राज्यसभा से अलविदा: सचिन तेंदुलकर ने प्रधानमंत्री राहत कोष में दान की बतौर सांसद मिली सैलरी

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सचिन के ऑफिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक अपने 30 करोड़ की सांसद निधि से उन्होंने देश के विभिन्न भागों में चल रहे कई प्रॉजेक्ट्स में 7.4 करोड़ रुपये दिए। उनके द्वारा जारी किया गया पैसा ग्रामीण विकास, शिक्षा जैसे क्षेत्र पर खर्च किया गया।

राज्यसभा में सचिन
राज्यसभा में सचिन
जब भी क्रिकेट की बात की जाएगी, सचिन के बिना वो अधूरी ही रहेगी। लेकिन बतौर राजनेता उनका करियर कुछ याद करने के लिए हमें कुछ नहीं दे गया।

क्रिकेट की दुनिया के भगवान कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को 2012 में राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। लेकिन संसद के ऊपरी सदन में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। कम उपस्थिति और अपने सांसद कोष का इस्तेमाल न करने के कारण लगातार उनकी आलोचना होती रही। अब राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने अपना सारा वेतन और भत्ता प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दिया है। सचिन का यह कदम सराहनीय है।

सचिन ने राज्य सभा के कुल कार्यवाही में सिर्फ 7.3 प्रतिशत ही भागीदारी निभाई। उन्होंने 400 दिन के संसदीय सत्रों में केवल 29 दिन ही हिस्सा लिया। उन्होंने 22 प्रश्न सभा के पटल पर रखे हालांकि उन्होंने कोई भी विधेयक पेश नहीं किया। क्रिकेट पिच पर अपने बल्ले का जादू बिखेरने वाले सचिन राजनीति की पिच पर सीधे बोल्ड हो गए। हालांकि उन्होंने संसद ग्राम आदर्श योजना के तहत आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के एक-एक गांवों को गोद लिया और उसके विकास पर अपनी सांसद निधि खर्च की।

सचिन के द्वारा जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक अपने 30 करोड़ की सांसद निधि से उन्होंने देश के विभिन्न भागों में चल रहे कई प्रॉजेक्ट्स में 7.4 करोड़ रुपये दिए। उनके द्वारा जारी किया गया पैसा ग्रामीण विकास, शिक्षा जैसे क्षेत्र पर खर्च किया गया। सचिन कई बार संसद में बोलते वक्त असहज भी नजर आए। क्रिकेट के धुरंधर को शायद अंदाजा नहीं था कि देश की सर्वोच्च पंचायत में जाकर बैठना आसान नहीं होगा। जब भी क्रिकेट की बात की जाएगी, सचिन के बिना वो अधूरी ही रहेगी। लेकिन बतौर राजनेता उनका करियर कुछ याद करने के लिए हमें कुछ नहीं दे गया।

हालांकि सचिन ने अपनी सैलरी जरूर प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दी है। इससे उम्मीद लगाई जा सकती है कि उनकी नीयत हमेशा देश के लिए कुछ बेहतर करने की थी। शायद राजनीति के बारे में उनका कम अनुभव और बाकी के कामों में अधिक व्यस्तता के चलते वे ज्यादा कुछ नहीं कर पाए। 2012 में यूपीए के शासनकाल में सचिन तेंदुलकर को राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। उनके साथ ही मशहूर पूर्व हॉकी खिलाड़ी दिलीप टर्की भी राज्यसभा में गए थे, हालांकि उनका ट्रैक रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा और उन्होंने 94 फीसदी उपस्थिति के साथ कुल 389 सवाल पूछे, जिनमें से 24 पर सरकार ने कुछ करने का आश्वासन भी दिया।

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