छोटी टीम बड़े सपने और ऊँची उड़ान...जिनी, ऑरोशिखा और आशना बने उद्यमता की अद्भुत मिसाल

‘37 सिग्नल’ के संस्थापक जेसन फ्राइड ने कहा है कि छोटी सी टीम के साथ भी बड़ा कारनामा अंजाम दिया जा सकता है। ...एक छोटी सी टीम भी बड़ा प्रभाव छोड़ सकती है। इस बात को साबित किया है तीन महिला उद्यमियों जिनी कोहली, ऑरोशिखा रथ, और आशना नरूला ने। इनमें अपने इरादों को अंजाम देने के दृढ़ संकल्प की कई कहानियाँ  छुपी हैं। 

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जिनी कोहली, ऑरोशिखा रथ, और आशना नरूला ने अपने-अपने स्टार्टअप की शुरूआत तो छोटे स्तर पर की थी, लेकिन ज़माने को दिखा दिया कि अगर आपके पास सपनों को पूरा करने की ताकत है और उन सपनों का पीछा करने के लिए मज़बूत दृढ़ संकल्प है तो काम का आकार और संसाधन अधिक मायने नहीं रखते, क्योंकि आपके अंदर का दृढ़ विश्वास हर समस्या का समाधान कर सकता है। आने वाली चुनौतियों का मज़बूती से मुकाबला करने के लिए प्रेरित करता है।

जिनी कोहली - विवाह को बनाया आसान

जिनी कोहली वेडवाइज़ (WedWise) की संस्थापक हैं। वेडवाइज़ शादी ब्याह के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो देश भर के ग्राहकों और शादी कराने वाले पेशेवर लोगों को आपस में जोड़ता है। जिनी बताती हैं,

“हम दिल्ली में व्यस्त सीज़न में करीब 15 हजार शादियाँ कराते हैं। मेरी रिसर्च बताती है कि ज्यादातर शादी का इंतज़ाम करने वाले लोग एक दूसरे के परिचित होते हैं या फिर किसी तीसरे व्यक्ति के ज़रिए एक दूसरे से सम्पर्क करते हैं। जैसे परिवार के किसी सदस्य के ज़रिए या फिर किसी दोस्त के ज़रिए। ऐसे में कई बार फैसले लेने में देरी भी हो जाती है। इससे दूल्हे और दुल्हन के परिवार पर अतिरिक्त दबाव आ जाता है।”

इसी दबाव को कम करने और विवाह करने वाले लोगों की ज़िंदगी आसान बनाने के लिए जिनी ने मई, 2015 में वेडवाइज़ (WedWise) की शुरूआत की। यह शुरूआत अचानक नहीं थी, इससे पीछे 5 वर्षों का अभ्यास था। विभिन्न कंपनियों में नौकरी का अनुभव था।

जिनी ने साल 2009 में इंग्लैंड से इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट की डिग्री हासिल करने के बाद करीब दो साल तक रोल्स रॉयस और ट्रेंट 1000 के लिए इंग्लैंड में रहकर एक डिज़ाइन इंजीनियर के तौर पर काम किया। साल 2010 के अंत में वो भारत वापस लौट आईं और एमबीए की पढ़ाई पूरी की इसके बाद वो साल 2012 में ग्रुपऑन (Groupon.in)के साथ सलाहकार के तौर पर जुड़ गई। यहाँ पर उन्होने करीब ढ़ाई साल काम किया किया।

इस तरह मई, 2014 में उन्होने ग्रुपऑन को छोड़ दिया और तय किया कि वो अपने ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिये रिसर्च करेंगी। वो एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहती थीं, जो शादी ब्याह के काम से जुड़ा हो। जिनी के अपनी उस सोच के बारे में कहती हैं, “वास्तव में बड़ा सवाल ये था कि मैं ऐसा क्या करूँ, जिसके बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं जानती? हालाँकि नौकरी से मैं संतुष्ट थी, लेकिन इससे मेरे अंदर ठहराव की भावना आ गई थी। तब मैंने महसूस किया कि मुझे इस आरामदायक नौकरी से बाहर निकल कर कुछ अलग करना चाहिए। मैंने अपने सपनों का पीछा करना शुरू किया। नौकरी के अनुभवों से मुझे मेरा उद्देश्य, मेरी सोच और दिशा तय करने में मदद मिली।”

वेडवाइज़ (WedWise) का काम पिछले दस महीनों के दौरान लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ करीब 24 हजार लोग जुड़ चुके हैं, जिसमें शादी कराने वाले विशेषज्ञ, नव वर वधू और समान विचारधारा वाले दुल्हन और दूल्हे। यहाँ पर पेशेवर लोग अपने काम के बारे में जानकारी दे सकते हैं, लोग अपनी यात्राओं के अनुभव बांट सकते हैं साथ ही जिस क्षेत्र के वो विशेषज्ञ हैं उसके बारे में चर्चा कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म से जुड़े दूसरे सदस्यों को प्रभावशाली और जल्दी शादी करने की योजना बनाने में भी मदद मिल सकती है। जिनी के मुताबिक “ऐसे आंत्रप्रेन्योर जो घर से ही अपना काम करते हैं, जैसे हल्के आभूषण बनाने वाले विशेषज्ञ, बेकर्स, दुल्हन के लिए साज़ो समान बनाने वाले, फ्रीलांस मेकअप आर्टिस्ट और छोटे बुटीक मालिक। ये सभी लोग यहाँ पर अपने काम का बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और आसानी से उन लोगों तक पहुँच सकते हैं जो उनके ग्राहक हैं।”

