'जीनोमपत्री', क्योंकि...खुद को बीमारियों से बचाना है ज़रूरी

अब जमाना जीनोमपत्री का हैजन्म पत्री से लेकर जीनोमपत्री तकजीनोमपत्री के जरिये किसी व्यक्ति में किसी रोग विशेष के होने या ना होने की भविष्यवाणी की जा सकती हैअनुराधा आचार्य की कामयाबी की कहानी2011 में हुई MapMyGenome की शुरुआतकंपनी का 38 अस्पतालों से टाइ-अप

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अनु आचार्य ने 2010 में शिकागो से हैदराबाद आने का फैसला किया। इस तरह से उनके व्यावसायिक सफर की शुरुआत हुई। उन्होंने ओसिमम सोल्यूशन नाम की कंपनी की स्थापना की जो वैज्ञानिकों को उनके रिसर्च में मदद करती है। ओसिमम ने कम समय में ही अपनी एक अलग पहचान हासिल कर ली। कंपनी ने 3 अधिग्रहण किये, केबेर पार्टनर्स और वर्ल्ड बैंक से फंड हासिल किया। 15 सालों से कंपनी निरंतर विकास की राह पर है। अनु आचार्य के लिए ये बड़ी कामयाबी थी, मगर वो इतने से संतुष्ट नहीं थी। उन्होंने कुछ ऐसा करने की ठानी जो सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा हो और उसे प्रभावित करता हो। इसी सोच की गर्भ से MapMyGenome का जन्म हुआ।

MapMyGenome की शुरुआत

2011 में अनु ने कुछ अलग करने का फैसला किया। ओसिमम बायो पहले से ही इस क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही ही थी तो ऐसे में कुछ अलग प्रयोग का फैसला कतई आसान नहीं था। आखिरकार, उन्होंने ओसिमम बायो की TheMapMyGenome नाम से एक सब्सिडरी कंपनी स्थापित करने का फैसला लिया। ओसिमम बायो का विशाल डाटाबेस किसी वरदान से कम नहीं था। कंपनी के पास उस समय करीब 22 हजार जीन के सैंपल मौजूद थे। डाटाबेस से जीन से जुड़े हुए सारे डाटा इकट्ठा किये गए, लेकिन कंपनी के बोर्ड मेंबर्स के मन में इस प्रयोग को लेकर डर और हिचक थी। इसी वजह से MapMyGenome बनाने का काम करीब 2 साल तक लटका रहा।

अनु आचार्य, MapMayGenome की CEO और संस्थापिका
अनु आचार्य, MapMayGenome की CEO और संस्थापिका

आखिरकार, अनु ने 2013 में ओसिमम बायो को छोड़ने का फैसला किया ताकि MapMyGenome पर पूरी तरह फोकस किया जा सके।

जन्मपत्री से लेकर जीनोमपत्री तक

जीनोमपत्री को इस तरह से समझा जा सकता है कि ये किसी शख्स की सेहत से जुड़ी एक तरह की वैज्ञानिक कुंडली और जीन प्रोफाइल है। जीनोमपत्री के जरिये किसी व्यक्ति में किसी रोग विशेष के होने या ना होने की भविष्यवाणी की जा सकती है। इसके आधार पर किसी रोग विशेष के खतरे को खत्म करने के लिए जरूरी डाइट, लाइफस्टाइल में बदलाव आदि को सुझाया जा सकता है। इतना ही नहीं, MapMyGenome ये भी चेक करता है कि किसी खास दवा या ड्रग के प्रति आपका रिएक्शन क्या है। जैसे अगर आप पचास साल से ज्यादा उम्र के हैं और आपको डायबिटीज़ है तो ये बताया जा सकता है कि आप पर किस दवा का इस्तेमाल ज्यादा मुफीद होगा। इससे उन तमाम लोगों को मदद मिल सकती है जो इलाज के दौरान अनजाने में गलत दवा का इस्तेमाल कर रहे होते हैं।

जीनोमपत्री की प्रक्रिया

इसके तहत आपसे जुड़े तमाम विवरण इकट्ठा किये जाते हैं। जैसे फैमिली हिस्ट्री, माता-पिता से जुड़े विवरण, आप और आपके भाई-बहन, चाचा, मामा-मौसी वगैरह से जुड़े डिटेल लिए जाते हैं। आपके मौजूदा मेडिकल रिपोर्ट की भी जानकारी ली जाती है। इसमें आम तौर पर 10 से 20 मिनट का समय लगता है। इन विवरणों का जेनेटिक विशेषज्ञ विश्लेषण करते हैं और आपकी जीनोमपत्री तैयार करते हैं।

38 अस्पतालों से टाइ-अप

जीनोमपत्री बनवाने के लिए आप सीधे ऑनलाइन ऑर्डर दे सकते हैं। फिर आप MapMyGenomeके साथ अनुबंध वाले अस्पताल, हेल्थ सेंटर, योगा सेंटर या डिस्ट्रिब्यूटर के पास जाकर आप जीनोमपत्री बनवा सकते हैं। अनु बताती हैं कि MapMyGenome का 38 अस्पतालों के साथ टाइ-अप है। इसके अलावा Dr.Lal’s के साथ भी टाइ अप है जिसके डायग्नोस्टिक सेंटर हर रोज करीब 38 हजार मरीजों को देखते हैं।

जीनोमपत्री बनवाने में कितना खर्च?

MapMyGenome 1 हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक का टेस्ट करता है। इस क्षेत्र में काम करने वाली दूसरी कंपनियों के मुकाबले ये फीस बहुत कम है।

खुद से रूबरू

Genomepatri™ के जरिये आप खुद को बेहतर ढंग से जान पाएंगे। इससे आपको पता होगा कि आपको किन चीजों से सावधान रहना है, कैसी डाइट अनुकूल रहेगी, किस बीमारी का ज्यादा खतरा है और उसे किस तरह पास आने से रोका जा सकता है।