पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी या स्टार्टअप?

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बीस से लेकर सत्ताईस अट्ठाइस तक कि उम्र ऐसी होती है जब जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद होता है, डिग्री लेने के बाद काम पे लग जाना, रोजगार तलाश लेना। भले ही आप नए नए ग्रैजुएट हुए हों या फिर ग्रेजुएशन फाइनल ईयर में हों, प्लेसमेंट की तलवार सिर पर लटकती रहती है। कॉलेज में अगर प्लेसमेंट सेल ढंग से काम नहीं कर रही तो खुद से ही जॉब ढूंढने का एक और सिर दर्द साथ चलता रहता है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
इस वक़्त आपका दिमाग भी ऊहापोह में रहता होगा कि जो आपका स्टार्टअप का आईडिया है, उसपे काम किया जाए या रिस्क न लेते हुए जॉब ही ढूंढा जाए। इसी दिमागी कन्फ्यूजन में आप दस लोगों से पूछेंगे कि क्या चुना जाए। वहां से भी आपको अलग अलग तरह के सुझाव मिलेंगें। 

कोई कहेगा कि अपना काम शुरू करने से ज्यादा कूल कुछ भी नहीं, वहीं कुछ लोग कहेंगे कि अच्छी जॉब लेकर फ्यूचर सिक्योर करो। एक बात ये है कि स्टार्टअप के अपने फायदे हैं और जॉब के अपने। लेकिन अगर आपको लगता है कि आपका आईडिया वाक़ई बहुत दमदार है और भरोसा है कि ये सफल हो सकता है तो आपको अपना स्टार्टअप ही चुनना चाहिए। 

बीस से लेकर सत्ताईस अट्ठाइस तक कि उम्र ऐसी होती है जब जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद होता है, डिग्री लेने के बाद काम पे लग जाना,रोजगार तलाश लेना। भले ही आप नए नए ग्रैजुएट हुए हों या फिर ग्रेजुएशन फाइनल ईयर में हों, प्लेसमेंट की तलवार सिर पर लटकती रहती है। कॉलेज में अगर प्लेसमेंट सेल ढंग से काम नहीं कर रही तो खुद से ही जॉब ढूंढने का एक और सिर दर्द साथ चलता रहता है। इस वक़्त आपका दिमाग भी ऊहापोह में रहता होगा कि जो आपका स्टार्टअप का आईडिया है, उसपे काम किया जाए या रिस्क न लेते हुए जॉब ही ढूंढा जाए। 

इसी दिमागी कन्फ्यूजन में आप दस लोगों से पूछेंगे कि क्या चुना जाए। वहां से भी आपको अलग अलग तरह के सुझाव मिलेंगें। कोई कहेगा कि अपना काम शुरू करने से ज्यादा कूल कुछ भी नहीं, वहीं कुछ लोग कहेंगे कि अच्छी जॉब लेकर फ्यूचर सिक्योर करो। एक बात ये है कि स्टार्टअप के अपने फायदे हैं और जॉब के अपने। लेकिन अगर आपको लगता है कि आपका आईडिया वाक़ई बहुत दमदार है और भरोसा है कि ये सफल हो सकता है तो आपको अपना स्टार्टअप ही चुनना चाहिए। यहां कुछ पॉइंट्स में आपको समझाने की कोशिश करते हैं कि कैसे जॉब के ऊपर स्टार्टअप को चुनना, एक सही निर्णय हो सकता।

जिम्मेदारियों से साबका-

आपको असल में पता चलता है कि जिम्मेदारियां क्या होती हैं। वहीं जब आप किसी जॉब में किसी ट्रेनी की तरह जॉइन करेंगे तो वहां आपको रिसर्च और फोन कॉल करने जैसी ही जिम्मेदारियां दी जाती हैं। स्टार्टअप का यही फायदा है कि पहले ही दिन से सारी चीजें आपको सम्हालनी होती हैं, जो कि आपके अनुभव संग्रह को बढ़ाएंगे। और चूंकि आपका ये खुद का काम होगा तो चाह कर भी आप कोई भी जिम्मेदारी पूरी करने में आप कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। एक और सकारात्मक बात है कि जब जॉब के दौरान आपसे गलती हो जाती है तो सीनियर्स आपको जज करने लगते हैं, लेकिन आपको मालूम होता है कि आप बेहतर कर सकते हैं। जबकि स्टार्टअप में आप फेल भी हो सकते हैं और कोई आपको जज नहीं करेगा। अपनी गलतियों को आप अपने अनुभव में जोड़कर अगली बार से बेहतर करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

मौकों की अपार संभावनाएं-

स्टार्टअप में आपके पास सीखने और सीखी गयी चीजों को अमल में लाने के लिए ढेरों मौके होते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि आपके पास प्लान बी भी नहीं होता। लेकिन आपका 'मैं कर सकता/सकती हूं' वाला एटिट्यूड आपको किसी भी परिस्तिथियों से विनर के तौर पर निखार सकता है। चूंकि आप ही आपके काम के कर्ता धर्ता हैं तो कोई भी आपकी कठिन परिस्थितियों में आपको शक की निगाह से नहीं देखेगा। आप सब कुछ खुद ही हैंडल कर सकते हैं। जबकि जॉब में आपको कई लोगों को रिपोर्ट करना पड़ता है। और कोई जरूरी नहीं कि हर कोई आपपे भरोसा ही करे।

खुद से खुद की मुलाकात-

आप बहुत से लोगों को जानते होंगे जिन्होंने अपना पैशन समझने के लिए एक के बाद एक कई जॉब्स बदली हैं। वहीं आपका स्टार्टअप एक ही जगह पर आपको ये मौका दे देता है। मान लीजिए, 6 महीने तक एक डिपार्टमेंट में काम करने के बाद आप कुछ और काम करना चाहते हों तो आप अपनी ही कम्पनी के दूसरे कामों की जिम्मेदारियां ले सकते हैं। आप आराम से एक काम से दूसरे काम पर स्विच कर सकते हैं जबकि जॉब में ये सब इतना आसान नहीं होता है।

हर दिन नया उत्साह-

हर दिन आपको नई चुनौतियों का सामना करना होता है। हर पल क्राइसिस मैनेजमेंट करना पड़ता है। आप सब खुद से करते हैं तो अचीवमेंट की खुशी भी दोगुनी होती है। आप हर पल आगे बढ़ने के लिए नए नए विचार सोचते है। कोई भी सेट पैटर्न नहीं होता, काम करने के अलहदा तरीके सामने आते रहते हैं। आप बुनते रहते हैं, गुनते रहते हैं, बनते रहते हैं।

तरक्की की उच्च दर-

जितना कुछ आप अपने स्टार्टअप से एक साल में अचीव कर सकते हैं, उतना किसी जॉब से हासिल करने में आपको तकरीबन 5 साल लग जाएंगे। स्टार्टअप में आपकी प्रोफेशनल जर्नी एक अभूतपूर्व सफर होती है। जो काम करेंगे उसके लिए आपको असली रिवार्ड मिलता रहेगा, वहीं जॉब में आपको सालाना अप्रेजल का इंतजार करना पड़ता है। अप्रेजल प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होती है, सबको पता है। स्टार्टअप में हर अच्छे काम के लिए तुरन्त मिलने वाला एप्रिशिएशन ही तो है, जो आपका दिन बना देता है और आप में आपका यकीन और पुख्ता कर देता है।

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