जिनी की योजना इस काम को दूसरे शहरों में भी ले जाने की है। वेडवाइज़ (WedWise) अपने नेटवर्क के ज़रिए अलग-अलग संभावनाओं की तलाश कर शादी के उद्योग से जुड़े लोगों को आपस में जोड़ना है। हाल ही में इन लोगों ने यू-ट्यूब पर वेडवाइज़ (WedWise) चैनल की शुरूआत की है। यहाँ पर लोगों को शादी की तैयारियों से जुड़ी जानकारियों के अलावा उस दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया जाता है। जिनी बताती हैं,

 “ कंपनी की शुरूआत एक दिलचस्प रोलर कॉस्टर की तरह हुई, जिसमें भावनाओं का ढेर सारा उबाल था। दरअसल स्टार्टअप हर रोज़ अपने आप में एक चुनौती है। जहाँ पर कामकाजी जिंदगी का संतुलन बनाना मुश्किल है। आप पर निरंतर दबाव रहता है और हर वक्त हार का डर सताता रहता है। बावजूद इसके इतने उतार चढ़ाव के बाद भी एक विश्वास है जो आपकी मदद करता है। वो विश्वास जो आपका अपने उत्पाद पर होता है और वो दृष्टिकोण जो दूसरों से आपको अलग रखता है।”

ऑरोशिखा रथ:  नृत्य और फिटनेस से उद्यमता का नया रिश्ता

ऑरोशिखा रथ ज़ैडनेस (Zydness) की संस्थापक और सीईओ हैं। नृत्य और फिटनेस से प्यार करने वाली ऑरोशिखा रथ ने इसकी स्थापना इसलिए की थी, ताकि फिटनेस से जुड़े संस्थान, विशेषज्ञ और ऐसे उत्साही लोग एक जगह मिल सकें। ज़ैडनेस को शुरू करने की प्रेरणा ऑरोशिखा को अपने एक निजी अनुभव से हुई। नृत्य ने ऑरोशिखा और उनकी ज़िंदगी को परिभाषित करने का काम किया था। उनके पिता एयरफोर्स में थे। लिहाजा उनको बचपन में कई यात्राएँ करनी पड़ीं। नृत्य उनका जुनून था यही वजह थी कि स्कूल के दिनों में उन्होंने कई डांस फार्म सीखे थे। वो बताती हैं,

“मुझे ये अच्छी तरह याद है कि स्कूल के दिनों में मैंने लगातार तीन सालों तक बेस्ट डाँसर का खिताब जीता। क़रीब एक दशक तक कॉरपोरेट जगत में गुज़ारा, जिसकी की कीमत भी मुझे चुकानी पड़ी। मैं अपने अभ्यास से दूर होने लगी थी। मैं एक बार फिर इस ओर लौटना चाहती थी और मैंने इसके लिए कोशिश भी की।”

ऑरोशिखा नृत्य की ओर लौटी और पार्ट टाइम ज़ुंबा प्रशिक्षक बन गई। इस दौरान उन्होंने वैंकूवर की एक मोबाइल एप्लिकेशन फर्म के लिए काम किया। इस दौरान उन्होंने कई योग की वर्कशॉप आयोजित की और विभिन्न डांस प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, ताकि वो अपना खोया हुआ आत्मविश्वास दोबारा हासिल कर सकें। यही वजह है कि ज़ैडनेस ने दक्षिण दिल्ली और बेंगलुरू में अच्छे बुटिक सेंटर के साथ साझेदारी की है। ज़ैडनेस की टीम इस बात को लेकर ख़ासी उत्साहित है कि इस साझेदारी की वजह से वो अपनी पहुँच और प्रभाव बढ़ाने में कामयाब हुई है। ऑरोशिखा बताती हैं, “हमारे साथ जुड़े लोग इस बात को लेकर काफी खुश होते हैं कि उनको एक जगह पर ही सारी जानकारी मिल जाती है। इन जानकारियों के कारण उनके पास अपनी फिटनेस से जुड़े विकल्प चुनने की आज़ादी होती है ताकि वो अच्छी सुविधाओं को हासिल कर सकें।”

ऑरोशिखा अपने जुनून के साथ अपने काम को अंजाम देती हैं। ऑरोशिखा बताती हैं कि अलग अलग आर्ट फॉर्म का अभ्यास और शारीरिक कसरत से मिलने वाली चुस्ती उन्हें निरंतर आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करती है। वह चाहती हैं कि लोगों को एक ऐसी मंच मिल जाए, जहां पर वो अपने आप में और निखार ला सकें।”

