इंडिया में स्टार्टअप एक्सलरेटर कैसे सफल हो सकते हैं?

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यस बैंक के सीनियर प्रेसिडेंट और कंट्री हेट अमित शाह ने इस बात पर चर्चा की कैसे उद्यमियों के बीच में एक्लरेटर की भूमिका को और गंभीर किया जाए। इससे बिजनेस करने वालों का माइंडसेट भी बदलेगा।

स्टार्टअप के साथ सामंजस्य बिठाने के बारे में चर्चा करते हुए नवीन ने स्टार्टअप इंडस्ट्री से सवाल किया कि वे कितनी अच्छी ट्रेनिंग हासिल कर सकते हैं। 

टीलैब्स के सीओओ अभिषेक गुप्ता ने बताया कि एक्सलरेटर के लिए एक इनक्यूबेटर या को-वर्किंग स्पेस से अलग हटकर सोचना पड़ेगा। आपको एक निवेशक की तरह सोचना पड़ेगा। 

एक्सलरेटर्स स्टार्टअप के विकास में काफी सहायक होते हैं। ये स्टार्टअप में काफी प्रमुख भूमिका निभाते हैं। उन्हें सपोर्ट देने के साथ ही मॉनिटर भी करते हैं। एक तरफ जहां पूरी दुनिया में स्टार्टअप एक्सलरेटर्स काफी आम प्रवृत्ति है वहीं भारत में अभी इन्हें अपने पैर जमाने हैं। योरस्टोरी के सालाना कार्यक्रम टेकस्पार्क्स-2017 में अक्जिलर वेंचर्स के सीईओ और को-फाउंडर गणपति वेणुगोपाल ने बताया कि अमेरिका जैसे देशों में हर 10 में से एक स्टार्टअप को एक्सलेरटर का सपोर्ट मिलता है। इनमें से एक को इन्वेस्टमेंट जैसी मदद मिलती है तो हर तीन स्टार्टअप के पास एक्सलेरटर होते हैं। लेकिन भारत में यह अनुपात काफी कम है। चर्चा के दौरान बातचीत में टॉप एक्सलरेटर्स से जुड़े लोगों ने बताया कि भारतीय स्टार्टअप इंडस्ट्री में एक्सलरेटर से जुड़ी कई भ्रांतियां फैली हुई हैं और इसी वजह से एक्सलरेटर का चलन काफी कम है।

टीलैब्स के सीओओ अभिषेक गुप्ता ने बताया कि एक्सलरेटर के लिए एक इनक्यूबेटर या को-वर्किंग स्पेस से अलग हटकर सोचना पड़ेगा। आपको एक निवेशक की तरह सोचना पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एक्सलरेटर को अपनी चयन प्रक्रिया को पूरी ईमानदारी से अंजाम देना होगा। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप या उद्यमियों के साथ काम करने पर आपको आसानी से मदद मिल सकती है। वेणुगोपाल ने एक्सलरेटर्स की जरूरत केलिए तीन मापदंडों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'हमें एक्सलरेटर की सफलता को एक प्रोडक्ट के रूप में देखना पड़ेगा। इससे प्रतिभाओं को आकर्षित करने में आसानी होगी।'

माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन इंडिया के स्टार्टअप डायरेक्टर नवीन आसरानी ने स्टार्टअप के साथ अच्छा सामंजस्य स्थापित करने और अपनी भूमिका को परिभाषित करने के लिए एक्सलेरट की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर हाल में स्टार्ट को सफलता के शिखर पर पहुंचाना एक्सलरेटर की जिम्मेदारी होनी चाहिए। हम उनके व्यवसाय के संरक्षक हैं हम खुद बिजनेस नहीं हैं। या तो हम उनकी सही से हेल्प करें या फिर उनके साथ काम ही न करें। किसी भी एक्सलरेटर की सफलता को मापने के लिए ड्राइविंग माइंडसेट एक और महत्वपूर्ण मापदंड है। यस बैंक के सीनियर प्रेसिडेंट और कंट्री हेट अमित शाह ने इस बात पर चर्चा की कैसे उद्यमियों के बीच में एक्लरेटर की भूमिका को और गंभीर किया जाए। इससे बिजनेस करने वालों का माइंडसेट भी बदलेगा।

नेटऐप एक्सलेरटर की सीनियर मैनेजर मधुरिमा अग्रवाल ने स्टार्टअप इकॉसिस्टम में एक्सलरेटर की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक्सलरेटर प्रोग्राम की सफलता को परिभाषित करने के लिए हमें तीन मापदंडों पर जोर देने की जरूरत है। ये सभी अच्छे टेक प्रोडक्ट्स बना रहे हैं जिसे इंडस्ट्री से अच्छी स्वीकृति भी मिल रही है। ये मार्केट के लिए काफी अच्छे प्रॉडक्ट हैं। स्टार्टअप के साथ सामंजस्य बिठाने के बारे में चर्चा करते हुए नवीन ने स्टार्टअप इंडस्ट्री से सवाल किया कि वे कितनी अच्छी ट्रेनिंग हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स को काफी सावधानी बरतते हुए अपना एक्सलरेटर चुनना पड़ेगा। यह एक लॉन्ग टर्म एंगेजमेंट है इसलिए स्टार्टअप को अपनी दूरस्थ लक्ष्य के लिए काम करना होगा।

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