मिलिए सफल फूड स्टॉल की मालिकन कोलकाता की गृहणियों से

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एक औरत परिवार चलाने के साथ-साथ बच्चों की देखभाल भी करती है, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि वे केवल इन्ही कामों के लिए बनी हैं। ऐसी महिलाएं भी हैं जो नौकरियों की तलाश करना या व्यवसाय शुरू करना पसंद करती हैं, जैसा कि कोलकाता की इन दो महिलाओं ने किया है।

'गृहिणी' से 'उद्यमी' के तौर पर अपनी पहचान बनाने के एकमात्र लक्ष्य ने निवेदिता बसु और देबोली घोष से शुरुआत करवाई फूड स्टाल की।

कोई भी एक गृहिणी की भूमिका के तौर पर औरत की कड़ी मेहनत और प्रतिष्ठा को दरकिनार नहीं कर सकता। एक गृहिणी परिवार को मैनेज करने के साथ-साथ बच्चों की देखभाल भी करती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वे केवल इन्ही कामों के लिए बनी हैं। ऐसी महिलाएं भी हैं जो नौकरियों की तलाश करना या व्यवसाय शुरू करना पसंद करती हैं, जैसा कि कोलकाता की इन दो महिलाओं ने किया है। 'गृहिणी' से 'उद्यमी' के तौर पर अपनी पहचान बनाने के एकमात्र लक्ष्य ने निवेदिता बसु और देबोली घोष से फूड स्टाल की शुरुआत करवाई।

उत्तर कोलकाता के श्यामबाजार में फाइव-प्वाइंट क्रॉसिंग पर स्थित, फूड स्टॉल 'एकुशे अन्नपूर्णा' फ्रैंचाइजी का एक हिस्सा है। आपको बता दें कि 'एकुशे अन्नपूर्णा' एक सरकारी योजना है जो कम लागत में भोजन प्रदान कराती है। केवल महिलाओं द्वारा संचालित ये फूड स्टाल मात्र 21 रुपये में चावल, करी, दाल और मछली सहित भोजन देता है।

जब निवेदिता और देबोलीना ने सरकार की इस योजना के बारे में सुना था वे तब से ही स्वयं का एक उद्यम शुरू करने की सोच रहीं थीं। दोनों ने इस आउटलेट को शुरू करने में अपनी सारी बचत को इनवेस्ट करने का निर्णय लिया और धीरे-धीरे अधिक महिलाएं साथ में जोड़ीं। जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की टीम द्वारा चलाए जाने वाला फूड स्टॉल तैयार हुआ। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, निवेदिता कहती हैं, "हम सब गृहणियां थीं। घर और बच्चों की देखभाल करना हमारा एकमात्र काम था। हम हमेशा अपने आप से कुछ करना चाहते थे। नौकरी में शामिल होने और हमारे घर से बाहर 10 घंटे खर्च करना हमारे लिए मुश्किल था। क्योंकि हम अपने परिवार को इग्नोर नहीं कर सकते थे।"

अपनी पत्नियों की समस्या को महसूस करते हुए पतियों के अंदर एक बेनफिश फ्रेंचाइजी खरीदने का विचार आया। फ्रैंचाइजी, जो पहले से ही लोकप्रिय है उसने महिलाओं का ध्यान आकर्षित किया, और वे तुरंत सहमत हो गए। चूंकि भोजन बहुत सस्ता है इसलिए फूड स्टॉल के पास बहुत सारे ग्राहक आते हैं, लेकिन यह उनके लिए लाभदायक नहीं था। इसलिए वे सामान्य भोजन के अलावा, बटर फिश फ्राई, फिश फ्राई, और अन्य तले हुए आइटम बेचकर पैसे कमाते हैं। वहां कई अन्य गृहणियां हैं जो अपनी डेजिगनेशन बदलना चाहती हैं और इसके लिए काम कर रही हैं। इन्ही की तरह शीला कोचौसेफ चितिलापल्ली एक महिला उद्यमी हैं जो अभी वी-स्टार की प्रबंध निदेशक हैं। शीला के पति वी-गार्ड के संस्थापक हैं जो कि केरल में सफल विद्युत उपकरण वेंचर है।

शीला 20 साल पहले एक गृहिणी थीं, और अब केरल के सबसे सफल महिला उद्यमियों में से एक है। उनकी कंपनी, वी-स्टार, केरल में अग्रणी आभूषण ब्रांडों में से एक है। रेडिफ के साथ बात करते हुए शीला कहती हैं कि, "मैं एक गृहिणी थी। मुझे बिजनेस करने, व्यापार योजनाओं और रणनीतियों को बनाने का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था। लेकिन मेरे लिए ये एक साधारण गृहिणी के व्यापारिक महिला में एक धीमा परिवर्तन था।"

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