रीढ़ की हड्डी में लगी चोट का इलाज अब हो गया है आसान

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वैज्ञानिकों ने रीढ़ की हड्डी में न्यूरॉन्स को फिर से जोड़ने के लिए एक नई सर्जिकल तकनीक का विकास किया है। इससे रीढ़ की हड्डी में दर्दनाक चोट का इलाज संभव हो सकेगा। इस तकनीक को सेलुलर स्तर पर काम करने के बाद विकसित किया गया है।

फोटो साभार: Shutterstock
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रीढ़ की हड्डी में इतनी सारी हड्डियां जुड़ी होती हैं कि एक बार क्षतिग्रस्त होने के बाद उनको ठीक करना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है, लेकिन अब बैकबोन डैमेज के इलाज में एक क्रांतिकारी आविष्कार हुआ है।

मनुष्य शरीर के ज्यादातर हिस्सों की हड्डियां, मस्तिष्क और न्यूरॉन्स से जुड़ी होती हैं। न्यूरॉन्स भी दो तरह के होते हैं, मोटर न्यूरॉन्स जो मांसपेशियों के संतुलन को बनाए रखने में मददगार साबित होती है और सेन्सरी न्यूरॉन्स जो दर्द, तापमान और स्पर्श जैसे संवेदी चीजों को नियंत्रित करती है। ये सारी न्यूरॉन्स हमारी रीढ़ की हड्डी से जुड़ती होती हैं।

रीढ़ की हड्डी यानी बैकबोन, हमारे शरीर का आधार। हमारे तंत्रिका तंत्र का सपोर्ट सिस्टम। वो आधार जिसके बल पर हम सबका शरीर सीधा खड़ा रहता है। सोचिए जिस इंसान की रीढ़ की हड्डी में ही डैमेज हो जाए या भयंकर दर्द उठने लगे तो उस इंसान का क्या हाल होता होगा और रीढ़ की हड्डी में इतनी सारी हड्डियां जुड़ी होती हैं कि एक बार क्षतिग्रस्त होने के बाद उनको ठीक करना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है, लेकिन अब अब बैकबोन डैमेज के इलाज में एक क्रांतिकारी आविष्कार हुआ है।

यूके और स्वीडन के वैज्ञानिकों ने रीढ़ की हड्डी में न्यूरॉन्स को फिर से जोड़ने के लिए एक नई सर्जिकल तकनीक का विकास किया है। इन वैज्ञानिकों ने रीढ़ की हड्डी में दर्दनाक चोट का इलाज निकाल लिया है। इन वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को सेलुलर स्तर पर काम करने के बाद विकसित किया है। हाल ही में फ्रंटियर में प्रकाशित न्यूरोलॉजी के एक नए अध्ययन में, जेम्स, कार्ल्स्टेड और उनके सहयोगियों ने ये समझाया है कि प्रत्यारोपित सेंसरी रूट कैसे रीढ़ की हड्डी के साथ जुड़ी होती है। इस पूरे तंत्र को समझकर ये वैज्ञानिक रीढ़ की हड्डी में आई चोटों के लिए उपचार विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

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क्या है ये पूरा सिस्टम?

पहले ये समझिए कि हमारे शरीर के ज्यादातर हिस्सों की हड्डियां, मस्तिष्क और न्यूरॉन्स से जुड़ी होती हैं। न्यूरॉन्स भी दो तरह के होते हैं, मोटर न्यूरॉन्स जो मांसपेशियों के संतुलन को बनाए रखने में मददगार साबित होती है और सेन्सरी न्यूरॉन्स जो दर्द, तापमान और स्पर्श जैसे संवेदी चीजों को नियंत्रित करती है। ये सारी न्यूरॉन्स हमारी रीढ़ की हड्डी से जुड़ती होती हैं। न्यूरॉन्स जहां पर कॉर्ड से जुड़ते हैं वहां मोटर न्यूरॉन्स एक रूट बनाते हैं, जिसे मोटर रूट कहा जाता है, जबकि सेन्सरी न्यूरॉन्स एक सेन्सरी रूट पैदा बनाते हैं। ऐसे में दर्दनाक चोटों के दौरान ये रूट फट सकती है, जिससे शरीर का न्यूरॉन कंट्रोल खोने का खतरा बढ़ जाता है।

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कैसे काम करती है ये डिवाइस?

अब इन वैज्ञानिको ने ऐसी डिवाइस का आविष्कार किया है जिसमें मोटर रूट्स को फिर से जोड़ा जा सकता है जहां से वे फट गई हैं। हालांकि ये डिवाइस सेन्सरी रूट के लिए ज्यादा कामगर नहीं है। किंग्स कॉलेज लंदन के एक शोधकर्ता निकोलस जेम्स का कहना है कि 'चिकित्सकों ने हमेशा से ही इस प्रकार की रीढ़ की हड्डी की मरम्मत को असंभव माना था। इन टूटी हुई रूट्स में हुए घावों से गंभीर विकलांगता और भयंकर दर्द हो सकता है।'

इन वैज्ञानिकों ने सेलुलर स्तर पर प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए रीढ़ की हड्डी में चोट वाले एक चूहे के मॉडल का इस्तेमाल किया। सर्जरी के दौरान, उन्होंने चूहों में उसी प्रकार से रीढ़ की हड्डी में चोट लगवाई जैसा इंसानों को लगती है। फिर उन्होंने नई तकनीक का उपयोग करते हुए चूहे की रीढ़ की हड्डी से सेंसरी रूट को दोबारा जोड़ा। सर्जरी के दो हफ्तों बाद जब उन्होंने उस चूहे का परीक्षण किया तो पाया कि वो रूट, रीढ़ की हड्डी के साथ अच्छे से जुड़ चुकी है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार की मस्तिष्क की वृद्धि का उपयोग अन्य प्रकार की रीढ़ की हड्डी की चोट की मरम्मत के लिए भी किया जा सकता है।

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IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

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