ओडिशा का भितरकणिका उद्यान बना गौरेयों का बड़ा ठिकाना

गौरैया के लिए अनुकूल आवास स्थान बना भितरकणिकाओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में स्थित है भितरकणिका राष्ट्रीय उद्यानगौरैया के करीब 440 घोंसले देखे गए

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पीटीआई


ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में स्थित भितरकणिका राष्ट्रीय उद्यान में जहां एक तरफ दलदली क्षेत्र और हरे भरे घास के मैदानों का नयनाभिराम नजारा देखने को मिलता है, वहीं अब यह अभयारण्य गैरैया के लिए अनुकूल आवास बनकर उभरा है।

ऐसे वक्त में जब यह प्रजाति तेजी से विलुप्त हो रही है ,इस नाजुक पक्षी का वहां देखा जाना एक सकारात्मक संकेत है।

राष्ट्रीय उद्यान के तटीय इलाकों में चारों ओर फैले मैंग्रोव के हरे भरे क्षेत्र में गौरैया के करीब 440 घोंसले देखे गए हैं। इस पक्षी के आवास स्थान के तौर पर डंगमाल, दखिन महिंसामुंडा, कालीभंजदिहा, पाटापड़िया, दुर्गाप्रसाद दिहा, सतभाया और अंगारी वन खंड की पहचान की गई है।

वन अधिकारियों ने बताया कि गौरैया को इससे पहले राष्ट्रीय उद्यान से सटे गांवों में देखा गया था, अब उन्हें मानवीय दखल से मुक्त भितरकणिका के वनक्षेत्रों में देखा गया है।

प्रभागीय वन अधिकारी :डीएफओ:, राजनगर मैंग्रोव :वन्यजीव: वन प्रभाग बिमल प्रसन्ना आचार्य ने बताया कि करीब इस साल की शुरूआत में मॉनसून पक्षियों की गणना के दौरान गौरैया के 440 घोंसले देखे गए थे।

हालांकि उन्होंने संभावना जताई कि भीतरकनिका में हजारों गौरैया का स्थायी घोंसला हो सकता है। वैसे तो इन पक्षियों को वन्यजीव संरक्षण कानून, 1972 के तहत किसी भी सूची में सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

पिछले कुछ सालों से यह पक्षी बहुत कम दिखाई देता है।

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