गरीबों की जिंदगी में उजाले का दूसरा नाम 'बेयरफुट पावर'

- निम्न आय वर्ग तक पहुंची बेयरफुट पावर कंपनी- कंपनी ने तय किए अपने लिए पांच सूत्र- कम कीमत पर ज्यादा सुविधाएं दे रही है बेयरफुट पावर- ऑस्ट्रेलिया से शुरु हुआ बेयरफुट का सफर 33 से ज्यादा देशों तक पहुंचा

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बॉटम ऑफ द इकनॉमिक पिरामिड (बीओपी) यानी कुल आबादी का वह हिस्सा जो बहुत ज्यादा गरीब है। जिसकी वार्षिक आय बेहद कम है। चूंकि इस वर्ग के लोगों के पास पैसे की कमी रहती है इसलिए यह लोग बस अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में ही पैसा खर्च करते हैं। उसी सामान को खरीदते हैं जो उनकी जरूरतों से जुड़ा हो। यही वजह है कि इस वर्ग की ओर बाजार भी बहुत कम ध्यान देता है। कंपनियां इस बीओपी वर्ग के लिए कुछ नया प्रस्तुत करने में हमेशा हिचकिचाती हैं और इस वर्ग पर भरोसा नहीं करती। बीओपी वर्ग के पास क्रय शक्ति तो कम होती ही है लेकिन साथ ही यह भी माना जाता है कि ये लोग नई और बेहतरीन चीजों में पैसा नहीं लगाते। जिस कारण इस वर्ग के लिए बाजार में बहुत ही कम उत्पाद मौजूद हैं। रही बात कंपनियों की तो वे वही उत्पाद बाजार में लाना चाहती हैं जिसकी मांग ज्यादा हो और साथ ही उसे खरीदने के लिए लोगों के पास पैसा भी हो।

बाजार में फैली इस सोच के विपरीत आस्ट्रेलिया की एक कंपनी बेयरफुट पावर ने 2005 में इसी बीओपी वर्ग को ध्यान में रखते हुए काम करना शुरू किया। कंपनी का लक्ष्य गरीबों के घरों को रौशन करने के लिए सौर ऊर्जा से निर्मित लैंप बनाना है। देखते ही देखते कंपनी ने दिन दगुनी रात चौगुनी तरक्की की और आज कंपनी 33 देशों में काम कर रही है। बेयरफुट पावर ने सन 2012 में भारत में कदम रखा और तेजी से विकास किया।

बेयरफुट पावर सौर ऊर्जा वाले रौशनी के उपकरण बनाती है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जिंदगी में उजाला आ गया है। पहले जहां रौशनी के लिए केरोसीन का प्रयोग ही होता था, अब सौर ऊर्जा से संचालित लैंपों का इस्तेमाल होने लगा। केरोसीन लैंप पर्यावरण की दृष्टि से भी सही नहीं हैं साथ ही केरोसीन लैंप का इस्तेमाल महंगा भी पड़ता है। वहीं अब जब बेयरफुट पावर ने सोलर एनर्जी से जलने वाला उपकरण बाजार में उतारा है तो यह गरीबों को ज्यादा किफायती लग रहा है। यह केरोसीन से जलने वाले लैंप से अच्छा विकल्प है। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह फायदेमंद है।

दुनिया की कुल आबादी का 60 प्रतिशत यानी लगभग 3.7 बिलियन लोग बॉटम ऑफ पिरामिड में आते हैं। जिसमें इस ज्यादातर बीओपी वर्ग के लोग भारत और चीन में रहते हैं। यह भी एक बड़ी वजह है कि जब कंपनी ने भारत में कदम रखा तो उसे बहुत फायदा पहुंचा। कंपनी को मात्र 2 साल में उम्मीद से कहीं ज्यादा मुनाफा हुआ। भारत में वर्नी सानू बेयरफुट पावर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। भारत के 15 राज्यों में बेयरफुट पावर के प्रोडक्ट्स बेचे जाते हैं इन प्रोडक्ट्स का निर्माण चीन में होता है और इनकी डिज़ाइनिंग का काम आस्ट्रेलिया में किया जाता है।

