आयकर रिटर्न भरने का सबसे आसान तरीका, 'क्लियर टैक्स'

2011 में शुरू हुई ‘क्लियर टैक्स’आयकर भरने में मददगार ‘क्लियर टैक्स’‘क्लियर टैक्स’ के पास मजबूत कोर टीम

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आयकर रिटर्न दाखिल करना काफी मुश्किल और थका देने वाला काम माना जाता है लेकिन क्लियर टैक्स इस प्रक्रिया को आसान बनाने में काफी मददगार साबित हो रहा है। क्लियर टैक्स एक ऐसा माध्यम है जो ऑनलाइन तरीके से व्यक्तिगत आयकर भरने में लोगों की मदद करता है। इसके लिए करदाता को ऑनलाइन फॉर्म 16 अपलोड करना होता है जिसके बाद क्लियर टैक्स का सॉफ्टवेयर तुरंत और अपने आप सारी प्रक्रिया को पूरी करता है। ये मूल रूप से आयकर के क्षेत्र में तकनीकी कंपनी है। इस कंपनी के बारे में हमने साल 2012 में लिखा था और तब हमने इसे देश की पांच बड़ी शुरूआती वित्तीय कंपनियों में से एक बताया था। इस कंपनी की स्थापना अर्चित गुप्ता, राजा राम गुप्ता ने श्रीवत्सन और अंकित सोलंकी के साथ मिलकर की थी। तब से कंपनी साल दर साल अपना विकास करते जा रही है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने कंपनी के सीईओ अर्चित से बात की और उनसे ये जानने की कोशिश की, कि उनकी कंपनी की भविष्य में क्या योजनाएं हैं।

कैसे हुई शुरूआत

अर्चित आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व छात्र रह चुके हैं। जिन्होने विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में मास्टर करने की कोशिश की। इसके अलावा उन्होने डॉक्टरेट बनने के लिए भी मेहनत की लेकिन डाटा डोमेन इंक में काम करने के कारण वो इसे पूरा नहीं कर सके। यहां उन्होने करीब 3 साल तक नौकरी की इस दौरान वो सिलिकॉन वैली की संस्कृति से अच्छी तरह परिचित हो गए थे। डाटा डोमेन की अपनी एक दिलचस्प कहानी है जिसने 2.1 बिलियन डॉलर में ईएमसी द्वारा अधिग्रहण किया था। इस दौरान अर्चित को काफी कुछ सीखने को मिला जो इस अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान वहां पर मौजूद थे।

अर्चित के मुताबिक “सिलिकॉन वैली में मेरे कई दोस्त थे जिन्होने अपना काम शुरू किया था और अपने को जोखिम में डालते हुए बड़े अधिग्रहण किये थे।” अपने दम पर कुछ करने की इच्छा को अर्चित ने मरने नहीं दिया और भारत आकर वो कुछ अलग करने का मोह नहीं छोड़ सके। उनकी इस इच्छा को हकीकत बनाने में साथ दिया उनके पिता ने। जो पेशे चार्टड एकाउंटेंट थे। इस तरह साल 2011 में क्लियर टैक्स का जन्म हुआ।

तब से अब तक की यात्रा

अर्चित गुप्ता, सह संस्थापक
अर्चित गुप्ता, सह संस्थापक

अर्चित ने अपने पिता श्री राजा राम गुप्ता के साथ मिलकर कंपनी की स्थापना की और उनकी इस कंपनी ने श्रीवत्सन(वीपी) और अंकित(सीटीओ) की मदद से तैयार की मजबूत कोर टीम। अर्चित के मुताबिक “ये एक मजेदार यात्रा थी क्योंकि आयकर कोई आकर्षक बिजनैस नहीं था। (जहां पर वित्तीय और तकनीकी जानकारी हमें पसंद थी) यही चीज इसे मजेदार तरीके से अपने उत्पाद को डिजाइन करने और कंपनी के निर्माण में हमें विकल्प के रूप में मिली।“ क्लियर टैक्स का दावा है कि वो इस क्षेत्र में सबसे तेजी से उभरने वाली वेबसाइट है। सरकार ने भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आयकर दाखिल करने को जरूरी बना दिया है। इस साल अकेले 25 मिलियन लोग अपना आयकर ऑनलाइन भरेंगे। अर्चित का कहना है कि “क्लियर टैक्स में हमारा मुख्य ध्यान साधारण और उपयोगकर्ताओं के लिए आसान डिजाइन वाला सॉफ्टवेयर तैयार करना है। हमारा सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी आयकर विभाग का एक्सल/जावा पर आधारित सॉफ्टवेयर है जो इस्तेमाल में काफी कठिन है खासतौर से उन लोगों के लिए जो पहली बार इसका इस्तेमाल करते हैं।”

