मॉडलिंग की दुनिया में कितनी होती है कमाई, कैसा है भविष्य?

बनना चाहते हैं मॉडल, तो इस पर ज़रूर ध्यान दें...

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मॉडलिंग और डिजाइनिंग नए जमाने का जुनून है, जिसका जादू नई पीढ़ी के सिर चढ़कर बोल रहा है। इसमें सालाना कई-कई करोड़ की कमाई है। अमेरिकी फैशन वीक सालाना लगभग सौ करोड़ डॉलर का कारोबार कर रहा है तो भारत भी कुछ कम नहीं। खुदरा बाजार में भारतीय परिधान की हिस्सेदारी 56,000 करोड़ रुपए है तो भारतीय कपड़ा उद्योग 49 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। प्रोडक्स के प्रमोशन में लगे मॉडल्स और डिजाइनर्स पर जमकर धनवर्षा हो रही है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
आप दुनिया के टॉप-10 मॉडलों की कमाई पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि यह रोजगार अब कितना मायने रख रहा है और आज की पीढ़ी इस पर क्यों इतनी दीवानी हुई जा रही है। मॉडलों की एक तस्वीर या उनका विज्ञापन करोड़ों की सेल करवा देता है।

पूरी दुनिया में फैशन और मॉडलिंग का बुखार किस तरह नई पीढ़ी के सिर चढ़कर बोल रहा है, एक वाकया याद आता है। दो साल पहले योग गुरू बाबा रामदेव ने जब जींस बेचने की घोषणा की थी, सोशल मीडिया पर खूब हो-हल्ला सा मच गया था। कुछ लोग तो अपनी पूरी रचनात्मकता झोंकते हुए जींस का पैटर्न तैयार करने लगे थे। इस जुनून की वाजिब वजहें हैं। अमेरिका में फरवरी और सितंबर में होने वाला फैशन वीक हर साल लगभग सौ करोड़ डॉलर तक का कारोबार लाता है। डियोर जैसे बड़े नाम वाले फैशन हाउस डीलक्स छुट्टियों के लिए फैशन बनाते हैं। अमीरों के फैशन के लिए होने वाले फैशन शो भी लाजवाब होते हैं क्योंकि कुछ बेचने के लिए भावी खरीदारों का मनोरंजन भी जरूरी माना जाता है।

हमारे देश में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (दिल्ली) फैशन डिजाइनिंग का मशहूर कॉलेज है। यहां फैशन से संबंधित कई कोर्स चलाए जाते हैं। इसी मन-मिजाज को देखते हुए 'न्यूमेरिकल मॉडलिंग ऑफ वेदर एंड क्लाइमेट' के लिए नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकॉस्टिंग, नोएडा हर साल जूनियर रिसर्च फेलो के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित करता है। इच्छुक उम्मीदवार इस साल भी पहली जुलाई तक डाक से आवेदन कर सकते हैं। आज फैशन का जादू हमारे देशी बाजारों पर भी छाया हुआ है। आज के युवा फैशन इंडस्ट्री पर फिदा हैं। बाजार का अलग ताना-बाना है। खुदरा बाजार में भारतीय परिधान की हिस्सेदारी 56,000 करोड़ रुपए है।

भारतीय कपड़ा उद्योग 49 अरब डॉलर का है। वैश्विक कपड़ा बाजार में भारत की हिस्सेदारी 3.5-4 फीसदी है जिसमें तेजी आने की पूरी संभावना है। इन आँकड़ों से साफ है कि वैश्विक फैशन जगत में भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा अच्छे से अच्छे ब्रांड के कपड़े पहनना सबसे अच्छा तथा लेटेस्ट डिजाइन पहनना और हमेशा स्टाइलिश बनाना आज के युवा का शौक है, जिसे संभव करते हैं फैशन डिजाइनर। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स सबसे ज्यादा प्रचलित हुआ है। डिजाइनर अपने ग्राहक वर्ग की रुचि और जरूरत को समझकर अपने डिजाइन को मौसम और ट्रेंड के मुताबिक मार्केट में उतारता है। आज फैशन डिजाइनरों की बहुत मांग है। यह रोजगार, करियर का एक अकूत कमाई वाला क्षेत्र बन चुका है।

