'केग फॉर्म्स', मुर्गी पालन से दस लाख घरों में जलाई रोशनी...

एक सामाजिक उद्यमी होने से हमें उसके पीछे छिपी महान भावनाओँ का पता चलता है`

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कोई शख्स कंपनी क्यों शुरू करता है? अर्थशास्त्र के प्रोफेसर कहेंगे कि "लाभ कमाने के लिए". लेकिन जब हम सामाजिक उद्यमिता के दृष्टिकोण से बात करें तो उत्तर होगा "एक सामाजिक परिवर्तन के लिए". लेकिन "लोग कंपनी क्यों बनाते हैं" इस पर मैंने समय के साथ कुछ सामाजिक उद्यमियों से बात कर के एक कलात्मक दृष्टिकोण विकसित किया है. यह केवल पैसे कमाने या केवल सामाजिक परिवर्तन का ही मामला नहीं है. कोई यह कल्पना कर सकता है कि कलाकार की तरह एक सादे कैनवास पर एक व्यवसायी एक कम्पनी की शुरुआत करता है. जब कोई कलाकार पेंटिंग कि शुरुआत करता करता है तो वो केवल वही चित्रित नहीं करता जो वो देखता बल्कि वो उस चित्र में अपनी भावनाएं, अपने विचार, अपना व्यक्तित्व सभी कुछ डाल देता है. उस समय वो एक तस्वीर मात्र एक परिदृश्य या एक चित्र ही नहीं होती बल्कि वह कलाकार की व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होती है. इसी तरह से एक कंपनी उद्यमी की व्यक्तित्व का एक तरह से विस्तार होती है. उसकी कंपनी का दृष्टिकोण उस उद्यमी का दृष्टिकोण और उसका मिशन उस उद्यमी की जीवन का मिशन होता है.

आज हम एक ऐसे उद्यमों की विषय में बात करेंगें जो एक कलाकार हैं. जब हमने उनसे पूछा कि आप कलाकार से व्यवसायी कैसे बन गए तो उनका जवाब था-"मैंने जब यह व्यापार शुरू किया तो मेरा उद्देश्य धनी आदमी बनना नहीं था, इसका उद्देश्य मात्र अपने व्यक्तित्व को व्यक्त करने का माध्यम था. और मैं अपने समुदाय और अपने देश भारत के विषय में मजबूती से सोचता हूँ. मैं अपने देश से प्यार करता हूँ. मुझे अपने भारतीय होने पर गर्व है. मेरे अंदर सामाजिक प्रतिबद्धता की एक मजबूत भावना है जो कि भारत की सांस्कृतिक मूल्यों से आती है. और मैं ने मेरी कंपनी में भी इन्हीं सिद्धांतों का पालन किया."

आज हम "केग फार्म्स" के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद कुमार के बारे में चर्चा कर रहे हैं. "केग फार्म्स" एक सामाजिक उद्यम है जो कि मुर्गी पालन के माध्यम से देश के ग्रामीण इलाकों के वंचित ग्रामीण परिवारों के लिए गरीबी उन्मूलन का काम कर रहा है. "केग फार्म्स" के माध्यम से उन्होंने 1967 से अभी तक लगभग दस लाख परिवारों को लाभान्वित किया है. यह सब आज से 40 वर्ष पहले तब शुरू हुआ जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद विनोद भारत में "स्वीडिश मैच"के प्रमुख थे.वह एक पेशेवर के रूप में सफल इंसान थे. लेकिन वो बहुत शिद्दत से अपना कुछ काम शुरू करना चाहते थे. वह किसी ऐसी ग्रामीण आधारित गतिविधि के ऐसे अवसर के तलाश में थे जिस से कि वो किसानों कि मदद कर सकें. और उन्हें लगा कि वह भारत में कुक्कुट विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, भले ही उन्हें इस क्षेत्र के बारे में कुछ भी पता नहीं था. उस समय प्रजनन पोल्ट्री बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा था और ज्यादातर उत्पादों का आयात किया जाता था. उन्होंने भारत को एक आत्मनिर्भर देश बनाने के उद्देश्य के साथ उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया. 1973 में, विनोद ने अपने परिवार से कुछ पैसे उधार लिया और पूरी तरह से खुद को "केग फार्म्स" के लिए समर्पित करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी. उन्होंने भारत में कुक्कुट विकास में एक मुख्य नवाचार, आनुवंशिक प्रजनन पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया. इस प्रक्रिया से भारतीय परिस्थितियों के लिए आयातित स्टॉक और आनुवंशिक लाइनों को यहाँ की जलवायु का अभ्यस्त बनाने के लाभ का पता चलता है. "केग फार्म्स" को इस से उत्कृष्ट परिणाम मिले.

