शम्मी कपूर! तुमसा नहीं देखा

0

'तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया' ये बोल भले ही शम्मी कपूर ने शर्मिला टैगोर को लिए कहे हों, लेकिन ये उन पर भी सटीक बैठते हैं। नीली-नीली आंखें, किसी जिम्नास्ट की तरह झुकती-उठती और मुड़ती हुई बॉडी, गर्दन को एकदम से झटकना और बालों को बिखरा कर संवारना, एक से बढ़ कर एक स्टाइल, तब के दौर में लोग देखते-देखते इनके दीवाने बन गये, क्योंकि इस हीरो ने सभी स्थापित परंपराओं को बदल कर रख दिया था।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर
वे शौकीन मिजाज थे और साथ ही तकनीक प्रेमी भी थे। आज के दौर में इंटरनेट के कई लोग दीवाने हैं। दिलचस्प बात यह है कि शम्मी कपूर फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं देश में भी इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले कुछ प्रारंभिक लोगों में थे। 

1968 में फि़ल्म ब्रह्मचारी के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था। चरित्र अभिनेता के रूप में शम्मी कपूर को 1982 में विधाता फिल्म के लिए श्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। 1995 में फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला। 

महान फिल्म अभिनेता और थिएटर कलाकार पृथ्वीराज कपूर और रामसरनी रमा मेहरा के दूसरे बेटे शम्मी सच्चे अर्थ में एक रॉकस्टार थे। उनका वास्तविक नाम शमशेर राज कपूर था। शम्मी कपूर को रिबेल स्टार, विद्रोही कलाकार की उपाधि इसलिये दी गई क्योंकि उन्होंने उदासी, मायूसी और देवदास नुमा अभिनय की परम्परागत शैली को बिल्कुल नकार कर अपने अभिनय की नयी शैली विकसित की थी।शम्मी कपूर जब फिल्म इंडस्ट्री में आये तो उनके फिगर, आड़ी तिरछी अदाएं और बॉडी लैंग्वज को फिल्म छायांकन की दृष्टि से उपयुक्त नहीं माना गया था, लेकिन बाद में यहीं अंदाज लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बन गया। 'तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया' ये बोल भले ही शम्मी कपूर ने शर्मिला टैगोर को लिए कहे हों, लेकिन ये उन पर भी सटीक बैठते हैं।

  नीली-नीली आंखें, किसी जिम्नास्ट की तरह झुकती-उठती और मुड़ती हुई बॉडी, गर्दन को एकदम से झटकना और बालों को बिखरा कर संवारना, एक से बढ़ कर एक स्टाइल, तब के दौर में लोग देखते-देखते इनके दीवाने बन गये, क्योंकि इस हीरो ने सभी स्थापित परंपराओं को बदल कर रख दिया था। उनके डांस करने का एक अलग ही अंदाज था, वह डांस से चाहने वालों का मन मोह लेते थे। वह अपनी फिल्मों में कभी लंबी टोपी पहनकर शैतानी करते, तो कभी कंबल लपेट कर फुदकते, कभी पहाड़ियों से लुढ़कते हुए याहू चिल्लाते, तो कभी विचित्र शक्लों से हीरोइनों को चिढ़ाते। उनकी हर अदा अनूठी और हर बात निराली थी।

वे शौकीन मिजाज थे और साथ ही तकनीक प्रेमी भी थे। आज के दौर में इंटरनेट के कई लोग दीवाने हैं। दिलचस्प बात यह है कि शम्मी कपूर फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं देश में भी इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले कुछ प्रारंभिक लोगों में थे। याहू बॉय, जंगली मैन या इंडियन एल्विस प्रिस्ले। जिस भी नाम से पुकारें चेहरा एक ही उभर कर आता है, शम्मी कपूर। राज कपूर, दिलीप कुमार, देवानंद के बाद की पीढ़ी के वो स्टार जो किसी लीग में नहीं थे। वो अपनी लीग के अकेले बादशाह थे। उनकी अपनी टर्फ थी और अपनी ही तरह की फैन फॉलोविंग। शम्मी कपूर ने बॉलीवुड की रंगत बदल कर अभिनय, डांसिंग और डायलॉग डिलवरी की ऐसी शैली इजाद कर दी, जिसको अपना पाना किसी और के लिए मुमकिन ही नहीं था। शम्मी कपूर ऐसे अभिनेता रहे हैं जिन्होंने उमंग और उत्साह के भाव को बड़े परदे पर बेहद रोमांटिक अंदाज में पेश किया। उनके गाने और हुक स्टेप्स आज भी युवाओं को पसंद आते हैं। 

