अनोखी बॉलिंग मशीन से क्रिकेट प्रेमियों के लिए काम कर रहा यह स्टार्टअप  

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 एक नॉन इलेक्ट्रिक, सस्ता और पोर्टेबल बॉलिंग मशीन बनाने का प्रोजेक्ट आज पूर्ण विकसित स्टार्टअप बन गया है। प्रतीक और जस्टिन ने 2016 में अपना मास्टर कोर्स पूरा करने के बाद फ्रीबॉलर स्टार्टअप लॉन्च कर दिया।

फ्रीबॉलर पर प्रैक्टिस करते राहुल द्रविड़
फ्रीबॉलर पर प्रैक्टिस करते राहुल द्रविड़
नॉन इलेक्ट्रिकल और पोर्टेबल क्रिकेट बॉल फेंकने वाले फ्रीबॉलर में अलग-अलग लाइन और लेंथ से असली क्रिकेट बॉल फेंकने की क्षमता है। यह बोल फेंकने वाले पुराने उपकरण का अपग्रेडेड वर्जन है।

कुछ लोग होते हैं जो खेल में रुचि लेते हैं और कुछ होते हैं जो खेल के लिए जीते हैं। क्रिकेट को अपना पैशन मानने वाले बेंगलुरु के प्रतीक पालानेत्रा दूसरी कैटिगरी में आते हैं। प्रतीक ने कम उम्र में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। जब उन्होंने पहली बार बैट पकड़ा, तब उनकी उम्र महज 2 साल की थी। उन्होंने कई टीमों के लिए मैच खेले। यहां तक कि विश्वेश्वरैया टेक्नॉलॉजिकल यूनिवर्सिटी (वीटीयू) और कर्नाटक क्रिकेट टीम का राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।

प्रतीक बेंगलुरु के आरवी कॉलेज ऑफ इंजिनियरिंग में मैकेनिकल इंजिनियरिंग के छात्र थे। चीजें तब बदलना शुरू हुईं जब वे 2015 में टेक्निकल आंत्रप्रिन्योरशिप में मास्टर डिग्री करने के लिए यूएस के पेनस्यलवानिया की लेहाई यूनिवर्सिटी में पढ़ने गए। प्रतीक अमेरिका में क्रिकेट खेलने को काफी मिस करते थे। उन्होंने कहा, 'अमेरिका में अच्छे बोलर्स मिलना बहुत मुश्किल था और इनडोर स्टेडियम मेरे घर से एक घंटे की दूरी (ड्राइव) पर था।' उनके साथ कोई बॉलिंग करने वाला नहीं था तो उन्होंने सोचा कि काश! इस परेशानी से निजात पाने का कोई आसान तरीका होता।

प्रतीक ने अपने रूम मेट और बैचमेट जस्टिन जैकब के साथ मिलकर यूनिवर्सिटी में एक सस्ता और पोर्टेबल बॉलिंग मशीन बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया। जस्टिन एक सिविल इंजिनियरिंग स्टूडेंट होने के साथ एक बेसबॉल प्लेयर भी थे। उन्हें इस प्रोजेक्ट में काफी रुचि थी। एक नॉन इलेक्ट्रिक, सस्ता और पोर्टेबल बॉलिंग मशीन बनाने का प्रोजेक्ट आज पूर्ण विकसित स्टार्टअप बन गया है। प्रतीक और जस्टिन ने 2016 में अपना मास्टर कोर्स पूरा करने के बाद फ्रीबॉलर स्टार्टअप लॉन्च कर दिया।

आज प्रतीक भारत में तो जस्टिन अमेरिका फ्रीबॉलर का बिजनेस देखते हैं। दोनों को प्रतीक के साथ आरवीसीई में पढ़ने वाले विश्वनाथ एचके के रूप में नया पार्टनर मिला। विश्वनाथ आरवी कॉलेज क्रिकेट टीम के कोच भी थे। उनके बारे में प्रतीक ने कहा, 'विश्वनाथ पूरी तरह से क्रिकेट में शामिल रहते थे। वे एक अम्पायर, स्कोरर और कोच थे। जब मैंने उनसे स्टार्टअप में शामिल होने के लिए संपर्क किया तो वे शामिल होने के लिए तैयार थे।'

फ्रीबॉलर कैसे काम करता है?

नॉन इलेक्ट्रिकल और पोर्टेबल क्रिकेट बॉल फेंकने वाले फ्रीबॉलर में अलग-अलग लाइन और लेंथ से असली क्रिकेट बॉल फेंकने की क्षमता है। यह बोल फेंकने वाले पुराने उपकरण का अपग्रेडेड वर्जन है। इसमें बॉल फेंकने के लिए एक तरफ थ्रोइंग आर्म दी गई है जिसके एक किनारे पर बॉल थ्रोइंग कप दिया गया है। इसमें गेंद को रखा जाता है। थ्रोइंग आर्म स्प्रिंग केबल सिस्टम के जरिए एक फुट लेवर से जुड़ी हुई होती है।