आशना नरूला: कड़ी मेहनत है सफलता का मूल मंत्र

आशना ने अपनी उद्यमशीलता की यात्रा तब शुरू की थी, जब वो 23 साल की थीं। हिमाचल प्रदेश के नाहन में पैदा हुई आशना ने अपनी स्कूली पढ़ाई चंडीगढ़ से की। आशना ने साल 2015 में चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से मनोविज्ञान में मास्टर्स की डिग्री हासिल की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू की तो उनको महसूस हुआ कि उनको ऐसे कोई नौकरी नहीं मिल सकती। बावजूद इसके वो कोई आसान रास्ता भी चुनना नहीं चाहती थीं। वो आसानी से अपना पारिवारिक कारोबार भी संभाल सकती थी, लेकिन उन्होने अपना ध्यान मनोविज्ञान की ओर लगाया और जुलाई, 2015 में साइकोपीडिया (Psychopedia) की शुरूआत की।

साइकोपीडिया (Psychopedia) एक मनोविज्ञान प्रशिक्षण संस्थान है। चंडीगढ़ में ये अपने आप में पहला संस्थान है, जहाँ पर ऑर्ट थैरेपी, डांस और रेकी जैसी कई तरह की कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है, और लोगों को नयी नयी जानकारियाँ मनोविज्ञान के ज़रिए दी जाती हैं। साइकोपीडिया का मुख्य उद्देश्य जानकारी, प्रशिक्षण और इलाज करना है। ये 16 साल से लेकर 30 साल तक के लोगों पर खास ध्यान देता है। जब भी किसी वर्कशॉप का आयोजन किया जाता है, तो इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वहां पर बच्चों के साथ अभिभावक भी मौजूद हों। आशना का कहना है, 

 “हम अपने छात्रों के काउंसलर, शिक्षक, और संरक्षक हैं। हम सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि हम जिंदगी से जुड़ी बातें उनको बताते हैं। हम बताते हैं कि हमें कैसे सकारात्मक और आशावादी रहना चाहिए। इसके अलावा कैसे हमें दूसरों के प्रति दयालु और सहानुभूति रखनी चाहिए। इसलिए हमारा फोकस भावनाओं पर ज्यादा रहता है।”

हालांकि आशना का सफर इतना आसान नहीं रहा, एक ऐसा वक्त भी आया जब वह यह सब छोड़ नौकरी करना चाहती थीं। शुरूआत के चार महीने उनको काफी संघर्ष करना पड़ा जब उनके पास कोर्स करने के लिए मुश्किल से कोई  आता था। तब लोग साइकोपीडिया के बारे में भी नहीं जानते थे।  आशना बताती हैं, 

“मैं हर किसी से कहती हूं कि मैं एक कविता की तरह हूँ, मैं मार्केटिंग हेड हूँ और एक अध्यापक भी हूँ। मैं अपने को एक महिला सैनिक मानती हूँ और मैंने वो दौर भी देखा है जब मैं टूट गई थीं, लेकिन हालात बदले क्योंकि उद्यमी होने के नाते मैंने उनको बदला।” थोड़े से कर्मचारियों की मदद से आशमा और उनके साथी साइकोपीडिया को तेजी से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

आंतरिक प्रेरणा से फर्क पड़ता है- एक वक्त पर एक छात्र- इस तरह ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक पहुंचने की वो कोशिश करती हैं। वो भगवान पर विश्वास रखती है। साथ ही उनको परिवार और अपने दोस्तों से बिना शर्त प्रेम मिलता है, जो उनको आगे बढ़ने में मददगार साबित होता है। जब उनसे पूछा गया कि आंत्रप्रेन्योर होने के नाते उनको किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? कहने लगीं, “विनम्र रहना चाहिए साथ ही सबके लिए आभार व्यक्त करना चाहिए, क्योंकि कई बार आपके सामने इतनी ज्यादा चुनौतियाँ आती हैं कि आप उनसे हार मानने लगते हैं, लेकिन तब आप मज़बूती से खड़े रहें और खुद पर विश्वास रखें। जो बेहतर हो सकता है वो करें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस क्षेत्र में हैं, कभी भी आप अपने खुशी के पलों को मत भूलें। जब भी आपके पास कोई चीज़ ज्यादा हो तो दीवार खड़ी करने की जगह एक ऐसी टेबल तैयार करो, जहां पर आप दूसरों की सेवा और मदद कर सकें।”

जब इन तीन महिलाओं ने अपने सपनों का पीछा किया तो ये इस बात पर सहमत थी कि आपके पास एक चीज़ होनी बहुत जरूरी है और वो है जुनून। जुनून ही है जो आपको आगे बढ़ने में हौसला देता है, चुनौतियों का मुकाबला करने की हिम्मत देता है और सपनों को पूरा करने में मदद करता है।

मूल लेखिका : तन्वी दूबे

अनुवादक : गीता बिष्ट