पुरुषों के दबदबे वाले पोकर गेम में झंडे गाड़ रही हैं भारत की ये महिला खिलाड़ी

विश्व स्तर पर पुरुष-वर्चस्व वाले खेल में ये भारतीय महिला खिलाड़ी रौशन कर रही हैं देश का नाम...

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पोकर भारत में ज्यादातर खेलों की ही तरह महिलाओं के लिए एक असमान खेल का मैदान माना जाता है। पोकर एक कार्ड गेम (ताश के पत्तों का खेल) है जो कौशल और रणनीति के साथ खेला जाता है। ये खेल विश्व स्तर पर पुरुष-वर्चस्व वाला रहा है। यकीन न हो तो तुरंत गूगल करिए पता चल जाएगा।

दीपिका और लैनिंग
दीपिका और लैनिंग
लैनिंग काफी समय से खेल रहीं उन्होंने कई क्लबों में लाइव खेला है। उनका मानना है कि अभ्यास और धैर्य ही इस खेल में सफलता की कुंजी है। वे कहती हैं कि यह सिर्फ पोकर में सफल होने के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि सामान्य रूप से जीवन में भी ये बहुत अहम है। 

भारत में वैसे तो महिलाएं अब अधिकतर खेलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। चाहें वो पुरुष प्रधान क्रिकेट, फुटबॉल या कोई अन्य खेल हो, महिलाएं हर खेल में खुद को बेहतर साबित कर रही हैं। ऐसा ही एक खेल है पोकर जिसे पुरुषों का खेल कहा जाता है। लेकिन अब इस खेल में भारत की महिलाएं देश को अलग स्थान दिला रही हैं। पोकर भारत में ज्यादातर खेलों की ही तरह महिलाओं के लिए एक असमान खेल का मैदान माना जाता है। पोकर एक कार्ड गेम (ताश के पत्तों का खेल) है जो कौशल और रणनीति के साथ खेला जाता है। ये खेल विश्व स्तर पर पुरुष-वर्चस्व वाला रहा है। यकीन न हो तो तुरंत गूगल करिए पता चल जाएगा। हालांकि, अब इस गेम के जरिए महिलाएं न केवल पैसे कमा रही हैं बल्कि भारत सहित दुनिया भर में सट्टेबाजी भी कर रही हैं।

इस गेम के बढ़ते क्रेज के बीच YourStory ने दो महिला पोकर खिलाड़ियों के साथ बातचीत की। ये खिलाड़ी इस गेम में अपने कौशल का लाभ उठाने, पुरुषों के गढ़ को तोड़ने और गेम के जरिए पैसे कमाने के अवसर को भुनाने की कोशिश कर रही हैं। पुणे की छत्तीस वर्षीय दीपिका पाटिल वैसे तो कुछ सालों से पोकर खेल रही हैं लेकिन पिछले सात महीने पहले उन्होंने पेशेवर रूप से खेलना शुरू कर दिया। दीपिका कहती हैं कि "पोकर एक शानदार खेल है। यह एक बड़ी जीत के अवसर के साथ एक अच्छा अनुभव और खुशी देता है। यह पहेली की तरह एक चुनौती है। स्वतंत्रता, मानसिक प्रतिस्पर्धा और रणनीति मुझे खेल के लिए और अधिक आकर्षित करती है। इससे मुझे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली है।"

दीपिका पाटिल
दीपिका पाटिल

दीपिका ने ये खेल अपने चचेरे भाईयों के साथ खेलना सीखा। वह पोकर पर औसतन छह से आठ घंटे व्यतीत करती हैं। दीपिका आगे कहती हैं कि "मैं हमेशा से ही गणितीय चुनौतीपूर्ण खेल खेलने में रूचि रखती थी। मेरा मानना है कि यह मेरा धैर्य है जिसने मुझे पोकर में उत्कृष्टता हासिल करने में मदद की। साथ ही, जब भी मुझे समय मिलता है, मैं ऑनलाइन फोरम और ट्यूटोरियल्स पर लगभग दो घंटे बिताती हूं। मुझे हर रोज इतना समय देना पड़ता है क्योंकि खेल हमारे देश में विकसित हो रहा है, और एक कदम आगे बढ़ने के लिए, आपको कड़ी मेहनत करनी होगी।"

बेंगलुरु की रहने वाली, 28 वर्षीय लैनिंग थो, पिछले तीन सालों से व्यावसायिक रूप से पोकर खेल रही हैं। वूमेन स्टडी में पोस्ट ग्रेजुएट लैनिंग एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के साथ काम करती हैं। लैनिंग वैसे तो अन्य कार्ड गेम भी खेलती हैं लेकिन पोकर को ज्यादा एंज्वॉय करती हैं। क्योंकि इसके वो चार चरण - प्रीफ्लॉप, फ्लॉप, टर्न और रिवर उन्हें बेहद पसंद है। वह कहती हैं, "मैंने स्लॉट मशीनों पर इस गेम को खेलकर खेलना सीखा। लेकिन इसके अलावा मुझे मेरे एक करीबी दोस्त ने लाइव और ऑनलाइन पोकर के बारे में भी बताया।" लैनिंग कहीं भी औसतन चार या पांच घंटे के बीच लाइव या ऑनलाइन पोकर खेलती हैं। दोनों महिलाओं ने ज्यादातर ऑनलाइन और भारतीय पोर्टलों जैसे MadOverPoker और The Spartan Poker, Poker Nation के साथ पोकर खेला है। हालांकि लैनिंग ज्यादातर लाइव खेलती हैं तो वहीं दीपिका का खेल ज्यादातर ऑनलाइन होता है। पोकर को भारत में सज्जनतापूर्वक नहीं लिया जाता है क्योंकि लोग इसे जुआं समझते हैं। हालांकि, दोनों महिलाओं को अपने परिवार और मित्र मंडली से बहुत अच्छा समर्थन मिला है।

