‘आईटीचिंटू’, आईटी पेशेवरों की हर मर्ज़ की दवा

जून, 2013 में हुई ‘आईटीचिंटू’ की स्थापनापुणें में है कंपनी का कारोबारनौकरी से लेकर जीवन साथी की तलाश में मदद करता है ‘आईटीचिंटू’

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अपने लिए तो हर कोई सोचना है लेकिन कम ही लोग होते हैं जो दूसरों के लिए सोचते हैं। दीपेंद्र सिंह बुंदेला पूर्व आईटी पेशेवर हैं जो दूसरे आईटी पेशवर की जिंदगी को थोड़ी आरामदेह बनाने ने की ख्वाहिश रखते हैं। अपनी इसी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होने जून 2013 में रिनी कोठारी के साथ मिलकर आईटीचिंटू की स्थापना की। ये पोर्टल उन पेशेवर आईटी कर्मचारियों के लिए मनोरंजक और यूटिलिटी पोर्टल है जो पुणे में रहकर काम करते हैं। देश में करीब 2.75 मिलियन आईटी पेशेवर हैं। आईटी चिटूं पेशेवर लोगों की हर समस्या का एक ही पोर्टल में सुलझाने का दावा करता है। यहां पर फिर चाहे किराये के लिए घर की जरूरत हो, मोटरसाइकिल खरीदनी हो, पुराना मोबाइल बेचना हो, सप्ताहांत का कोई कार्यक्रम बनाना हो या फिर अपने लिए सपनों के साथी की तलाश करनी हो। ये सब काम आईटीचिंटू अकेला कर देता है।

दीपेंद्र सिंह बुंदेला, रिनी कोठारी
दीपेंद्र सिंह बुंदेला, रिनी कोठारी

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले दीपेंद्र कुछ साल पहले तक कई एमएनसी कंपनियों को जुड़ी अपनी सेवाएं देते थे। जल्द ही उनको इस बात का अनुमान हो गया कि वो ज्यादा वक्त तक ऐसे काम नहीं कर पाएंगे। आज वो आईटीचिंटू की यात्रा से खुश हैं उनके मुताबिक अब तक की उनकी यात्रा काफी शानदार रही है और इसका प्रभाव आईटीचिंटू के ग्राहक, कर्मचारी और दूसरे लोगों पर पड़ा है। पिछले एक दशक के दौरान आईटी उद्योग ने तेजी से बढ़ा है इस कारण ग्राहकों का एक नया वर्ग तैयार हो गया है। पेशेवर युवा कई आईटी हब जैसे बेंगलौर, पुणे, हैदराबाद, गुड़गांव और दूसरी जगहों पर रहते हैं। इन लोगों के सामने चुनौती होती है रहने के लिए घर की, घर के समान को खरीदने या बेचने की, नौकरी बदलने की या फिर जीवन साथी ढूंढने की। दौड़ती भागती इस जिंदगी ने नया बाजार खड़ा कर दिया है।

ज्यादातर पेशेवर भारतीय अपना काफी समय ऑफिस में बिताते हैं। दीपेंद्र के मुताबिक ऐसे में इन लोगों को जरूरत होती है दोस्ती, बातचीत और अंतरंगता की। लंबा वक्त ऑफिस में गुजारने के बाद हर कोई आराम चाहता है। साथ ही हर किसी की कोशिश होती है कि वो अपनी जिंदगी में कुछ नया जोड़ सके ताकि उसकी जिंदगी ज्यादा मजेदार और आरामदायक हो। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए आईटी चिंटू की स्थापना की गई। जो आईटी पेशवरों को बुनियादी सुविधाएं देता है। साथ ही ये एक माध्यम है समान सोच रखने वालों के बीच हंसी मजाक करने का। दीपेंद्र का कहना है कि आईटी चिंटु का नाम आम जिंदगी से उठाया गया है। ये आईटी की जीवन शैली से मेल खाता है। लोग इस ब्रांड के साथ आसानी से जुड़ जाते हैं। ये नाम ऐसा है जो कई चुटकलों में सुनाई देता है। चिटूं ‘आईटी’ से जुड़ा एक ‘आम आदमी’ है। जो इस क्षेत्र में नया होने के साथ साथ मासूम और मेहनती भी है। वो सफलता से जुड़ना तो चाहता है लेकिन उसे नहीं मालूम कि ऐसा कैसे संभव है। वो सिर्फ काम करता है और इस कोशिश में रहता है कि दिन के 11 से 12 घंटे वो ऑफिस में रहे। यहां तक की सप्ताहांत में भी। इतनी मेहनत के बावजूद उसे सिर्फ दो शब्द शाबाशी के मिलते हैं “बढ़िया काम किया चिंटू’।

दीपेंद्र के मुताबिक आईटी पेशवर दिन भर में 9 से 12 घंटों तक काम करते हैं ऐसे में उनके पास वक्त नहीं होता कि वो अपने किसी शौक या दिलचस्पी को पूरा कर सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आईटी चिंटू सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म की भूमिका भी निभाता है। जिसकी कोशिश होती है कि वो समान विचार वाले लोग और एक समान शौक रखने वाले लोगों को एक साथ जोड़े। इसके लिए आईटीचिंटू के पास सप्ताहांत के लिए कई तरह के कार्यक्रम होते हैं। सोशल नेटवर्किंग के अलावा आईटीचिंटू की कोशिश है कि सभी पेशेवर लोगों को अपनी जरूरत का सामान एक ही जगह पर मिल जाए। दीपेंद्र के मुताबिक ये आइडिया बिल्कुल नया है और इनके पास कई तरह की सेवाओं के लिए ढेर सारे विकल्प हैं। यही कारण है कि दिन ब दिन लोगों के बीच इनकी पहचान बढ़ रही है। बाजार में लंबे वक्त तक टिके रहने के लिये इन लोगों ने अपना ध्यान खास वर्ग पर लगाया हुआ है।

आईटी चिंटू की स्थापना जून, 2013 में हुई थी। जिसके बाद इन लोगों को जो प्रतिक्रियाएं मिली वो इन लोगों के लिए काफी उत्साहवर्धक रहीं। कुछ ही महिनों में आईटीचिटूं को हजारों आईटी प्रोफेसर खंगाल चुके थे। यही कारण है कि शुरूआती कुछ ही महिनों के दौरान इसके 13 हजार पंजीकृत उपयोगकर्ता बन गये थे, 9 हजार से ज्यादा विज्ञापन, 600 के आसपास ऑनलाइन लेनदेन और हजारों फेसबुक फेन इसके साथ जुड़ गए। आईटी चिंटू की शुरूआत इन लोगों ने खुद की पूंजी से की थी लेकिन अब अपना कारोबार बढ़ाने की चाहत में इन लोगों की नजर कंपनी में निवेश की है। विज्ञापन से इन लोगों की काफी आय होती है इसके अलावा ई-कॉमर्स के जरिये युवा पेशवर लोगों को फैशन स्टोर भी उपलब्ध कराते हैं। फिलहाल इनका ध्यान अपनी गुणवत्ता को बरकरार रखने और ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने पर है।