युद्धक विमान मिग-21 उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं अवनी चतुर्वेदी

अवनी चतुर्वेदी की युद्धक उड़ान से हर कोई हैरत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सीना भी हुआ गर्व से चौड़ा...

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मिग-21 उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी सिर्फ हवा में ही उड़ानें नहीं भरतीं, कविताएं भी लिखती हैं। आकाश की ऊंचाइयां छूने की प्रेरणा उन्हें महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला से मिली थी। परिजन सेनानियों ने भी उनके मन का माहौल रचा। और अब तो अवनी पूरी दुनिया से कह सकती हैं - 'आज मैं ऊपर, आसमाँ नीचे आज मैं आगे, ज़माना है पीछे।' वैसे भी अवनि का अर्थ होता है पृथ्वी, इस वीर महिला की हैरतअंगेज छलांग ने मानो धरती को आसमान से ऊपर कर दिया है। अवनी की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी फूले नहीं समाए, उनका भी सीना गर्व से चौड़ा हो उठा है।

अवनी चतुर्वेदी
अवनी चतुर्वेदी
अवनी चतुर्वेदी, ऐसी पहली भारतीय महिला, जिन्होंने अकेले जामनगर वायुसेना स्टेशन से युद्धक विमान मिग- 21 बाइसन उड़ाकर नया इतिहास रच दिया है। होनहार बिरवान के होत चीकने पात, यह कहावत अवनी चतुर्वेदी पर भी चरितार्थ होती है।

अवनी चतुर्वेदी, ऐसी पहली भारतीय महिला, जिन्होंने अकेले जामनगर वायुसेना स्टेशन से युद्धक विमान मिग- 21 बाइसन उड़ाकर नया इतिहास रच दिया है। होनहार बिरवान के होत चीकने पात, यह कहावत अवनी चतुर्वेदी पर भी चरितार्थ होती है। सतना (मध्य प्रदेश) के कोठी कंचन गांव में पैदा हुईं एवं बाद में इसी राज्य के रीवा जिले में जा बसीं चौबीस वर्षीय अवनी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में अव्वल रही हैं। उनके पिता दिनकर चतुर्वेदी मध्य प्रदेश सरकार के वाटर रिसोर्स डिपार्टमेंट में एक एग्जिक्युटिव इंजीनियर और मां गृहिणी हैं। उनके भाई सेना में कैप्टन हैं और मामा रिटायर्ड कर्नल। भाई निरभ कविताएं लिखते हैं, उनसे ही अवनी को कविताएं लिखने का भी शौक है।

इसके अलावा उनकी चित्रकारी, टेनिस आदि में ही दिलचस्पी नहीं, अपने कस्बाई अतीत में वह सखी-सहेलियों के साथ मेंहदी रचाने से लेकर अन्य हर तरह की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल हुआ करती थीं। स्नातक तक उनकी पढ़ाई-लिखाई वनस्थली (राजस्थान) में एवं लड़ाकू विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दो चरणों में हैदराबाद की वायु सेना अकादमी और बिदार (कर्नाटक) में मिला। अभी उनके प्रशिक्षण का तीसरा चरण पूरा होना है। 

उसके बाद वह लड़ाकू जेट विमान सुखोई, तेजस आदि भी उड़ाने लगेंगी। शुरू से ही सेना में जाने की ठान चुकी अवनी छात्र जीवन में एनसीसी में हमेशा भाग लेती रही हैं। वनस्थली की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जून-जुलाई 2016 में वह फ्लाइंग ऑफिसर चुन ली गईं। लड़ाकू विमान उड़ाने के प्रशिक्षण के दौरान उनके साथ भावना कांत और मोहना सिंह भी रहीं। तीनों को एक साथ भारतीय वायु सेना के लड़ाकू स्क्वाड्रन में भर्ती मिली थी। उस समय देश के रक्षा मंत्री थे मनोहर पर्रिकर।

अपनी बहनों के साथ अवनी, फोटो साभार: सोशल मीडिया
अपनी बहनों के साथ अवनी, फोटो साभार: सोशल मीडिया

अवनी अपनी सफलता का श्रेय मुख्यतः पिता को देती हैं, जिनसे उन्हें जीवन के उन्नत पथ पर आगे बढ़ने की बचपन से ही प्रेरणा मिलती रही थी। इंडियन एयरफोर्स की फ्लाइंग ऑफिसर अवनी के मन में कभी वायु सैनिक बनने का जज्बा सैन्य अधिकारी मामा और भाई की संगत से पैदा हुआ था। वह देश की सुर्खियों में उस वक्त आईं, जब हाल ही में उन्होंने गुजरात के जामनगर में अपनी पहली ट्रेनिंग में अकेले मिग-21 बाइसन फाइटर प्लेन उड़ाया। यह भारतीय वायु सेना और पूरे देश के लिए एक विशेष उपलब्धि रही। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 2015 में महिलाओं को फाइटर पायलट में शामिल करने का फैसला किया था।