भेदभाव से निपटना

दीपिका का मानना है कि ये फील्ड भी लैंगिक रूढ़िवाद से घिरा हुआ पुरुष-वर्चस्व वाला है। हालांकि दीपिका इन सबको ज्यादा तबज्जो नहीं देतीं। दीपिका कहती हैं कि "भेदभाव के बारे में बात करें तो, खेलने की क्षमता की तुलना में महिलाओं को उनकी सुंदरता के लिए अधिक ग्लोरीफाई किया जाता है। महिला खिलाड़ियों को उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में कमजोर प्रतिस्पर्धी होने की उम्मीद लगाई जाती है। कई पुरुष पोकर खिलाड़ियों का मानना है कि महिलाएं पोकर टेबल के लिए नहीं बनी हैं, ये केवल गंदे लोगों के लिए एक जगह है। वे अक्सर अपनी महिला अपोनेंट्स को नौसिखियों के रूप में देखते हैं जो शायद ही कभी ब्लफ करती हैं बल्कि आम तौर पर "फिट या फोल्ड" पोकर खेलती हैं। सच कहें तो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं, बस आप अपने खेल को जानते हों और अन्य खिलाड़ियों गाली न दें बस।"

लैनिंग का एक अलग व्यू है।

वे कहती हैं कि, "हां, ज्यादातर खिलाड़ी, विशेष रूप से पेशेवर खिलाड़ी पुरुष हैं, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि मुस्कान सेठी को राष्ट्रपति के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जबकि कोई भी पुरुष खिलाड़ियों में से इसे हासिल नहीं कर पाया। मुझे लगता है कि अगर हम लक्ष्य हासिल करने के लिए दृढ़ हैं तो कुछ भी असंभव नहीं है। मुझे नहीं लगता कि महिला खिलाड़ियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मैं बल्कि पुरुष खिलाड़ियों के बड़े पूल में स्पॉटलाइट में रहने के अवसर के रूप में इसे देखती हूं।"

पैसों की कमाई का खेल

पैसा कमाने के लिए पोकर एक अच्छा तरीका है। यहां तक कि ये दोनों महिलाएं इस बात से सहमत हैं कि यह (पैसा) उन चीजों में से एक है जो उन्हें खेल के प्रति आकर्षित करता है। दीपिका जो लाखों रुपये का मुनाफा कमा रही है, चेतावनी देते हुए कहती हैं, "यदि आप फन और आसानी से पैसे कमाने के लिए खेलना चाहते हैं तो आश्चर्य में पड़ सकते हैं। क्योंकि यदि आप चुनौतियों का आनंद लेना चाहते हैं तो, आपको तकनीक में निपुण होना होगा और स्किल डेवलप करने के लिए आपको प्रयास करना होगा। फिर आप वास्तव में अपने लिए नाम कमा सकते हैं।" लैनिंग कहती हैं कि इस खेल में सफल होने का तरीका यह है कि आप सुनिश्चित करें आपके पास नियंत्रण हो, अपनी सीमाएं जानें और साथ ही अनुशासन बनाए रखें। दोनों महिलाओं को लगता है कि चूंकि इस खेल में अच्छा पैसा है, इसलिए अधिक से अधिक महिलाओं को ये खेल खेलना चाहिए।

सफलता की कुंजी 'अभ्यास और धैर्य'

लैनिंग काफी समय से खेल रहीं उन्होंने कई क्लबों में लाइव खेला है। उनका मानना है कि अभ्यास और धैर्य ही इस खेल में सफलता की कुंजी है। वे कहती हैं कि यह सिर्फ पोकर में सफल होने के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि सामान्य रूप से जीवन में भी ये बहुत अहम है। यदि किसी को प्यार करते हैं तो उस पर ध्यान केंद्रित करें, अपने कौशल में सुधार करें और उस चीज पर उत्कृष्टता प्राप्त करें जिससे आपको लगता है कि आपको सफलता और मान्यता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

लाइव पोकर बहुत चुनौतीपूर्ण है, और जैसा कि लैनिंग बताती हैं, "कभी-कभी लाइव खेलना मुश्किल होता है लेकिन यदि आप खेल के दौरान अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं तो आप हाथ पकड़कर बॉडी लैंग्वेज पढ़ सकते हैं। मुझे फिल इवे (अमेरिकी पेशेवर पोकर खिलाड़ी) के तरीके से प्यार है। वह कभी भी अपना कूलनेस नहीं खोता है चाहें वह कभी हार जाए या कोई उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करे। अगर हम मूर्खतापूर्ण गलती करते हैं तो कुछ भी हो सकता है। इस प्रकार हमारा समर्पण, पढ़ाई और कौशल इस खेल में मायने रखता है।"

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