वाई कॉम्बिनेटर के बारे में और आगे का रास्ता

क्लियर टैक्स को इस कार्यक्रम का हिस्सा बने एक महीने से ज्यादा ही हुआ था तब कोर टीम के सदस्यों को भारत और अमेरिका के कई चक्कर लगाने पड़े उस दौरान भारत में आयकर भरने का दौर चल रहा था। आवेदन प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए अर्चित बताते हैं कि “एक बहुत बुनियादी जूरूरत है विश्वास। अगर आप वाईसी से जुड़ना चाहते हों तो उसके लिए आपको आवेदन करना होता है। हमने भी मानक प्रक्रिया के तहत वाई कॉम्बिनेटर में आवेदन किया। इस प्रक्रिया को हमने ऑनलाइन के माध्यम से पूरा किया तब हमने अपनी अर्जी के साथ वीडियो को जमा नहीं किया था (आवेदन के दौरान संस्थापक का वीडियो भी जमा करना पड़ता है) इस दौरान हम अलग अलग शहरों में बैठकों में व्यस्त थे। तब हमें वाईसी से संदेश आया और वीडियो जमा कर अपने आवेदन को पूरा करें। जिसके बाद हमने वीडियो रिकॉर्ड किया और उसके बाद हमसे दस मिनट का इंटरव्यू करने को कहा गया जिसके लिए हमें कैलिफोर्निया जाना पड़ा और अंत में हमें सफलता हासिल हुई।”

ये फैसला बहुत स्वाभाविक था। कई बार ये भारत और विश्व के बीच लड़ाई जैसा लगता लेकिन अर्चित और कंपनी के बढ़ते कदम उसे बेहतरी को ओर ले जाते। वाई कॉम्बिनेटर के पास दुनिया के बेहतरीन लोग हैं और वो जगह विशुद्ध उर्जा से भरी है यही बात अर्चित को अपनी ओर आकर्षित करती है। वो बताते हैं कि “मैंने भारत में निवेशकों के साथ ज्यादा बातचीत नहीं की। जैसे कि वाई सी में जोखिम उठाने की क्षमता है और वो ऐसे लोगों की मदद करती है जिनके विचारों की लोग आलोचना करते हैं और ऐसे लोगों को कंपनी में शामिल किया जाता है जिनके पास खासा अनुभव है।“

राजाराम गुप्ता, सह संस्थापक
राजाराम गुप्ता, सह संस्थापक

क्लियर टैक्स के बारे में एक दिलचस्प बात ये भी है कि पहली बार भारत की किसी कंपनी का चयन वाईसी के लिए किया गया। अर्चित के मुताबिक ये बिना किसी खास कारण के संभव हुआ है। अर्चित के मुताबिक “इसकी वजह संस्थापकों का क्लियर फोकस है और जहां पर मूल्यांकन और दूसरी चीजों का कोई महत्व नहीं है” वो अपने ग्राहकों की संख्या नहीं बताते लेकिन उनकी योजना भारत में तेजी से विकास करने की है और हर आयकरदाता की ज्यादा से ज्यादा मदद करने की है। उनकी टीम एनरोइड को लेकर खासा उत्साहित है और वैश्विक स्तर पर मिलने वाले मौकों को लेकर भी जो क्लियर टैक्स को वाई सी तक पहुंचाने के लिए सक्षम बनाता है।