एक महान विरासत की अद्भुत संतान-

वह पर्दे पर जितने बेहतरीन एक्टर थे, असल जिंदगी में उससे भी बेहतर इंसान और एक अच्छे बेटे थे। पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ उनकी बॉन्डिंग कमाल की थी। उनके साथ खेलना समय बिताना शम्मी कपूर को बेहद पसंद था। उन्होंने 12वीं पास करने के बाद पिता के कहने पर ही पृथ्वी थिएटर ज्वाइन किया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि राज कपूर से पहले शम्मी कपूर ने पृथ्वी थिएटर ज्वाइन किया था। ये बात शम्मी कपूर के बेटे आदित्यराज कपूर ने एक रेडियो शो पर बताई थी। उन्होंने बताया, पृथ्वीराज कपूर और शम्मी कपूर की केमिस्ट्री बाप-बेटे वाली कम और दोस्तों जैसी ज्यादा थी। उनकी बातचीत भी अपनी भाषा में ऐसी रहती थी जैसे दो दोस्त आपस में करते हैं। शम्मी कपूर ऐसे कलाकार थे, जो बॉलीवुड में बदलाव की बयार लेकर आए। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में जमे-जमाए अभिनेताओं की तरह नए तरह के रोल किए और रील लाइफ की तरह रीयल लाइफ में भी मस्तमौला रहे। भारत के एल्विस प्रेसली कहे जाने वाले शम्मी कपूर रुपहले पर्दे पर तब अपने अभिनय की शुरुआत की, जब उनके बड़े भाई राज कपूर के साथ ही देव आनंद और दिलीप कुमार छाए हुए थे।

21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में जन्मे शम्मी कपूर के घर में फिल्मी माहौल की वजह से वह भी अभिनेता बनने का ख्वाब देखने लगे। वर्ष 1953 में प्रदर्शित फिल्म जीवन ज्योति से बतौर अभिनेता शम्मी कपूर ने फिल्म इंडस्ट्री का रूख किया। लेकिन फिल्मी माहौल में परवरिश और पिता-भाई का बड़ा नाम होने के बाद भी काफी संघर्ष के बाद सफलता हासिल कर सके थे शम्मी कपूर। शुरुआत में शम्मी कपूर को नाकामी का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने ठोकर, लड़की, खोज, महबूबा, एहसान, चोर बाजार, तांगेवाली, नकाब, मिसकोकाकोला, सिपहसालार, हम सब चोर हैं और मेम साहिब जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। शम्मी कपूर के अभिनय का सितारा निर्देशक नासिर हुसैन की वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' से चमका। बेहतरीन गीत, संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की कामयाबी ने शम्मी कपूर को स्टार के रूप में स्थापित कर दिया।

चमकीली आंखों ने देखा चमकीला संसार-

वे शूटिंग पर अपना डांस खुद करना शुरू कर देते थे और कैमरा उन्हें फॉलो करता था। इसी की वजह से शम्मी की पहचान भी बनी। तब बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक दिग्गज कलाकार थे, जिनकी तूती बोलती थी। 1961 में फिल्म जंगली ने शम्मी कपूर को सशक्त पहचान दिला दी। इसके बाद शम्मी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कहा जाता है कि शम्मी कपूर बॉलीवुड के पहले एंग्री यंगमैन थे साथ ही रॉक स्टार भी थे। इस छवि ने तब के बॉलीवुड एक्टर को कई तरह के बंधनों से आजाद कर दिया। जब कभी फिल्म निर्माताओं को किसी नयी नायिका को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने का मौका देना होता था। वे उसे शम्मी कपूर की नायिका के रूप में अपनी फिल्म में लेते थे। देश के सबसे बड़े फिल्मी खानदान से ताल्लुक रखने वाले शमशेर राज कपूर उर्फ शम्मी कपूर के लिए फिल्मों में एंट्री जितनी आसान थी, उसके आगे का सफर उतना ही मुश्किल।

एक दौर तो ऐसा भी आया कि नाकामयाबियों से झुंझालकर उन्होंने फिल्मों से संन्यास लेने का मन बना लिया था। उनके जीवन में कई मुश्किल दौर भी आए खासकर तब जब 60 के दशक में उनकी पत्‍‌नी गीता बाली का निधन हो गया। तब वे अपने करियर के बेहद हसीन मकाम पर थे। शम्मी कपूर के कदम तब कुछ ठिठके जरूर थे, पर फिल्मी पर्दे के रंगरेज शम्मी अपने उसी अंदाज में अभिनय से लोगों को मदमस्त करते रहे। बढ़ते मोटापे के कारण शम्मी कपूर को बाद में फिल्मों में मुख्य भूमिकाओं से हटना पड़ा, लेकिन वे चरित्र अभिनेता के रूप में फिल्मों में काम करते रहे। उन्होंने मनोरंजन और बंडलबाज नामक दो फिल्मों का निर्देशन भी किया, लेकिन यह फिल्में नहीं चली। 

5 दशक लंबे करियर में उन्होंने करीब 200 फिल्में कीं। शम्मी कपूर एक लोकप्रिय अभिनेता ही नहीं हरदिल अजीज इंसान भी हैं। 1968 में फि़ल्म ब्रह्मचारी के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था। चरित्र अभिनेता के रूप में शम्मी कपूर को 1982 में विधाता फिल्म के लिए श्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। 1995 में फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला। 1999 में ज़ी सिने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किए गए। 2001 में स्टार स्क्रीन लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाजे गए। अपनी खास याहू शैली के कारण बेहद लोकप्रिय रहे हिंदी फिल्मों के पहले सिंगिंग-डांसिग स्टार शम्मी कपूर ने 14 अगस्त, 2011 को मुंबई के ब्रीज कैंडी अस्पताल में सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर अंतिम सांसें ली। 

हम आपको उनकी यादों के साथ छोड़े जा रहे हैं, सुनिए उनके सुपरहिट गाने

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Related Stories

Stories by yourstory हिन्दी