आप दुनिया के टॉप-10 मॉडलों की कमाई पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि यह रोजगार अब कितना मायने रख रहा है और आज की पीढ़ी इस पर क्यों इतनी दीवानी हुई जा रही है। मॉडलों की एक तस्वीर या उनका विज्ञापन करोड़ों की सेल करवा देता है। मॉडल्स भी करोड़ों, अरबों के इस खेल में खुद मालामाल हैं। दुनिया की टॉप मॉडलों में कैंडल जेनर (अमेरिका) की कमाई 2.2 करोड़ डॉलर, गिजेल बुंडचेन (ब्राजील) की 1.75 करोड़ डॉलर, क्रिसी टाइगन (अमेरिका) की 1.35 करोड़ डॉलर, आड्रियाना लीमा (ब्राजील) की 1.05 करोड़ डॉलर, गिगी हैडिड (अमेरिका) की 95 लाख डॉलर, रोजी हनटिंग्टन-व्हाइटली (यूके) की 95 लाख डॉलर, कार्ली क्लोस (अमेरिका) की 90 लाख डॉलर, लियु वेन (चीन) की 65 लाख डॉलर, बेला हैडिड (अमेरिका) की 60 लाख डॉलर और एश्ले ग्रैहम (अमेरिका) की कमाई 55 लाख डॉलर है।

सबसे ज्यादा कमाई सुपर मॉडलों की होती है। गिजेले बुंडचेन ने रिटायर हो जाने के बावजूद 3 करोड़ डॉलर की कमाई कर ली। सामान्य मॉडल भी एक साल में 18,000 से 3,00,000 डॉलर तक की कमाई कर लेती हैं। बड़े डिजायनर तो फैशन शो से करोड़ों कमाते हैं। फैशन उद्योग में अकेले डिजायनरों तक की औसत कमाई साल में करीब 1,00,000 डॉलर है। फैशन उद्योग में पर्दे के पीछे भी बहुत से लोग काम करते हैं। हेयर स्टाइलिस्ट साल में 42,000 डॉलर, मेकअप आर्टिस्ट 60,000 डॉलर तक, ड्रेस स्टाइलिस्ट 69,000 डॉलर तक, फैशन पत्रिकाओं के संपादक 20 लाख डॉलर तक, उनके असिस्टेंट 40,000 डॉलर तक, पत्रकार 78,000 डॉलर तक, फैशन लेबल के पीआर मैनेजर 92,000 डॉलर तक और फोटोग्राफर साल में करीब 62,000 डॉलर तक कमा लेते हैं।

बाकी दुनिया की तरह भारतीय फैशन उद्योग भी तेजी से छलांग लगा रहा है। यहां भी फैशन डिजाइनर्स और मॉडल्स की ऊंची कीमत लगती है। उनमें मनीष मल्होत्रा, तरुण तहिलियानी, रितु बेरी, जे.जे. वालया, रोहित बाल, रितु कुमार, वेंडेल रोड्रीक्स, सब्यसाची मुखर्जी, विक्रम फडनीस, मनीष अरोड़ा, जूही चावला, उर्मिला मातोंडकर, करीना कपूर, दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट, लारा दत्ता, कैटरीना कैफ़, दीया मिर्जा, ईशा गुप्ता, ऐश्वर्या राय, माधुरी दीक्षित, सोनम कपूर, रानी मुखर्जी, प्रीति जिंटा आदि के नाम प्रमुखता से आते हैं। हाल की सुर्खियों में श्रीदेवी की बेटी खुशी कपूर इन दिनो मॉडल की दुनिया में जाने के लिए बेकरार हैं। पैसे और ग्लैमर की चकाचौंध ने इस क्षेत्र में रोजगार की बड़ी संभावनाएं पैदा की हैं।

मॉडलिंग एक ऐसा करियर है जिसमे अपनी जिंदगी बनाने हर साल हजारों युवा जा रहे हैं। आजकल किसी भी ब्रांड की इज्जत उसके मॉडल के हाथ में होती है, पर मॉडल बनना इतना आसान भी नहीं। कड़ी मेहनत और लंबा स्ट्रगल होता है, तब जाकर कोई इस ग्लैमर इंडस्ट्री में टिक पाता है। कामयाबी उनके टैलेंट और सोशल कनेक्शन पर निर्भर करती है। इस समय कम उम्र में ही मॉडल प्रति असाइनमेंट एक से दो लाख रुपए तक कमा रहे हैं तो कुछ प्रतिदिन 5,000 ही कमा पा रहे हैं। एक रैम्प वॉक के लिए एक मॉडल को 10-15 हजार रुपए मिल जाते हैं। यह पैसा डिजाइनर के नाम के साथ बढ़ता है। बड़े फैशन डिजाइनर के शो में यह फीस 30-40 हजार तक पहुँच जाती है।

