मुंबई को कूड़ेदानमुक्त बनाने के लिए दो 'वरुण' रखते हैं स्वच्छ भारत का अनोखा संकल्प

जानिये आखिर कैसे भारत के ये दो 21 साल के युवक कर रहे हैं स्वच्छ भारत के सपने को साकार। 

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ज़रूरी नहीं कि आईडिया किसी कॉफी शॉप में कॉपी पीते हुए या होटल में मनपसंद खाना कहते हुए आए। एक उम्दा आईडिया आपको कभी भी कहीं भी आ सकता है । कुछ ऐसा ही हुआ वरुण गुरनानी और वरुण खानचंदानी के साथ। दोनों ही देर रात नए साल का जश्न मना के अपने घर लौट रहे थे, उस दौरान वरुण के हाथ में एक खाली कैन हुए था। जिसे वरुण फेंकना चाहता था और उसके लिए डस्ट बिन खोज रहा था। उस समय दोनों के होश उड़ गए जब दोनों को मुंबई से महानगर में एक किलोमीटर की दूरी पर एक डस्ट बिन प्राप्त हुई। वरुण कहते हैं कि "हम इसलिए डस्ट बिन खोज रहे थे क्योंकि हमारे पास समय था मगर उनका क्या जिनके पास समय नहीं है। ऐसे लोग शायद साधारण दिनों में ऐसा न कर पाएं।

अगले दिन 2016 का पहला दिन था। टीएसईसी नामक इंस्टिट्यूट से इंजीनियरिंग में स्नातक और 21 साल के वरुण को मुंबई को साफ़ करने का आइडिया आया।

दोनों ही दोस्तों ने मिलकर मुंबई जैसे बड़े शहर की रेकी की वरुण कहते हैं कि " जहाँ एक तरफ बीएमसी बृहन मुंबई म्यूनिसिपल कारपोरेशन शहर भर में 20000 कूड़ेदानों का दावा करती है तो वहीँ वास्तविक हकीकत काफी अलग है" जब इन लोगों ने स्थानीय निवासियों से बात करी तो जो नतीजे आये वो चौकाने वाले थे लोगों का मत था कि वे यहाँ - वहां गन्दगी इसलिए करते हैं क्योंकि शहर में पर्याप्त कूड़ेदान नहीं हैं और खोजने पर भी नहीं मिलते हैं।

अगले 16 दिनों में इन दो दोस्तों ने एक ऐसी ऐप का निर्माण किया जिससे लोग अपने आस - पास कूड़ेदान खोज सकते हैं। इसके साथ ही नागरिक उन कूड़ेदानों को भी मार्क कर सकते हैं, जिन्हें पहले नहीं खोजा गया है या फिर वो जो किसी कारण वश गायब हो गयी हैं। इसकी शुरुआत करने के लिए वरुण और अरुण शहर में गए और 400 किलोमीटर की यात्रा कर उन्होंने 700 कूड़ेदानों को खुद ही मार्क किया।

इसके बाद वरुण का ये भी कहना है कि अब लोग ये बहाना करते हुए शहर गंदा न कर पाएंगे कि शहर में कूड़े दान नहीं है।

साफ़ सूथरी मुंबई

इस ऐप का नाम टाइडी है और इस ऐप को बनाने का उद्देश्य करोड़ों लोगों की मदद और तकनीक से शहर को साफ़ करना है। यहाँ यूजर को मैप पर टैप करना होता है। जहाँ भी डस्ट बिन हो आप उसकी फ़ोटो क्लिक करें और टाइडी टीम को भेज दें। यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि हमेशा यूजर और डस्ट बिन के बीच 50 मीटर की दूरी होनी चाहिए। जैसे ही टाइडी टीम डीटेल की जांच कर लेती है ये डस्ट बिन ऐप पर आ जाती है। मज़े की बात ये है कि यहां हर डस्ट बिन को एक यूनीक की दी जाती हैं ताकि यूजर उसे आसानी से पहचान लें।

यदि यूजर को लगता है कि डस्ट बिन को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर रखा गया है तो इस हालत में वो टाइडी टीम को उस डस्ट बिन का यूनीक की नंबर कोट कर सकता है ताकि लोगों को अपने आसपास मौजूद डस्ट बिन की सही लोकेशन मिल जाए। आपको बताते चलें कि फ़िलहाल ये सुविधा ऑटोमेटेड नहीं है और इसके लिए वरुण और अरुण द्वारा आरएफआईडी की मदद ली जा रही है मगर अभी भी इस दिशा में बहुत काम होना बाकी है और फ़िलहाल इस काम के लिए ये लोग बीएमसी को नहीं मना पाएं हैं। वरुण और अरुण बताते हैं कि फ़िलहाल इनके पास कहीं से भी कोई रेवेन्यू नहीं आ रहा है क्योंकि इनका इस ऐप को बनाने का उद्देश्य लोगों की मदद करना और जागरूकता फैलाना था। मगर अब ये लोग इसके लिए सीरियस हैं और रेवेन्यू का प्रबंध करना चाहते हैं। आज ये लोग कई सारे एनजीओ से लगातार संपर्क में हैं जो आगे आकर हर तरह से इनकी मदद कर सके।

वरुण कहते हैं कि

"हमने मुंबई के आस-पास करीब 1000 डस्ट बिन मार्क की हैं जिनमें से 63 % डेटा हमें यूजर से मिला है। चूँकि ये एक सिंपल आइडिया है इसलिए हम ये नहीं चाहते हैं कि इसमें सरकार का हस्तक्षेप हो, और अगर लोग ही इसे अपने ढंग से करें तो ये एक बहुत विशाल रूप लेगा।

यंग इंडिया का सपना

वरुण और अरुण ने सिर्फ इसलिए कई सारे उम्दा जॉब ऑफर ठुकरा दिए क्योंकि उन्होंने खुद के बारे में न सोच करके पहले अपने देश के बारे में सोचा और इस तरह ये दोनों स्टार्ट -अप इंडिया से जुड़े और देश के लिए जो इनसे बन पड़ा इन्होने वो किया।

इन दोनों ही लोगों का मानना है कि चूँकि ये ऐप एक सामाजिक पहल है जो हमारे मकसद को कामयाब करेगी हमारा उद्देश्य स्वच्छ शहर और एक स्वच्छ भारत है। साथ ही ऐसा करके जो सुख मिलेगा शायद वो एक स्टेबल जॉब न दे पाए। ये स्टार्टप मूवमेंट का हिस्सा बनना चाहते हैं और देश में एक सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।

आपको बतातें चलें कि आज वरुण और अरुण इस दिशा में काम करते हुए कई स्टार्टप्स की वेबसाइट और ऐप डिज़ाइन के काम में लग उनकी मदद कर रहे हैं। साथ ही इनका ये भी विचार है कि वे भविष्य में भी इसी तरह लोगों की मदद करते रहें।

अंत में अपनी बात समेटते हुए वरुण ने ये कहा कि "आज टाइडी द्वारा सार्वजनिक मूत्रालयों को भी मार्क किया जा रहा है। जैसे-जैसे जरूरत महसूस होगी ये दूसरे शहरों के बारे में भी सोचेंगे। इनकी टीम द्वारा इस दिशा में भी काम किया जा रहा है कि शहर से जो कूड़ा निकलता है कैसे होशियारी से उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। वरुण शेयर करते हैं कि " हमारा सबसे बड़ा सपना ये है कि हम दैनिक समस्याओं के लिए पर्याप्त समाधान के साथ सामने आएं"।

लेखक - स्निग्धा सिन्हा

अनुवादक - बिलाल एम जाफ़री