कामयाबी की कोई रिटायरमेंट नहीं होती, 60 की उम्र में 'अच्युता' ने शुरू किया 'यूनिलॉग'

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युवा उद्यमियों की कामयाबी की कहानियां आप अक्सर पढ़ते-सुनते रहे हैं। मगर यूनिलॉग कंटेंट सोल्युशंस के संस्थापक अच्युता बचल्ली ने कामयाबी की एक अलग ही इबारत लिखी है। 70 साल से ज्यादा की उम्र में अच्युता यूनिलॉग के डे टू डे अफेयर्स में सक्रिय रूप से शामिल नहीं हैं। फिर भी 15 साल पहले जब उन्होंने यूनिलॉग कंटेट सोल्युशंस को शुरू किया तब अच्युता उम्र के एक ऐसे पड़ाव पर थे जब ज्यादातर प्रोफेशनल्स रिटायर होना पसंद करते हैं। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया।

तो आप एक ऐसे सामान्य प्रोफेशनल की कहानी पढ़िए जिसने बहुत ही देर से उद्यमिता का राह चुनी मगर अपने बुलंद हौसलों से कामयाबी हासिल की।

शुरुआती दिन

नौकरी करते हुए अच्युता अपने ऑर्गनाइजेशन में टॉप मोस्ट पोजिशन पर पहुंच चुके थे, जहां तक वो पहुंच सकते थे। कंपनी के काम से अपने अनगिनत विदेश दौरों से उन्होंने लाइसेंसिंग, कमिशनिंग और इंजीनियरिंग से कंपनी के खाते में 1.5 करोड़ डॉलर जोड़ चुके थे। अच्युता याद करते हैं- सभी कस्टमर समझते थे कि वो कंपनी के मालिक हैं, मगर जब वो कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के लिए इंडिया आते थे तो मैं वहां मौजूद होना तो दूर मेरी फोटोग्राफ भी उन्हें कहीं नहीं दिखती थी।” आखिरकार अच्युता के आत्मविश्वास और कुछ अलग करने की भूख की वजह से यूनिलॉग कंटेट सोल्युशंस की नींव पड़ी। एक ऐसी कंपनी जो डेटा मैनेजमेंट, प्रोडक्ट की कैटलॉगिंग और बड़े डेटा की एनेलिसिस का काम करती है। आज अमेरिका से लेकर यूरोप तक दुनिया भर में 45 क्लाइंट्स को ये सर्विस देती है।

स्टार्टअप के लिए मन बना लेने के बावजूद अत्युता ने फैसला किया कि वो अपने पूर्व एम्पलॉयर के साथ कंपटिशन नहीं करेंगे या कुछ भी ऐसा नहीं करेंगे जिसमें उनसे कंपटिशन करना पड़े। यूनिलॉग पहले श्रीसॉफ्ट नाम से जाना जाती थी जो डेटा एंट्री और कैटलॉग जैसी सामान्य सर्विस देती थी। बाद में इसने डेटा क्लीनसिंग, टैक्स ऑन मेल सर्विस जैसे काम भी करने लगी। 2 साल पहले इसने प्रोडक्ट डेवलपमेंट का भी काम करना शुरू कर दिया है।

अच्युता के बेटे और यूनिलॉग में सेल्स हेड सुचित बचल्ली को अच्छी तरह से याद है कि उन्होंने किस तरह अपना पहला कस्टमर पाया था। “एक यूएस बेस्ड बॉयोटेक्नोलॉजी कंपनी फिशर साइंटिफिक ने पिताजी को बिजनेस मीटिंग के लिए बुलाया गया था। उस समय हमारे लिए फ्लाइट के टिकट वाकई बहुत महंगे थे। उस समय मेरे पिता के पास एक ही चीज था और वो था उनका क्रेडिट कार्ड। इसलिए वो एक जुलरी शॉप पर गए, क्रेडिट कार्ड को स्वाइप किया और सोना लेकर आए। बाद में उस सोना को बेचकर कैश हासिल किया फिर उन पैसों से अमेरिका जाने का टिकट लिया। हमने कुछ इस तरह के हालात में शुरूआत की। मैं तो उनके दृढ़ इरादे और सहज बुद्धि का कायल हूं। वो मानते हैं कि ये काम करेगा और हम बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा में जीतेंगे।”

अच्युता आज की टॉप 3 आईटी फर्म्स में से एक के साथ प्रतिस्पर्धा में थे और फिशर बिजनेस का काम पाने में कामयाब हुए क्योंकि उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया था कि यूनिलॉग को काम की सख्त जरूरत है। अच्युता याद करते हैं- “फिशर साइंटिफिक के प्रेसीडेंट ने पूछा कि हमें आपको काम क्यों दिया जाए, तब हमने स्वीकार किया था कि हमें काम की सख्त जरूरत है और हमने उनसे ये भी कह दिया कि हम कभी भी मीटिंग में वकील को नहीं लाएंगे।” ये बिना लाग लपेट की कही बातों ने प्रेसीडेंट को इतना प्रभावित किया कि आज वो यानी वॉल्टर रॉउस यूनिलॉग को कंसल्ट करते हैं और अमेरिका में उसके सेल्स और मार्केटिंग डिपार्टमेंट के हेड हैं।

