लॉ फर्म में काम करने 'चायवाली' से मिलिए, ऑस्ट्रेलिया में चाय के बिजनेस ने दिलाई पहचान

मिलें उस हिन्दुस्तानी लड़की से जो अॉस्ट्रेलिया में चाय बेचकर हो गई वर्ल्ड फेमस...

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ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली उपमा विर्दी ने लॉ के क्षेत्र में काम करने के बाद अपना चाय का स्टॉल खोला और उनका यह आइडिया इतना सक्सेसफुल हुआ कि उन्हें बिजनेस वूमन ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिल गया। इतना ही नहीं फोर्ब्स जैसी मैग्जीन ने उन्हें 30 अंडर 30 की लिस्ट में शामिल किया।

उपमा विर्दी
उपमा विर्दी
उपमा बताती हैं कि उन्हें चाय से कुछ ज्यादा ही लगाव है। वे जहां भी जाती हैं अपनी चाय खुद बनाती हैं। उन्होंने बताया कि भाई की शादी में मेहमानों को पिलाने के लिए हजारों कप चाय बनानी पड़ी थी। 

वकालत के पेशे में रहने के बाद कोई चाय बेचने की दुकान खोलने के बारे में सोच सकता है क्या? अगर आप सोच रहे हों कि ऐसा भला कोई क्यों करेगा तो शायद आप गलत हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली उपमा विर्दी ने लॉ के क्षेत्र में काम करने के बाद अपना चाय का स्टॉल खोला और उनका यह आइडिया इतना सक्सेसफुल हुआ कि उन्हें बिजनेस वूमन ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिल गया। इतना ही नहीं फोर्ब्स जैसी मैग्जीन ने उन्हें 30 अंडर 30 की लिस्ट में शामिल किया। आज ऑस्ट्रेलिया में उनकी चाय की अच्छी खासी फैन फॉलोइंग हो गई है।

उपमा को चाय की शॉप खोलने का आइडिया तब आया जब वह एक लॉ फर्म में काम कर रही थीं। उन्होंने अपने ब्रैंड का नाम रखा, 'चाय वाली'। यह नाम सुनने में थोड़ा अजीब भले ही लगता हो, लेकिन इस नाम ने उन्हें सफलता और प्रसिद्धि दोनों दिलाई। वह अपने आयुर्वेद डॉक्टर दादा जी को याद करते हुए कहती हैं कि हर्बल चाय बनाना उन्हीं ने सिखाया था। मूल रूप से चंडीगढ़ की रहने वाली उपमा कहती हैं, 'मेरे दादाजी एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं और उन्होंने अपनी डिस्पेंसरी में मुझे आयुर्वेदिक चाय बनाने की कला सिखाई थी।' वे इतनी अच्छी चाय बनाती हैं कि उनके घरवाले आज भी उनसे चाय बनाने की फरमाइश करते हैं।

लेकिन उनके माता-पिता उनके चाय बेचने के फैसले के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि लॉ की पढ़ाई करने के बाद चाय क्यों बेचना? उपमा कहती हैं कि भारत में लाखों लोग चाय बेचने का काम करते हैं। भले ही उनके पास अच्छी एजुकेशन न हो, लेकिन उनकी बिजनेस स्पिरिट शानदार होती है। उनका मानना है कि महिलाएं अभी भी बिजनेस के क्षेत्र में कम ही हैं, इसलिए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

उपमा बताती हैं कि उन्हें चाय से कुछ ज्यादा ही लगाव है। वे जहां भी जाती हैं अपनी चाय खुद बनाती हैं। उन्होंने बताया कि भाई की शादी में मेहमानों को पिलाने के लिए हजारों कप चाय बनानी पड़ी थी। जब वे पढ़ाई के लिए भारत से ऑस्ट्रेलिया गईं तो वहां भी सबको अपने हाथ की बनी चाय पिलाई। वहीं से उन्हें चाय का स्टोर खोलने की प्रेरणा मिली। आज उपमा का खुद का ऑनलाइन टी स्टोर है, जहां पर वे तमाम प्रकार की चाय बेचती हैं। इसके अलावा वे मोमबत्ती, केटल और चॉकलेट से बनी चाय भी बेचती हैं। वे समय-समय पर वर्कशॉप भी आयोजित करती हैं जहां लोगों को आसानी से चाय बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है।

इसी चाय की वजह से उपमा को मेलबॉर्न टी फेस्टिवल में आमंत्रित किया गया था। वे बताती हैं कि भारतीय संस्कृति में चाय का अपना अलग स्थान है और वे इसे हर किसी से साझा करना चाहती हैं। भारत में लोग बात करने के लिए चाय का बहाना खोज लेते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में ऐसा नहीं था। इस मुश्किल ने ही उपमा को बिजनेसवूमन बना दिया। वह कहती हैं, 'मैंने बिजनेस को रिश्ते के साथ-साथ बढ़ाया है। इसमें काफी मेहनत लगी, लेकिन सफलता भी मिली।' ऑस्ट्रेलिया में चाय का बिजनेस इसलिए भी चल निकला क्योंकि वहां अधिकतर लोग कॉफी का विकल्प तलाश रहे थे और उपमा ने उन्हें अच्छा विकल्प मुहैया करा दिया।

आज उपमा चाय बेचने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया में भारत के बारे में भी प्रचार कर रही हैं। उन्होंने चाय के साथ ही उन्होंने अपना ऑनलाइन रिटेल स्टोर खोल लिया है। वे भारत के फूड, कैफे, हेल्थ से जुड़े प्रॉडक्ट की सप्लाई करती हैं। हालांकि आज भी उनका मुख्य पेशा वकालत ही है। वे दिन में लॉ फर्म में काम करती हैं और बाकी का समय अपने बिजनेस को देती हैं। वह कहती हैं कि उन्हें दोनों काम में मजा आता है इसलिए वे लॉ फर्म में काम करना नहीं छोड़ सकतीं।

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