अब तक विश्व के चार देशों अमेरिका, पाकिस्तान, ब्रिटेन और इजरायल में महिलाओं को फाइटर पायलट बनने के अवसर सुलभ रहे हैं। देश की वायुसेना में पहला महिला सशक्तीकरण हुआ 19 फरवरी 2018 को, जब अवनी ने सफलतापूर्वक अपना मिशन पूरा कर यह इतिहास रचा। बताते हैं कि जिस वक्त वह मिग में सवार हुईं, अनुभवी फ्लायर्स और प्रशिक्षकों ने जामनगर एयरबेस के एयर ट्रैफिक कंट्रोल और रन-वे पर लगातार अपनी आंखें साधे रखी थीं। अवनी की कामयाबी को इसलिए भी विशेष दर्जा मिला क्योंकि 'बाइसन' की तकनीकि लैंडिंग और टेक-ऑफ में फर्राटे की स्पीड होती है, जिसे नियंत्रित करते हुए आकाश में छलांग लगाना कोई हंसी-खेल नहीं रहता है।

मोहना और भावना के साथ अवनी चतुर्वेदी को उड़ाकू विमान उड़ाने का कठिन प्रशिक्षण अक्तूबर 2016 से दिया जा रहा था। अवनी की उड़ान से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी दिल गर्व से भर उठा। उन्होंने 'मन की बात' में कहा - 'कल्पना चावला कोलंबिया अंतरिक्षयान दुर्घटना में वह हमें छोड़ कर चली गई लेकिन दुनिया भर के युवाओं को प्रेरणा दे गईं। उन्होंने अपने जीवन से संदेश दिया कि नारी शक्ति के लिए कोई सीमा नहीं है। आज हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की बात करते हैं लेकिन सदियों पहले हमारे शास्त्रों में, स्कन्द-पुराण में कहा गया है कि एक बेटी 10 बेटों के बराबर होती है। चाहे वैदिक काल की विदुषियां लोपामुद्रा, गार्गी, मैत्रेयी की विद्वता हो या अक्का महादेवी और मीराबाई का ज्ञान और भक्ति हो, चाहे अहिल्याबाई होलकर की शासन व्यवस्था हो या रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, नारी शक्ति हमेशा हमें प्रेरित करती आयी है।

भावना कंठ और मोहना सिंह के साथ बीच में अवनी चतुर्वेदी
भावना कंठ और मोहना सिंह के साथ बीच में अवनी चतुर्वेदी

तीन बहादुर महिलाएँ अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ, मोहना सिंह फाइटर पायलट बन गई हैं और सुखोई विमान उड़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। हर क्षेत्र में हमारी नारी-शक्तियों ने समाज की रूढ़िवादिता को तोड़ते हुए असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कीं, एक कीर्तिमान स्थापित किया। मुंबई का माटुंगा स्टेशन भारत का ऐसा पहला स्टेशन है जहां सभी कर्मचारी महिलाएं हैं। आदिवासी महिलाएं, ई-रिक्शा चला कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। बीएसएफ की महिला विंग बाइक पर करतब दिखा रही हैं। कुछ बात है ऐसी कि हस्ती मिटती नहीं हमारी...।'

अवनी की कामयाबी पर मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अवनी को अकेले फाइटर जेट उड़ाने पर हार्दिक बधाई दी है। वह कहते हैं कि इस सफलता से देश की करोड़ों लड़कियों को हिम्मत और बहादुरी की प्रेरणा मिलेगी। अवनी ने भारतीय वायुसेना के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। उनकी इस उपलब्धि से प्रदेशवासियों, विशेषकर विन्ध्यवासियों का मान बढ़ा है। वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ बताते हैं कि उड़ान के लिए कठिन अभ्यास के बावजूद इन तीनों प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन अन्य पायलटों की तरह ही पूरी तरह कुशल रहा। हॉक एडवांस जेट ट्रेनर पर उड़ान भरने से लेकर बाइसन तक अवनी का यह सफर काफी चुनौतियों भरा रहा।

आज से चौबीस साल पहले कोठी कंचन गांव में उनके माता-पिता ने भी भला कहां सोच रखा होगा कि उनकी बेटी इस तरह एक दिन आसमान में परचम फहराकर पूरे देश के दिलोदिमाग पर छा जाएगी लेकिन अवनी की कामयाबियों के लक्षण तो उसी समय परिजनों को नजर आने लगे थे, जब वह स्कूली दिनो में हमेशा अपनी कक्षाओं में अव्वल आने लगी थीं। इतना ही नहीं, वह जिन भी छात्र समूहों में शिरकत करतीं, हमेशा उनका नेतृत्व उन्ही के हाथों में रहा। और अब तो अवनी पूरी दुनिया से कह सकती हैं - 'आज मैं ऊपर, आसमाँ नीचे आज मैं आगे, ज़माना है पीछे'

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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