2004 में फिशर का कॉन्ट्रैक्ट यूनिलॉग का पहला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट था तब से लेकर अब तक ये लगातार मजबूत होता गया।

कठिन परिश्रम और प्रगति

अच्युता स्वीकार करते हैं कि उद्यमिता का मतलब है कड़ी मेहनत और अच्छी जिंदगी की चाहत ही उनकी प्रेरणा थी। मगर वो कहते हैं कि बहुत सारी चीजें किसी अज्ञात शक्ति के हाथों हुई। वो शक्ति चीजों को आगे बढ़ा रही है। भगवान दयालु हैं। बहुत सारी चीजें बिना किसी रणनीति की हुईं हैं। लोग आते हैं और मदद करते हैं, हां बहुत सारी दिक्कतें भी थीं मगर हम अच्छी तरह से उभर सके। अच्युता कहते हैं- “मैं एक बार फिर बहुत ही आध्यात्मिक बात कहूंगा। किसी अज्ञात शक्ति ने मेरी हमेशा से रक्षा की है। मैं आपसे ईमानदारी से कहना चाहता हूं, कोई स्मार्टनेस नहीं दिखाना चाहता।” एक चीज जो उन्होंने हमेशा से की वो था लोगों पर विश्वास करना और उनके साथ काम करना। कंपनी हमेशा से अपने काम में ईमानदार रही है। उनका वैल्यू सिस्टम कर्मचारियों का ख्याल रखता है। अच्युता व्यक्तिगत तौर पर मानते हैं कि अगर कोई काम बगैर किसी दबाव के खुशी-खुशी किया जाता है वो मीठा फल देता है।

सुचित मानते हैं कि उन्होंने चीजों को बहुत करीब से नहीं देखा क्योंकि जब उनके पिता ने ऑन्ट्रेप्रिन्योर बनने का फैसला किया तो सुचित उस समय 17 साल के कॉलेज गोइंग छात्र थे। सुचित कहते हैं- “उनकी आखिरी जॉब की प्रकृति भी बहुत हद तक ऑन्ट्रेप्रिन्योरियल टाइप की ही थी।”बहुत सारे ऑन्ट्रेप्रिन्योर की ही तरह अच्युता भी पहली पीढ़ी के ऑन्ट्रेप्रिन्योर हैं जो एक सर्विस ओरिएंटेड फेमिली से आते हैं।

भले ही वो एक केमिकल कंपनी को चला रहे थे मगर उन्होंने आईटी के क्षेत्र में काम शुरू करने का फैसला किया क्योंकि जब यूनिलॉग स्टार्ट हुआ तो उस समय इस सेक्टर में बूम था। शुरुआती दिन तो बहुत अच्छे थे मगर 2001 में इंटरनेट उद्योग में मंदी का कंपनी पर बहुत बुरा असर पड़ा। 100 लोगों की वर्कफोर्स वाली कंपनी 15 लोगों तक आकर सिमट गई। जब 2004 में सुचित ने कंपनी को ज्वॉइन किया तब कंपनी पुनर्निर्माण के चरण में प्रवेश कर रही थी, और तब से लेकर सालों तक ये धीरे-धीरे मगर निरंतर विकास करती गई।

अच्युता ने अपने पैसों और परिवार-दोस्तों से उधार लेकर से कंपनी को शुरू किया था। पिछले साल कंपनी का रेवेन्यू 6 अंकों यानी मिलियन डॉलर क्लब में प्रवेश किया। और कंपनी अब अपने विस्तार पर फोकस कर रही है। मेरे पास कभी भी निवेश की कमी नहीं थी क्योंकि मैंने अपनी पिछली जॉब में पूरी दुनिया को देखा था और मुझे पता था कि ये एरिया एक न एक दिन जरूर चमकेगा। इसलिए काफी उम्र बाद उद्यम शुरू करने के लिए आपके पास धैर्य होता है।

बिजनेस से जुड़े मुद्दे

यूनिलॉग ने आउटसोर्स की गई इंजीनियरिंग सेवाओं के साथ काम शुरू किया था। आउटसोर्स्ड इंजीनियरिंग सेवाओं को कंसल्टिंग कंपनियों को दिया जाता था जो प्लांटस्, कंपनियों, केमिकल फैक्ट्रियों, रिफाइनरी आदि को ये सेवा देती था। उन्होंने बहुत सारी सीएडी ड्राइंग, जीआईएस पिक्चर्स सामानों के लिए बिल बनाने का काम किया। यूनिलॉग आज एक सर्विस कंपनी से बदलकर प्रोडक्ट कंपनी हो चुकी है। सुचित कहते हैं कि धीरे-धीरे अब वो भी समय नजदीक आ गया है जब वो प्रोडक्ट को बेचे बिना सर्विस नहीं देंगे।