थ्रोइंग आर्म सबसे पहले नीचे की ओर खींची जाती है और एक जगह पर लॉक कर दी जाती है। इसके बाद फुट लेवर को नीचे की ओर धकेलकर लॉक किया जाता है। यह स्प्रिंग को चालू कर देता है। इसके बाद बॉल होल्डिंग कप में गेंद रखी जाती है और एक ट्रिगर हैंडल की मदद से थ्रोइंग आर्म को छोड़ा जाता है। इससे थ्रोइंग आर्म बल्लेबाज की ओर गेंद फेंकता है। प्लास्टिक के कोट वाली सिंथेटिक बॉल उपयोग करने वाले बाकी इलेक्ट्रिक बॉलिंग मशीन के बजाय फ्रीबॉलर मैच में खेले जाने वाली असली गेंदो का प्रयोग करता है। इससे बैट्समैन को मैच जैसा अनुभव मिलता है।

एक इलेक्ट्रिक बॉलिंग मशीन में घूमने वाले वील्स होते हैं जो गेंद को फेंकने से पहले उसे स्क्वीज करते हैं। इससे गेंद की सिलाई खराब होने का खतरा होता है। दूसरी तरफ फ्रीबॉलर में एक थ्रोइंग आर्म दी गई है जो एक असली बॉलिंग ऐक्शन की तरह से गेंद फेंकती है। प्रतीक ने बताया, 'एक बटन का प्रयोग करके कप में गेंद को अलग-अलग ऐंगल से सेट किया जा सकता है। इससे बल्लेबाज को लेंग्थ और स्विंग्स में भिन्नता देखने को मिलती है। मशीन के निचले हिस्से में पहिए भी दिए गए हैं जो कि मशीने को पोर्टेबल बनाते हैं। मशीन को बैट्समैन से एक सामान्य 22 गज की पिच से छोटे स्थान पर भी रखा जा सकता है। यह बल्लेबाज को तेज गति से अलग लेंग्थ और बाउंस खेलने में मदद करता है।'

फ्रीबॉलर स्टार्टअप को एक आदर्श और उत्पादन करने वाले पार्टनर ढूंढने जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस बारे में प्रतीक ने बताया, 'हमने यूएस और चीन में बहुत दिनों तक खोज की लेकिन यूएस थोड़ा महंगा था तो चीन के साथ सामान संबंधी कुछ मुद्दे थे। अंत में हमने बेंगलुरु के मैसूर रोड स्थित एक स्थानीय मैन्युफ्रैक्चर के साथ साझेदारी की।'

प्रतिस्पर्धा और यूएसपी

फ्रीबॉलर को ओमटेक्स के साइड आर्म थ्रोअर और हैदराबाद की लीवरेज बॉलिंग कंपनी के साइड आर्म थ्रोअर से टक्कर मिलती है। इसके अलावा बाजार में कई इलेक्ट्रॉनिक बॉलिंग मशीन भी मौजूद हैं। लेकिन प्रतीक कहते हैं कि फ्रीबॉलर की यूनिक सेलिंग प्रोपोजिशन (यूएसपी) उसकी कम कीमत और उसका इको फ्रेंडली होना है।

जहां साइड आर्म थ्रोअर की कीमत 2,500 रुपये है, वहीं इलेक्ट्रोनिक बॉलिंग मशीन की कीमत 1.5 लाख रुपये से शुरू होकर 7-8 लाख रुपये तक होती है। एक आम आदमी के लिए इलेक्ट्रॉनिक बॉलिंग मशीन खरीदना मुमकिन नहीं है। हम इन दोनों के बीच में हैं। एक फ्रीबॉलर बॉलिंग मशीन का वजन लगभग 26 किलो होता है। यह इलेक्ट्रॉनिक बॉलिंग मशीन (60 किलो) की तुलना में काफी हल्का है।

फ्रीबॉलर बॉलिंग मशीन ऐमजॉन और Shopify पर 32,000 रुपये पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसकी वास्तविक कीमत 40,000 रुपये है लेकिन फेस्टिव सीजन को देखते हुए फ्रीबॉलर ग्राहकों को कुछ छूट दे रहा है। स्टार्टअप को उम्मीद है कि स्केल को देखते हुए कीमत 25,000 से 30,000 रुपये के बीच आ सकती है।

भविष्य के लिए योजना

फ्रीबॉलर इसी साल 25 सितंबर को लॉन्च किया गया था। प्रतीक का कहना है कि अभी तक हमने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत में 25 यूनिट बेची हैं। इसके अलावा हमारे पास अभी तक 100 प्री-ऑर्डर्स भी आ गए हैं।' प्रतीक ने आगे कहा कि कंपनी की नजरें क्रिकेट खेलने वाले सभी देशों पर हैं। हमारा प्लान ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और बाकी देशों में निर्यात करने का है। ऐसे ही अमेरिकी बाजार में भी कई अवसर हैं।

इसके अलावा भी कई एशियाई लोग अमेरिका में क्रिकेट खेलते हैं। फुटबॉल के बाद 1.5 बिलियन फैन्स के साथ क्रिकेट दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है। हम यूनिवर्सिटी, स्कूल, क्लब, इंडोर स्टेडियम, मॉल्स, रिहायशी इलाकों, पार्क्स और क्रिकेटरों से हमारे प्रॉडक्ट के बारे में संपर्क करेंगे। फ्रीबॉलर (जो कि अभी शुरुआती दौर में है) का लक्ष्य साल 2020 तक लगभग 50,000 यूनिट बेचने का है। यह बाहरी निवेश के विकल्पों की खोज भी कर रहा है। प्रतीक ने कहा, 'दुनिया में क्रिकेट के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कौंसिल (आईसीसी) के साथ मिलकर काम करना हमारे सिर पर एक ताज और जोड़ देगा।'

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