बेयरफुट पावर के पांच सिद्धांत -

ग्राहकों की जरूरत को ध्यान में रखना -

बेयरफुट पावर उन ग्राहकों को ध्यान में रखता है जो रौशनी के लिए सही तरीके प्रयोग नहीं कर रहे हैं जैसे - केरोसीन लैंप का इस्तेमाल। केरोसीन लैंप रौशनी पाने का सही व साफ-सुथरा तरीका नहीं है। इससे प्रदूषण फैलता है साथ ही यह आंखों के लिए भी ठीक नहीं होता। इस प्रकार कंपनी केरोसनी लैंप की रोशनी इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपना टारगेट बनाती है।

ग्राहकों की खरीदारी की क्षमता बढ़ाना -

कंपनी ग्राहकों को अपने उत्पाद खरीदने के लिए विभिन्न सुविधाएं देती है जैसे - मासिक किश्तों पर। सरकारी बैंकों से मिलकर कर्ज दिलवाना, माइक्रोफाइनेंस के जरिए। इससे गरीब लोग आसानी से कंपनी के प्रोडक्ट्स खरीद सकते हैं।

छोटे उद्यमियों के जरिए माल बेचना -

माल आसानी से ग्राहकों तक पहुंच जाए इसके लिए बेयरफुट छोटे उद्यमियों के जरिए माल बेचता है। बेयरफुट पावर ने केआईवीए जोकि एक नॉन प्रॉफिट संस्थान है और गरीब लोगों को आर्थिक मदद देता है और छोटे संस्थानों को लोन देता है, के साथ करार किया है।

एक कुशल डिलिवरी सिस्टम का निर्माण -

बेयरफुट पावर की एक इन-हाउज लॉजिस्टिक टीम है जोकि थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक से जुड़ी हुई है जैसे ब्लू डार्ट। कंपनी के 90 प्रतिशत उत्पाद ग्रामीण इलाकों में जाते हैं जहां अक्सर दूसरी कंपनी उत्पादों को नहीं पहुंचा पाती इसलिए कंपनी खुद ही ये काम करती है।

ग्राहक की जरूरतों को समझना -

बेयरफुट पावर अपने ग्राहकों की जरूरतों के बारे में लगातार जानने का प्रयास करता रहता है। और यही चाहता है कि वो अपने ग्राहकों को ऐसी सुविधाएं दे जिसकी उम्मीद उसके ग्राहक उससे करते हैं। बेयरफुट के ग्राहक लैंप के बाद अब फोन चार्जर, पंखों और टीवी की मांग भी कंपनी से करने लगे हैं।

इन्हीं सब चीजों के कारण कंपनी की ऑपरेशन कॉस्ट काफी कम है। कंपनी की एक छोटी सी टीम है जहां मात्र 8-10 लोग हैं। कंपनी ज्यादा ध्यान ग्रामीण लोगों को प्रशिक्षित करने में लगाती है। बेयरफुट अपने बेहतरीन उत्पादों के जरिए लोगों का भरोसा जीतने का काम करता है ताकि कंपनी का प्रचार स्वयं हो जाए। कंपनी पार्टनरशिप पर जोर देती है। कंपनी उन पार्टनर्स को चुनती है जिनका ग्रामीण इलाकों में नाम और पहचान होती है। इससे कंपनी की मार्केटिंग कॉस्ट एक दम कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ जाता है।

भारत में कंपनी को मिली जबर्दस्त सफलता ने कंपनी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा दिया है और अब बेयरफुट कुछ नए उत्पादों के साथ बाजार में आ रही है। इसके अलावा पहले जहां केवल निम्न आय वर्ग पर ही कंपनी ध्यान दे रही थी, अब कंपनी चाहती है कि वह मध्यवर्गीय लोगों के लिए भी उत्पाद बनाए ताकि कंपनी ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ सके।

आज कंपनी अपनी उम्मीद से 300 गुणा ज्यादा तरक्की कर चुकी है। जिसका कारण केवल उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं है बल्कि इसके सामाजिक पहलू भी हैं जो कंपनी की सफलता के मुख्य कारक हैं।

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