोसी यात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन यात्राओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी के किनारे वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर सरयू आरती का श्रीगणेश करने की घोषणा की।

अयोध्या को रेल, सड़क, वायु यातायात के माध्यम से पूरे देश से जोडऩे की योजना बनी है। अभी तक तुष्टीकरण के कारण अयोध्या का पूरे देश से व्यापक सम्पर्क ही नहीं था। आम जनमानस चाह कर भी अयोध्या नहीं आ सकता था। यदि आना भी चाहे तो उनके लिए अच्छे होटलों व रेस्त्रां तथा स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव भी था। अयोध्या की सड़कों की दुर्दशा सभी ने देखी लेकिन किसी ने ताजमहल व इमामबाड़े के आगे किसी अन्य पर ध्यान नहीं दिया। अब प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का व्यापक विस्तार होने का मार्ग खुल रहा है।

ध्यातव्य है कि प्रदेश में पर्यटन के विकास में सबसे बड़ी बाधा बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था भी थी। प्रदेश में विदेशी पर्यटकों के साथ अभद्र व्यवहार व शर्मनाक घटनाओं के समाचार सुर्खियों में बने रहते हैं। विदेशी महिलाओं के साथ छेड़छाड़, बलात्कार व उनके साथ लूटपाट आदि की घटनाएं घटित हो रही हैं। प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता इस बात की है कि आम जनमानस व विदेशी पर्यटकों के मन में सुरक्षा की भावना को जागृत किया जाये। सीएम योगी आदित्यनाथ आम जनमानस व विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अत्यन्त गम्भीर हैं, जिससे अयोध्या समेत अनेक धार्मिक केन्द्रों के अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर उभरने की आशा के दीपकों को ज्योति मिल गई है। 

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