अनुष्का की शादी के बारे में जब दादी को पता चला तो भर आईं उनकी आंखें

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अभिनेत्री हो जाने के बाद देहरादून की उस बच्ची को जमाने की ये कैसी हवा लगी कि उसके दिल से दादी मां की यादें इतनी कमजोर पड़ गईं। न कोई सूचना, न कोई मेल, न चिट्ठी-पत्री, जब सोशल मीडिया से दादी मां को पता चला कि उसकी तो रब ने बना दी जोड़ी, उसने भनक भी न लगने दी, चुपचाप हाथ भी पीले कर लिए, तो इस अजनबीयत की घड़ी में बरबस उनकी बुजुर्ग आंखें छलक पड़ीं... 

अनुष्का शर्मा और विराट कोहली
अनुष्का शर्मा और विराट कोहली
अनुष्का ने विराट कोहली के साथ अपनी शादी का आभा मंडल चाहे जितना बड़ा कर लिया हो, एक टीस जो सबसे बड़ी, सबके मन में उठ रही है कि उन्होंने अपने उन सगों को शादी में नहीं बुलाया, जिन्होंने उनका बचपन देखते हुए कभी ये दिन देखने के भी सपने मन में पाल रखे थे।

अतिथियों के स्वागत पर 50 करोड़ फूंकते हुए कीमती रत्नों से जड़े कपड़े पहन कर अनुष्का ने विराट कोहली के साथ अपनी शादी का आभा मंडल चाहे जितना बड़ा कर लिया हो, एक टीस जो सबसे बड़ी, सबके मन में उठ रही है कि उन्होंने अपने उन सगों को शादी में नहीं बुलाया, जिन्होंने उनका बचपन देखते हुए कभी ये दिन देखने के भी सपने मन में पाल रखे थे। कहते हैं, बड़ा हुआ तो क्या, जैसे पेड़ खजूर। इटली में दोनों ने एक-दूसरे को जीवन भर खुश रखने का और सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ रहने का वचन दिया है।

ऐसा ही वचन कभी राजेश खन्ना ने डिंपल कपाडिया को या अभिषेक बच्चन ने ऐश्वर्या रॉय को दिया होगा। कहने में क्या जाता है, जीवन एक दिन का नहीं होता, एक-एक पल करके वर्षों और दशकों, फिर पूरी उम्र की सीमा पार करता है। परवीन बॉबी और रेखा की बात तो रहने ही दें, मुंबइया जिंदगी में तमाम ऐसे किस्से सुर्खियों में आते रहे हैं, जब किसी अभिनेत्री को अपने वैवाहिक जीवन ऐसी तमाम तल्खियों से दो-चार होना पड़ता है, जो उसके पति के लिए असहनीय हो जाती हैं। इस वक्त सोशल मीडिया पर विराट-अनुष्का की शादी की तमाम रंग-विरंगी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें दोनो के चेहरे से बरबस नूर बरसता दिखता है लेकिन उनके बचपन की साक्षी आंखों का ऐसे मुबारक मौके पर उन्हें देखने के लिए तरस जाना मेरी समझ से कोई मामूली बात नहीं मानी जानी चाहिए।

यही दाल का वो काला है, जो अपनी संस्कृति और सभ्यता को मजाक बनाकर ऊंची उड़ाने भरने वालों के वक्त आने पर होश फाख्ता कर देता है। इस दुख से बोझिल अनुष्का की 82 वर्षीय दादी उर्मिला जब बताती हैं कि विराट और अनुष्का दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे, विराट के ऊपर अनुष्का का बचपन से क्रश था और दोनों साथ में क्रिकेट भी खेला करते थे, अनुष्का जब छोटी थी तब कोहली उनके घर खेलने आया करता था, तो उनकी आंखों के सामने ही नहीं, मन भी हजार तरह के दृश्य एक साथ जीवंत हो उठते हैं।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा

इटली के टसकनी स्थित जिस बोर्गो फिनोशीटो रिजॉर्ट में बराक ओबामा ने हॉलिडे मनाया, वहीं शादी रचाने से विराट-अनुष्का न महान, न पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के कद के हो जाते, लेकिन यदि उनकी शादी में उनकी दादी शामिल होतीं तो अपनी संस्कृति के प्रति हर भारतीय का सीना यह सोचकर चौड़ा हो जाता कि अनुष्का बड़े पर्दे पर चाहे जितनी बड़ी हो गई हों, अपने संरक्षकों, अभिभवकों के प्रति उनका दिल उससे भी बड़ा है। तब लोग बरबस कह उठते कि वाह अनुष्का वाकई भारत की श्रेष्ठ नारियों में एक है।

फिलहाल, मोस्ट अवेटेड इस शादी का इंतज़ार खत्म हो गया और अब रिसेप्शन 21 दिसंबर को दिल्ली के ताज होटल में दरबार हॉल में होने जा रहा है, जहां कई बड़ी हस्तियां पहुंचने वाली हैं, लेकिन सवाल वही कि क्या अनुष्का वहां न सही, यहां के प्रदर्शन में अपनी दादी को भी बुलाएंगी? बहरहाल, जी नहीं माना, शादी पर देहरादून से विराट-अनुष्का को दादी ने खास संदेश भेजा कि उनकी अब भी यही कामना है, दोनों जल्दी से उनसे मिलने देहरादून आएं। वे उन्हें दुलारना चाहती हैं। अनुष्का उनकी लाडली पोती है।

शादी की अनुष्का से कोई सूचना मिलने की बजाए जब सोशल मीडिया पर शादी की खबर होने की उन्हें जानकारी मिली तो उनकी आंखें भर आईं। शादी से दून में रह रहे उसके रिश्तेदार अनजान हैं। दादी उर्मिला इस कदर अनजान रहीं कि वह कहने लगीं, अगर अनुष्का की शादी होती तो उनका बेटा उन्हें फोन पर जरूर बताता। चाचा और चाची भी ऐसी किसी जानकारी से इनकार करते रहे। गौरतलब है कि देहरादून में नेशविला रोड स्थित शीला भवन में अनुष्का की 83 वर्षीय दादी उर्मिला रहती हैं। बचपन में अनुष्का के पिता एके शर्मा भी यहां अपने भाइयों के साथ रहे हैं। अनुष्का भी अपने बचपन में अपने भाइयों के साथ इसी भवन में रही हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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