जामिया में पढ़ने वाले इलेक्ट्रीशियन के बेटे को मिला अमेरिका से 70 लाख का ऑफर

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जिस छात्र की घरेलू फटेहाली में पढ़ाई-लिखाई एक साल मिड सेशन में थम जाए और उसे ही आगे चलकर सत्तर लाख के पैकेज पर जानी-मानी अमेरिकी मोटर कंपनी में इंजीनियर की शानदार नौकरी मिल जाए, वह निश्चित ही नई पीढ़ी के लिए मिसाल है। ईद के मौके पर अपने घर वालों को यह बेजोड़ तोहफा जामिया मिलिया के छात्र मोहम्मद आमिर अली ने दिया है।

आमिर ने बताया कि उनके इलेक्ट्रिशियन पिता ने उन्हें पढ़ाने के लिए जीवन में तमाम कठिनाइयां बर्दाश्त की हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई जामिया मिलिया इस्लामिया से ही की है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के मुताबिक छात्र मोहम्मद आमिर अली ने बकरीद के मौके पर अपने घर वालों को एक खूबसूरत सौगात से नवाजा है। आमिर का 70 लाख रुपए के सालाना पैकेज पर नॉर्थ कैरोलिना (अमेरिका) की फ्रिशॅन मोटर वर्क्स कंपनी में में चयन हुआ है। जामिया के प्रशिक्षण एवं नियुक्ति अधिकारी रिहान खान सूरी का कहना है कि जामिया के इतिहास में पहली बार इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे छात्र को इतना बड़ा पैकेज ऑफर हुआ है। यह इस साल का अब तक का सार्वाधिक बड़ा पैकेज रहा है। 

दिल्ली के तिकोना पार्क इलाके में रहने वाले आमिर के पिता शमशाद अली इलेक्ट्रिशियन और मां नूर फातिमा गृहिणी हैं। आमिर का कहना है कि वह दिसंबर में ज्वॉइन करने के लिए अमेरिका जाएंगे। उन्होंने अपने माता-पिता से भी कह दिया है कि वह पैसे के लिए कभी भी स्थायी रूप से अपना वतन नहीं छोड़ेंगे। उनकी जड़ें भारत में ही सबसे ज्यादा महफूज हैं। वह सिर्फ एक अच्छी नौकरी और अपने क्षेत्र में बेहतर शोध के लिए अमेरिका जा रहे हैं। वहां काम-काज ठीक से संभाल लेने के बाद वह अपने पूरे परिवार को अमेरिका घुमाएंगे। यह नौकरी मिलने से वह बहुत खुश और अंदर से अपने को मजबूत महसूस कर रहे हैं।

आमिर ने बताया कि उनके इलेक्ट्रिशियन पिता ने उन्हें पढ़ाने के लिए जीवन में तमाम कठिनाइयां बर्दाश्त की हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई जामिया मिलिया इस्लामिया से ही की है। उन्होंने वर्ष 2014 में बारहवीं करने के बाद घरेलू परिस्थितियों के कारण अपना एक साल ड्रॉप कर दिया था। फिर वर्ष 2015 में डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और उसी साल पास भी कर गए। उन्होंने पढ़ाई के दौरान अपने प्रोजेक्ट में 'मारुति-800' को इलेक्ट्रिक कार में तब्दील कर दिया था। इसी प्रोजेक्ट की सफलता पर अब उनका अमेरिका की मोटर कंपनी में चयन हुआ है। मोटर उद्योग के क्षेत्र में फ्रिशॅन मोटर वर्क्स अमेरिका की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनी है। आमिर की जिंदगी में एक दिन आज का है और एक दिन वह भी था, जब जेईई मेन परीक्षा देने के बाद एनएसआइटी में बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर में उनका दाखिला हो गया था, लेकिन आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण वह हाशिये पर थमे रहे। उस वक्त दाखिला नहीं ले सके थे, जिससे उनका एक वर्ष बर्बाद हो गया। वह कसक आज भी उनका दिल दुखाती रहती है। बारहवीं में उनको फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ और बॉयोलॉजी से कुल 70.8 फीसद अंक मिले थे। मूल रूप से मेरठ (उ.प्र.) के रहने वाले आमिर के माता पिता दिल्ली के जामिया नगर में रहते हैं।

ईद से ठीक एक दिन पहले आमिर को अमेरिकी कंपनी में सालाना सत्तर लाख पैकेज की नौकरी का तोहफा मिलना उनके घर-परिवार के अलावा सारे दोस्त-मित्रों, रिश्तेदारों के लिए भी बेमिसाल खुशी की बात है। उनके पिता शमशाद अली बताते हैं कि बचपन से ही आमिर इलेक्ट्रिक उपकरणों से जुड़े सवाल पूछता रहता था। वह उसके सवालों का जवाब नहीं दे पाते थे। उन्हें खुशी है कि उनके बेटे को अच्छे पैकेज पर अब अमेरिका की इतनी बड़ी कंपनी नौकरी दे रही है। सच ही कहा है कि दिल में हौसला हो तो तूफानों में भी चलकर सफलता हासिल की जा सकती है। बाईस वर्षीय आमिर अली की कामयाबी से तो यही सीख मिलती है। पिछले साल आमिर ने जब मारुति-800 को अपनी मेहनत और योग्यता से इलेक्ट्रिक चार्जिंग कार में तब्दील कर दिया तो 29 अक्टूबर 2017 को उसे जामिया मिलिया के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक समारोह में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद यह जानकारी जामिया की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी गई। उस पर देश-विदेश की कई कंपनियों की नजर पड़ी। और अब उनको अमेरिकी कंपनी में ऊंची छलांग लगाने का सुअवसर हाथ लगा है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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