एनकाउंटर और छापे ही नहीं, अब शादी भी करवाती है पुलिस!

यूपी पुलिस ने किया कुछ ऐसा काम...

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घटना 25 मार्च की है, जब उत्तर प्रदेश के बारांबकी ज़िले की पुलिस ने एक जोड़े की शादी कराई। बाराबंकी के मोहम्मदपुर खाला पुलिस स्टेशन की इस घटना में दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने दोनों पक्षों के अभिभावकों को तैयार करके, पुलिस स्टेशन के परिसर में ही शादी आयोजित करवाई।

सांकेतिक तस्वीर, फोटो: अविनाश
सांकेतिक तस्वीर, फोटो: अविनाश
उत्तर प्रदेश पुलिस अक्सर ऐसे कारनामे करती रहती है। 2016 में भी आज़मगढ़ के सिधार थाने की पुलिस ने पुलिस स्टेशन के परिसर में दो ही प्रेमियों की शादी करवाई थी।

पुलिस और पुलिस थाने का नाम सुनते ही लोग गंभीर हो जाते हैं। पुलिस की छवि इतनी सख़्त हो जाती है कि हमें अक्सर इस बात का आभास तक नहीं रहता कि वर्दी के पीछे का शख़्स भी एक आम इंसान ही तो है। उनके अंदर भी भावनाएं होती हैं और वे भी संवेदनशील होते हैं। ज़ाहिर है कि काम की प्रकृति की वजह से उनका स्वभाव सख़्त हो जाता है। आज हम आपको एक ऐसे वाक़ये के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आपके मन में पुलिस की छवि में काफ़ी बदलाव आएगा।

घटना 25 मार्च की है, जब उत्तर प्रदेश के बारांबकी ज़िले की पुलिस ने एक जोड़े की शादी कराई। बाराबंकी के मोहम्मदपुर खाला पुलिस स्टेशन की इस घटना में दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने दोनों पक्षों के अभिभावकों को तैयार करके, पुलिस स्टेशन के परिसर में ही शादी आयोजित करवाई।

दरअसल, युवक विनय कुमार और युवती नेहा वर्मा, दोनों घर से फ़रार हुए। जब दो दिनों तक लड़का-लड़की कोई पता नहीं लगा तब परेशान घरवाले, मामला दर्ज कराने पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने छानबीन शुरू की और लड़का-लड़की को ढूंढ निकाला। आगे की तफ़्तीश में पता चला कि मामला लव-मैरिज का है और लड़का-लड़की दोनों ही बालिग हैं। दोनों लंबे समय से एक दूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे। दोनों ही ने अपने अभिभावकों से अनुमति लेनी चाहिए, लेकिन घरवाले शादी के लिए तैयार नहीं हुए। अपर पुलिस अधीक्षक, दिगंबर कुशवाहा के हवाले से यह जानकारी मिली।

इसके बाद अभिभावकों और प्रेमी जोड़े के बीच विवाद को पुलिस ने अपने हस्तक्षेप से सुलझाने का फ़ैसला लिया। पुलिस ने दोनों पक्षों के अभिभावकों को रज़ा-मंद किया और पुलिस स्टेशन के परिसर में ही लड़का-लड़की की शादी करवाई गई। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस पहले भी ऐसे कारनामे कर चुकी है। 2016 में आज़मगढ़ के सिधार थाने की पुलिस ने भी ऐसे ही पुलिस स्टेशन के परिसर में दो प्रेमियों की शादी करवाई थी।

मौजूदा वक़्त में जब हम ऑनर किलिंग आदि के मामले में सुनते हैं, तब पुलिस विभाग की यह सकारात्मक पहल, काफ़ी संतोषजनक है। पुलिस समाज और उसके अधिकारों की रक्षा के लिए होती है। लेकिन अक्सर इस तरह के मामलों में या तो लड़के के ख़िलाफ झूठे मामले दर्ज हो जाते हैं या फिर ज़ोर-ज़बरदस्ती से लड़का-लड़की को अलग कर दिया जाता है। लड़का-लड़की को बालिग होने के बाद अपनी मर्ज़ी से शादी करने का पूरा अधिकार है और अभिभावकों को इसे समझना चाहिए। जाति और बिरादरी के नाम पर दो प्रेमियों को शादी से रोकना, सही सोच नहीं है।

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