बिजनेस के तीन यार-सही समय, सही तरीका और जोरदार वार...

शेर की तरह काम करने वाले उद्यमी अपनी कंपनी के होते हैं सच्चे बादशाह...सही समय का इंतजार कर धावा बोलते हैं कुछ उद्यमी...जल्दबाजी के चक्कर में कई उद्यमी खो देते हैं अपने जीती बाजी

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हम जो देखते हैं या पढ़ते हैं उसका हमारे मन-मस्तिष्क पर बहुत प्रभाव पड़ता है। कई बार यह प्रभाव इतना गहरा होता है कि हमें अपने आसपास की कई चीज़ों और अपने व्यक्तित्व को समझने का मौका भी देता है। हमें ठहरकर सोचने के लिए विवश करता है और हमारी सोच को नई दिशाएं भी प्रदान करता है।

अय्यपा नागुबंदी पेशे से बिजनेस मैन हैं। एक दिन वे अपने तीन साल के बेटे के साथ एनिमल प्लैनेट चैनल पर एक डाक्यूमेंट्री देख रहे थे। यह डाक्यूमेंट्री उन जानवरों पर थी जोकि शिकार करने में माहिर होते हैं। डाक्यूमेंट्री में मुख्यत: शेर, चीता और बाघ के शिकार करने के तरीकों को दिखाया गया था। यह बताने की कोशिश की गई थी कि किस प्रकार यह जानवर अपने शरीर, क्षमताओं और अपनी कमियों को ध्यान में रखकर पहले शिकार का चुनाव करते हैं और फिर शिकार करते हैं। जानवरों के ऊपर बनी इस डाक्यूमेंट्री ने अय्यपा को सोचने पर मजबूर किया कि कैसे विभिन्न कमियों और खूबियों को ध्यान में रखते हुए और अपनी क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए यह जानवर पहले अपने शिकार का चुनाव करते हैं और फिर शिकार करते हैं। अय्यपा ने इन्हीं चीज़ों को ध्यान में रखकर इंसान से उनकी तुलना की। साथ ही यह भी कि कैसे अलग-अलग क्षमता, खूबियों व कमियों को लेकर तीन लीडर अपने करियर में आगे बढ़ते हैं।

शेर - शेर के बारे में सबसे पहली चीज़ जो हमें आकर्षित करती है वह है शेर का लुक। उसके शरीर और लुक से ही रॉयलटी झलकती है। वो सच में राजा की तरह ही दिखता व व्यवहार करता है। लेकिन एक बड़ी अजीब सी बात है कि शिकार हमेशा शेरनी करती है और उस शिकार का पहला निवाला शेर खाता है। बहुत सारे उद्यमी भी शेर की तरह होते हैं। जिनका व्यक्तित्व बहुत स्ट्रॉग और प्रभावित करने वाला होता है। वे कभी छोटे-छोटे कामों में ध्यान नहीं देते। छोटे और मेहनत वाले काम उनके कर्मचारी करते हैं लेकिन वे फिर भी पूरी संस्था को एक रखते हैं। और अपने सभी कर्मचारियों के लिए बहुत प्रोटेक्टिव होते हैं। वे कभी भी किसी समस्या से डरते नहीं हैं और हर समस्या का डट कर सामना करते हैं।

टाइगर - टाइगर यानी बाघ कभी एक साथ शिकार नहीं करते लेकिन रहते हमेशा साथ में हैं। ज्यादातर टाइगर अपनी छोटी फैमली के साथ रहते हैं। टाइगर की आदत होती है कि वे अपने शिकार पर देर तक नज़र रखते हैं और फिर अचानक शिकार पर धावा बोल देते हैं। कुछ उद्यमियों का स्वभाव भी इसी तरह का होता है। पहले वे मार्किट में चलने वाली प्रतिस्पर्धा पर नज़र रखते हैं और साथ ही यह भी देखते हैं कि कौन सी कंपनी ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है और मौका देखकर स्ट्राइक करते हैं। टाइगर आठ से नौ दिन में एक बार शिकार करता है। इसलिए वह शिकार करने से पहले यह सुनिश्चित करता है कि कम से कम 18 किलो मीट वो एक बार में ही शिकार कर ले। ताकि अगले शिकार तक उसके पास पर्याप्त ऊर्जा और खाना हो। ऐसे ही उद्यमी को भी पता होता है कि वह क्या करने जा रहा है और इसलिए वो भी बड़ा शिकार करता है और बहुत कम बार ही वह इस शिकार में फेल होता है। टाइगर में बहुत सय्यम होता है। वह जब भी अपने शिकार की गर्दन पकड़ता है उसे तब तक नहीं छोड़ता जब तक कि शिकार मर न जाए। वह धैर्य पूर्ण उस पल का इंतजार करता है। और यही सय्यम किसी उद्यमी को बहुत बड़ा लाभ भी पहुंचाता है। अच्छे मौकों को देखना और उन पर नज़र बनाए रखना और सही समय आने पर उन्हें प्राप्त करने के लिए प्रयास करना एक अच्छे लीडर की पहचान होती है।

चीता - चीता कई मायनों में टाइगर की तरह है। चीता भी अपने छोटे से परिवार के साथ ही रहना पसंद करता है। लेकिन टाइगर से अलग यह पावर नहीं दिखाता। चीता अपनी तेज गति के लिए जाना जाता है। जो उद्यमी बहुत तेजी से आगे बढऩा चाहते हैं वे आमतौर पर टीम के साथ अच्छी तरह मेलजोल बनाकर नहीं चल पाते। वे जल्दी के चक्कर में ज्यादा काम खुद ही कर लेते हैं। चीता तेज भागता है लेकिन वह बहुत ज्यादा दूर तक तेज नहीं भाग सकता। वह थोड़े समय के लिए ही तेज गति से भागता है और यह गति उसे फल दिला देती है या फिर यूं कहें कि अपने मक्सद को पूरा करा देती है। ऐसे ही कुछ उद्यमी थोड़े-थोड़े समय बाद कुछ बड़ा कर देते हैं लेकिन उसके बाद उन्हें आराम की जरूरत होती है। जिस कारण उनकी जीती हुई बाजी को कोई और छीन लेता है। ऐसे उद्यमी सबसे बेहतर काम अकेले ही कर पाते हैं। यानी ऐसे उद्यमी टीम बनाकर निर्णय नहीं ले पाते।

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