अनुभवी मॉडल की एक शो की कीमत आसानी से लाखों में होती है। एक-एक विज्ञापन के लिए लाखों-लाख रुपए मिलते हैं। छोटे मोटे ब्रांड भी पचास हजार रुपए तक दे देते हैं। टेलीविजन मॉडलिंग की अपनी अलग दुनिया है। इसमें मूवी कैमरों के सामने मॉडलिंग करनी पड़ती है, जिसका इस्तेमाल टीवी विज्ञापनों, सिनेमा, वीडियो, इंटरनेट आदि में किया जाता है। प्रिंट मॉडलिंग में स्टिल फोटोग्राफर्स मॉडल्स की तस्वीरें उतारते हैं, जिनका इस्तेमाल अखबार, ब्रोशर्स, पत्रिकाओं, कैटलॉग, कैलेंडरों आदि में किया जाता है। शोरूम मॉडल्स आमतौर पर निर्यातकों, गारमेंट निर्माताओं और बड़े रिटेलरों के लिए काम करते हुए खरीदारों के सामने फैशन के नवीनतम रुझानों को प्रदर्शित करते हैं। रैंप मॉडलिंग में मॉडल्स को दर्शकों के सामने गारमेंट्स व ऐसेसरीज प्रदर्शित करनी होती है।

दुनिया भर में लाखों कंपनियों द्वारा विविध प्रकार के उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। इसके बाद असली चुनौती होती है तैयार माल की बिक्री की। मार्केटिंग की विभिन्न युक्तियों द्वारा भावी ग्राहकों को आकर्षित कर इस तैयार माल को विश्व भर के बाज़ार तक पहुंचा कर बेचा जाता है। इस क्रम में उत्पादों को प्रदर्शित कर उनकी खूबियाँ गिनाने वाले विज्ञापनों की काफी प्रभावी भूमिका होती है। विज्ञापनों में मॉडल्स द्वारा न सिर्फ प्रोडक्ट्स की विशेषताओं का बखान नपे-तुले शब्दों में किया जाता है बल्कि उक्त मॉडल के व्यक्तित्व के निखार को भी प्रोडक्ट से जोड़कर दर्शाया जाता है। ऐसे में यह आसानी से समझा जा सकता है कि कितने बड़े पैमाने पर नए एवं ताजगी भरे चेहरे के साथ आकर्षक और युवा मॉडल्स की तलाश मार्केटिंग एजेंसियों और विज्ञापन कंपनियों को रहती है।

मॉडलिंग की इंडस्ट्री में हाल के वर्षों में जोरदार उछाल आया है। इस फील्ड में अब लड़कियों ही नहीं, पुरुष मॉडल का भी दबदबा बढ़ा है। खासकर फैशन उद्योग और टेक्सटाइल उद्योग के विकास के कारण मॉडलिंग उद्योग को पंख लगे हैं। फैशन और मॉडलिंग उद्योग के साथ ही हमारे देश में ऐसे शिक्षण संस्थानों का भी जाल सा बिछ गया है, जिनमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (अहमदाबाद), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, गांधीनगर, बंगलूर), नॉर्थ इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (मोहाली), पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन (नई दिल्ली), जेडी इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन डिजाइन (मुबई), नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन डिजाइन (चंडीगढ़), फेस इंस्टीट्यूट दादर (मुंबई), मेहर भसीन अकादमी (नई दिल्ली) के नाम उल्लेखनीय हैं।

मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड अमन ग्रेवाल कहती हैं कि 'देश की हर लड़की के लिए मिस इंडिया बनना एक खूबसूरत सपना है। मुझे अच्छा लगता है जब कोई इस तरह की कम्पटीशन के लिए खुद को तैयार करता है। मैं चाहती हूं सिर्फ खूबसूरती को ही नहीं, बुद्धि को भी ज्यादा महत्त्व दिया जाना चाहिए। मैंने इकोनॉमी में गोल्ड मेडल हासिल किया। वॉलीबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी रही। फिर मुझे फैशन डिजाइनर बनना था, लेकिन बाद में एक स्कूल में टीचर के तौर पर सिलेक्ट हुई। मिसेज इंडिया प्रतियोगिता में अव्वल आई। 2014 में मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब जीता।' मॉडलिंग और डिजाइनिंग में पैसे के साथ इज्जत-शोहरत को भी हवा मिलती रही है। आध्यात्मिक नेता भैयूजी महाराज तक ने मॉडलिंग से अपना करियर शुरू किया था।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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