मल्टीप्लेक्स का अनोखा प्रयास, शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए अलग से शो

0

अक्षमताओं से जूझ रहे बच्चे कभी सिनेमाहॉल के भीतर नहीं जा पाते। चेन्नई के एसपीआई सिनेमा ने हाल ही में एक पहल की शुरुआत की है जिसके तहत हर रविवार ऐसे बच्चों को फिल्में दिखाई जाती हैं।

शारीरिक और मानसिक अक्षमता से जूझ रहे बच्चों के परिवारों के लिए 'ए स्पेशल वर्ल्ड' नाम से सपोर्ट ग्रुप चलाने वाली माला चिनप्पा की सोच से यह सब संभव हो पाया। उन्होंने बताया कि इस पहल को शुरू हुए दो साल हो रहे हैं।

शारीरिक और मानसिक अक्षमताओं से जूझ रहे बच्चों के साथ समाज में जमकर भेदभाव होता है। उनके साथ इस कदर भेदभाव होता है कि उन्हें बाकी समाज से अलग-थलग कर दिया जाता है। घर-परिवारों की हालत जब ऐसी होती है तो सार्वजनिक स्थानों पर उनके साथ कैसा बर्ताव होता होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। सार्वजनिक जगहों पर उनके लिए उचित व्यवस्था तक नहीं होती। सिनेमा हॉल में भी उनके लिए कोई खास इंतजाम नहीं होते। यही वजह है कि अक्षमताओं से जूझ रहे बच्चे कभी सिनेमाहॉल के भीतर नहीं जा पाते। चेन्नई के एसपीआई सिनेमा ने हाल ही में एक पहल की शुरुआत की है जिसके तहत हर रविवार ऐसे बच्चों को फिल्में दिखाई जाती हैं।

बीते रविवार को आठ साल की वंदना काफी उत्साह में अपने पिता के साथ फिल्म देखने आई थी। वंदना की ही तरह कई सारे बच्चे अपने माता-पिता के साथ पहली बार सिनेमाहॉल के अंदर आए थे। किसी भी शहर में ऐसे सिनेमाहॉल नहीं होंगे जहां अक्षम बच्चों के लिए अलग से कोई सुविधा हो। एसपीआई सिनेमा ने 'सेन्स' (SPECIAL SHOW FOR SPECIAL MINDS) के नाम से एक पहल शुरू की है। वंदना के पिता ने कहा, 'फिल्म देखने से ज्यादा बच्चे सिनेमाहॉल के भीतर का अनुभव एंजॉय कर रहे थे। हमने पहली बार अपने बच्चों को सिनेमाहॉल के अंदर कोई फिल्म दिखाई। शहरों में कहीं भी कोई सुविधा नहीं होती इसलिए हम अपने बच्चों को कभी बाहर लेकर नहीं जा पाते।'

उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे सिर्फ घर से स्कूल के दायरे में सिमटकर रह जाते हैं। एसपीआई सिनेमा की पीआर हेड प्रीता रामास्वाममी ने कहा कि सेन्स एक ऐसी पहल है जिसके तहत सबके लिए सिनेमा को सुलभ और आसान बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'यह काफी महत्वकांक्षी प्रॉजेक्ट है। हम समाज में सिनेमा के जरिए बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। हमने इसे पायलट प्रॉजेक्ट की तरह लॉन्च किया था, लेकिन सफलता मिलने के बाद इसे मासिक तौर पर नियमित कर दिया गया है।'

शारीरिक और मानसिक अक्षमता से जूझ रहे बच्चों के परिवारों के लिए 'ए स्पेशल वर्ल्ड' नाम से सपोर्ट ग्रुप चलाने वाली माला चिनप्पा की सोच से यह सब संभव हो पाया। उन्होंने बताया कि इस पहल को शुरू हुए दो साल हो रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पहले हम हॉल में पूरी एक लाइन ही बुक कर लेते थे, लेकिन जब बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो इसे इस रूप में शुरू करना पड़ा।' उन्होंने बताया कि हॉल के भीतर सामान्य की अपेक्षा आवाज थोड़ी धीमी रखी जाती है ताकि बच्चों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके साथ ही हॉल में मध्यम रोशनी भी होती है जिससे बच्चे आसानी से कहीं भी आ जा सकते हैं।

माला बताती हैं कि अब लोग अधिक जागरूक हो रहे हैं और उन्हें समझ आ रहा है कि बच्चों के लिए ये कितना जरूरी है। एक अनुभव साझा करते हुए वह कहती हैं, 'हाल ही में गलती से एक परिवार पीटर रैबिट फिल्म देखने हमारे थिएटर में आ गया। हमने उन्हें बताया कि यहां ऐसे बच्चे फिल्म देख रहे हैं तो वे तुरंत समझ गए और उन्होंने पूरा सहयोग किया।' इस पहल का काफी असर हुआ है और कई सारे परिवार अपने बच्चों को हर महीने फिल्म दिखाने ले आते हैं। बच्चों को इससे असीम खुशी मिलती है। यह पहल अभी सिर्फ चेन्नई और कोयंबटूर में ही लेकिन इसे मुंबई और बेंगलुरु में भी लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है।

यह भी पढ़ें: यहां ट्रैफिक नियम तोड़ने पर मिलती है अनोखी सजा, लगवाए जाते हैं पेड़

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Related Stories

Stories by yourstory हिन्दी