कठिन मानसिक हालातों में दिमाग कैसे करता है काम ?

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एक अध्य्यन ने खोजा कि खुद इंसान और उनके मस्तिष्क के बीच एक बड़ा द्वन्द है। इस शोध ने इस सवाल पर हल निकाला है कि क्या हम उस व्यक्ति की मदद करने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं जो हमारे सामने होता है। सोशल न्यूरोसाइंटिस्ट ने फिल्म 'माई सिस्टर' को केन्द्र में रखकर इसके रि-एडिट संस्करण पर को दिखाया गया और उनके नैतिक दुविधाओं के आधार पर उनके मस्तिष्क क्रियाओं का अध्ययन किया गया।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
फिल्मी किरदारों के बीच का संबंध दर्शकों के दिमाग पर असर डालता है। न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में ये अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है जब लोग दो लोगों के बीच के परस्पर व्यवहार को जानना चाहते हैं। प्रोफेसर जैकलेनिन के मुताबिक यह शोध नेपोटिज्म पर छिड़ी बहस में भी बेहद काम का है।

अल्टो यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ता मारिएक बचा-ट्रांस कहते हैं, जब हमने बहनों के रिश्ते में फर्क बताया तो इसका दिमाग के कार्यों पर पड़ने वाले असर आश्चर्यजनक तरीके से बहुत ज्यादा था। दिमाग दो हालातों को बखूबी देखता है। कई बार ऐसा होता है जब हम चाह कुछ रहे होते हैं लेकिन हमारा दिमाग हमें कुछ अलग ही करने का निर्देश देता है।

एक अध्य्यन ने खोजा कि खुद इंसान और उनके मस्तिष्क के बीच एक बड़ा द्वन्द है। इस शोध ने इस सवाल पर हल निकाला है कि क्या हम उस व्यक्ति की मदद करने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं जो हमारे सामने होता है। सोशल न्यूरोसाइंटिस्ट ने फिल्म 'माई सिस्टर' को केन्द्र में रखकर इसके रि-एडिट संस्करण पर को दिखाया गया और उनके नैतिक दुविधाओं के आधार पर उनके मस्तिष्क क्रियाओं का अध्ययन किया गया। फिल्मी किरदारों के बीच का संबंध दर्शकों के दिमाग पर असर डालता है। न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में ये अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है जब लोग दो लोगों के बीच के परस्पर व्यवहार को जानना चाहते हैं। 

प्रोफेसर जैकलेनिन के मुताबिक यह शोध नेपोटिज्म पर छिड़ी बहस में भी बेहद काम का है। अल्टो यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ता मारिएक बचा-ट्रांस कहते हैं, जब हमने बहनों के रिश्ते में फर्क बताया तो इसका दिमाग के कार्यों पर पड़ने वाले असर आश्चर्यजनक तरीके से बहुत ज्यादा था। दिमाग दो हालातों को बखूबी देखता है। कई बार ऐसा होता है जब हम चाह कुछ रहे होते हैं लेकिन हमारा दिमाग हमें कुछ अलग ही करने का निर्देश देता है।

कैसे किया गया ये अनुसंधान-

अध्ययन की प्रविष्टियों में 30 महिलाओं को रखा गया जिन्हें ये फिल्म तकरीबन 25 मिनट तक दिखायी गई थी और उसी के आधार पर उन्हें कई सवालों का जवाब देना था। स्टडी इस बात पर फोकस था कि एक बहन, कैंसर पीड़ित दूसरी बहन को अंग दान करने से इंकार कर रही है, तब कैसे महसूस होगा ? फिल्म शुरू होने से पहले अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि बहने या तो आनुवांशिक रूप से बहनें थी या बचपन में ही परिवार ने उसे छोटी बहन के रूप में अपनाया था। शोधकर्ता उनके बीच भावनात्मक मजबूती का परीक्षण करना चाहते थे। हाइपोथेटिकल थ्योरी ये थी कि दो बहनों या किसी भी खून के रिश्ते के बीच अपने आप ही एक मजबूत बॉन्ड होता है।

इस अध्ययन में जो विषय बताया गया था और जो उनके द्वारा महसूस किया गया दोनों एक दूसरे से काफी अलग थे। एक दूसरे की प्रतिक्रिया से काफी दह तक वो इत्तेफाक नहीं रखती थीं। 90 फीसदी महिलाओं के लिए बहनों के बीच आनुवांशिक संबंधों का कोई महत्व नहीं था, उस परिस्थिति की तुलना में जिसमें एक लड़की को नवजात रहते हुए अपनाया गया था। यानि सोचने और कल्पना करने वाला चुम्बकीय अनुनाद देखने के दो अलग हालातों के बीच बहुत बड़ा फर्क बताता है।

आनुवंशिक संबंधों के विभिन्न प्रभाव

जब दर्शकों ने सोचा कि बहनें आपस में आनुवांशिक संबंधी थी तब उनके इनसुला, सिनगुलेट कॉर्टेक्स, मध्य और ऊपरी कॉर्टेक्स, मुख्य अस्थायी कॉर्टेक्स और मुख्य आंशिक कारर्टेक्स में मस्तिष्क क्रियाओं के बीच सहसंबंध होता है। दिमाग के ये हिस्से शिष्टाचार, भावना और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। लेकिन भले ही खून के रिश्तों में आपसी मतभेद हो सकते हैं लेकिन मजबूच भावनात्मक लगाव की वजह से उनमें मनभेद कम ही देखा गया।

अध्ययन के आधार पर हम मान सकते हैं कि जब बहनों के आनुवांशिक संबंधों पर विचार किया तब इसके नतीजे विषयों से जुड़ी सोच के जैसा ही था। इन्हीं विषयों को केन्द्र में रखकर ये भी पूछा गया था कि संकट की घड़ी में उन्हें बचाने अपेक्षाकृत सबसे पहले कौन जाएगा ? एक बहन, एक अनजान आदमी या फिर एक पक्का दोस्त। 90 फीसदी लोगों ने कहा उनकी बहन सबसे पहले उन्हें बचाने जाएगी। उसके बाद उनका पक्का दोस्त बचाने जाएगा। और सबसे आखिर में वो आदमी जो उन्हें नहीं जानता। 

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