"सभी लोगों ने मुझे मूर्ख कहा.लेकिन मेरे पास एक विचार था, एक दृष्टिकोण था और उसके प्रति मजबूत आस्था थी. और परिणाम बताते है कि मैं सही था." विनोद गर्व की भावना के साथ बताते है. १९७७ में, सरकार ने भी प्रजनन पोल्ट्री के लाभों और "केग फार्म्स" की प्रणाली को मान्यता दी. और इसके बाद से "केग फार्म्स" ने अपना विस्तार भारत की अन्य शहरों और राज्यों में करना प्रारम्भ कर दिया. 1991 में विनोद ने उन क्षेत्रों में अपने विस्तार पर जोर दिया जहां इसकी ज्यादा जरूरत थी और वो था ग्रामीण इलाका." मैं ने इस उद्योग से बाहर रखी गयी आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए कुछ करने की जरूरत महसूस की, क्योंकि यह उनके लिए भी आवश्यक था." विनोद कहते हैं. ग्रामीण भारत में पोल्ट्री प्रजनन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गरीब किसानों के महत्वपूर्ण आय का स्रोत है और यह गरीबी उन्मूलन का एक साधन है. आज "केग फार्म्स" विभिन्न देशों में गरीब लोगों को मुर्गी प्रजनन के माध्यम से आय में मदद करने के लिए अपना विस्तार कर रहा है. वे सफलतापूर्वक इथियोपिया और युगांडा में काम कर रहे हैं और वहां की सरकारों और विश्व बैंक का भी समर्थन उन्हें मिल रहा है.

"केग फार्म्स" को मैं "एक बड़ा सपना है एक छोटी सी कंपनी" के रूप में परिभाषित करना चाहूँगा." विनोद विश्वास के साथ कहते हैं. विनोद की पास पोल्ट्री के क्षेत्र में 45 से अधिक वर्षों का अनुभव है. उन्होंने बहुत सी चुनौतियों का सामना किया है लेकिन कभी डरे नहीं. " मेरा काम चुनौतियों से भरा है. मैं हर जगह चुनौतियां देखता हूँ. किसी भी समस्या के नकारत्मक पहलू को सकारात्मक मानस से देखना अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसी तरीके से आप हर समस्या या चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं. जब आप वैचारिक रूप से समृद्ध हैं तब आप निश्चित रूप से आत्मविश्वास से भरे होंगे. यही मेरे काम के प्रति मेरा नजरिया है." विनोद बताते हैं.

विनोद जैसे एक बुद्धिमान व्यक्ति ने भी अनेकों गलतियां की हैं. "मैंने 22 वर्ष कि आयु में काम करना प्रारम्भ किया था और अब मैं मैं 79 वर्ष का हूँ और जिंदगी में मैंने हजारों गलतियां की होंगी. लेकिन इन गलतियों को मैं सीखने के एक अवसर के रूप में देखता हूँ. हर ग़लती ने मुझे कुछ न कुछ सीखाया और एक बेहतर इंसान बनाया, मैं इन की गयी गलतियों का शुक्रगुजार हूँ." विनोद कहते हैं. उद्यमिता के प्रति विनोद कि एक स्पष्ट सोच है. वो उद्यमिता के उन अवसरों को देख पाते हैं जहाँ अन्य लोग नहीं देख पाते. वो एक ऐसी व्यक्ति हैं जो पूरी तरह से अपनी प्रेरणा और अपने स्वयं के विचारों से प्रेरित हैं.और विनोद के रूप में गहरा आदमी,एक महत्वाकांक्षी उद्यमी है, जिसके पास हर किसी को बताने के लिए एक अच्छी कहानी है. "एक बार, एक प्रतिभाशाली छात्र ने जोकि एक उद्यमी बनना चाहता था, मुझसे पूछा कि उसे क्या व्यवसाय करना चाहिए.मैंने उस से कहा कि यदि आपको पता नहीं कि क्या करना चाहिए तो बेहतर है कि आप कुछ मत कीजिये. मात्र पैसा कमाने या कम्पनी का मालिक बनने के लिए व्यवसायी मत बनिए. एक उद्यमी को मजबूत विश्वासों के द्वारा संचालित होने की जरूरत है. और आप वहीँ करें जिसमें आपका विश्वास हो. आप जो कर रहे हैं आप का उस में दृढ़ विश्वास है तो इसका मतलब आप सही काम कर रहें हैं." विनोद का कहना है.

एक सफल उद्यमी के रूप में विनोद ने अपने कैरियर में अद्भुत परिणाम हासिल किया है, लेकिन जब हमने उनसे उनके कैरियर में सबसे अधिक योगदान करने वाले का शुक्रिया अदा करने को कहा तो उन्होंने बेहिचक कहा-" मेरी पत्नी. उनका मुझमें भरोसा था. और जब मै एक शानदार नौकरी छोड़ कर सब कुछ शून्य से शुरू कर रहा था तब उन्होंने मेरा साथ दिया. बाकी सब लोग मुझे पागल ही कह रहे थे. उन्होंने कभी कोई प्रश्न नहीं किया वो सदैव कहती थी कि मैं आप के साथ हूँ.मेरा आप पर पूरा विश्वास है. हम इस यात्रा में साथ रहे." एक प्रसिद्ध कहावत है कि हर महान व्यक्ति के पीछे एक महान स्त्री होती है. और विनोद की कहानी इसे प्रमाणित करती है. प्यार लोगों को शक्ति प्रदान करता क्या है और जिसे से दुनिया भी समर्थ होती है.

एक महान कलात्मक काम में के रूप में विनोद ने "केग फार्म्स" के खाली कैनवस पर इसे अपनी सर्वोत्तम कृति बनाने के लिए अपने जीवन के हर पल को चित्रित किया है. उनकी इस कलाकृति का परिणाम सम्भवतः पिकासो या माइकेलएंजेलो की किसी रचना जैसा न हो, लेकिन दुनिया के इस सबसे खूबसूरत काम, एक सामाजिक उद्यमी होने, से हमें उसके पीछे छिपी महान भावनाओँ का पता चलता है.