यूनिलॉग CIMM2 और XRF 2 नाम से दो प्रोडक्ट बेचती है। CIMM2 किसी भी ऑनलाइन स्टोर के लिए एक आल-इन-वन ई-कॉमर्स सोल्यूशन है, जबकि XRF 2 एक बिग डेटा प्रोडक्ट है जो डेटा एनालिटिक्स में SaaS (सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस) का भरपूर फायदा उठाता है। यूनिलॉग को अपने जिस एक इनवेस्टमेंट पर बहुत गर्व है वो मैसूर का R&D सेन्टर है। यूनिलॉग ने 7 साल पहले मैसूर में अपने आर एंड डी सेंटर की स्थापना की थी जिसमें मैसूर और आस पास के इलाकों के 400 इंजीनियर और पोस्ट ग्रेजुएट कर्मचारी रखे गए। टीम के पास प्रोडक्ट डेटा मैनेजमेंट और बिग डेटा एनालिटिक्स स्पेस में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने और ग्लोबल कस्टमर को सर्व करने का बेहतरीन मौका है।सुचित कहते हैं-“मेरे पिताजी ने मैसूर में पढ़ाई की और आर एंड डी सेंटर का उसी शहर में स्थापित होना घर लौटने जैसा अनुभव है। आज हम इसे अब तक का बेस्ट डिसिजन समझते हैं जो व्यवहारिकता क्वालिटी टैलेंट की उपलब्धता और कॉस्ट इफेक्टिवनेस के मामले में बेस्ट फैसला है।”

सुचित कहते हैं- “अगर आप रात में किसी भी टाइम मैसूर जाते हैं तो आपको यूनिलॉग की लाइट्स जलती मिलेंगी। हम उन्हें ओवरटाइम का पैसा नहीं देते. हमारे कर्मचारी लाइव प्रोजक्ट, रियल प्रॉब्लम्स पर काम कर रहे हैं और अगर कहीं कोई समस्या है तो वो हर वक्त उसे दूर करने के लिए तैयार रहते हैं।” यूनिलॉग टीम मोबाइल एप विकसित करने और फॉर्च्यून 50 कंपनियों के लिए सोल्यूशन देने में माहिर है।

यूनिलॉग के भविष्य के बारे में पूछने पर सुचित का कहना है कि उनके दो और प्रोडक्ट तैयार हो रहे हैं और उनके साथ यूनिलॉग एक कंपलीट प्रोडक्ट कंपनी बनने की राह पर है। सूचित बताते हैं- “2009 में हमने प्रोडक्ट कंपनी के बारे में सोचना शुरू कर दिया था क्योंकि जहां एक ओर हम कॉग्निजेंट और जेनपैक्ट्स से लगातार प्रतिस्पर्धा कर रहे थे वहीं दूसरी ओर हम इन मॉम-एंड-पॉप शॉप्स से प्रतिस्पर्धा कर रहे थे जिनमें स्टार्टअप्स से जुड़ने हमारे पूर्व कर्मचारी भी शामिल थे। हमें बड़े ही व्यापक मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था।” इस तरह के हालात ने उन्हें आर्थिक तौर पर भारी पड़ रहे सर्विस सेगमेंट से बाहर निकलने के तरीकों पर सोचने को मजबूर कर दिया। प्रोडक्ट बनाना ही समस्या का इकलौता समाधान दिख रहा था। ललित कहते हैं- “हो सकता है कि हम भविष्य में किसी तरह की सर्विस ऑफर नहीं करें और सिर्फ प्रोडक्ट्स पर ध्यान दें।”


सुचित बचल्ली
सुचित बचल्ली

सुचित कहते हैं कि यूनिलॉग के पास इनोवेशन की एक अथाह पूंजी है जिसे उनके पिताजी ने शुरू किया था और वो इसे हमेशा जारी रखेंगे।

अब तक के अपने सफर और अनुभव को देखते हुए अच्युता युवा उद्यमियों को कुछ अहम सलाह देते हैं- “युवा ऑन्त्रेप्रिन्योर्स को ये दो चीजें जरूर महसूस करनी चाहिए। पहली बात ये कि आपके पास स्टार्टअप के लिए एक अच्छा आइडिया हो और मेरे हिसाब से उसमें कोई प्लान बी नहीं होना चाहिए। प्लान ए ही अपने आप में पर्याप्त होना चाहिए। उन्हें जूनूनी होना चाहिए और साथ में उनके पास पर्याप्त धैर्य भी होना चाहिए। दूसरी अहम बात ये कि सब कुछ एक टीम के रूप में हो। प्रोडक्ट बनाने वाले, उसे बेचने वाले और फाइनेंस का काम देखने वाले तीन अलग-अलग लोग होने चाहिए। एक ही व्यक्ति को ये तीनों भूमिकाएं ना दी जाएं क्योंकि ये अपने आप में एक समस्या बन जाएगी। ये बहुत कठिन है कि एक ही व्यक्ति पूरे संस्थान को संभाल ले। ये एक टीम वर्क है। मेरा तो ध्यान अपने कैश फ्लो को बरकरार रखने और उसे लाभ योग्य बनाने पर रहेगा।”

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