छत्तीसगढ़: नक्सल प्रभावित गाँव के बच्चे बोलते हैं फर्राटेदार अंग्रेजी

एक ऐसा गांव जिसके सरकारी स्कूल के बच्चे बात करते हैं अंग्रेजी में...

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राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ ब्लॉक के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के मुहडबरी गांव के प्राथमिक स्कूल में लगभग 65 से अधिक छात्र और छात्राएं पढ़ रहे हैं। ये प्रयोग स्कूल के शिक्षकों के द्वारा किया गया। उन्होंने सोचा कि जब प्राइवेट स्कूल के बच्चे अंग्रेजी बोलते हैं तो क्यों न सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी अंग्रेजी बोलें।

स्कूल के बच्चे
स्कूल के बच्चे
गांव के बच्चे जिन खेलों को छत्तीसगढ़ी भाषा में बोलकर खेला करते थे, उसे यहाँ के शिक्षकों ने पहले अंग्रेजी में बदला फिर यही खेल स्कूल परिसर में पढ़ाई के दौरान खेला जाने लगा।

इच्छा शक्ति के आगे हर मुश्किल काम आसान हो जाती है इस कहावत को खैरागढ़ ब्लॉक के मुहडबरी गांव के प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों और छात्रों ने साबित कर दिया। नक्सल प्रभावित इस गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे किसी महंगे प्राइवेट स्कूल के बच्चों की तरह अंग्रेजी बोलते हैं। स्कूल में चाहे क्लास किसी भी विषय की क्यों न हो हर सवाल और जवाब के लिए अब अंग्रेजी का इस्तेमाल करते है। गांव के इन बच्चों के लिए अंग्रेजी कठिन नहीं बल्कि सबसे आसान भाषा बन गई है।

दरअसल, राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ ब्लॉक के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के मुहडबरी गांव के प्राथमिक स्कूल में लगभग 65 से अधिक छात्र और छात्राएं पढ़ रहे हैं। ये प्रयोग स्कूल के शिक्षकों के द्वारा किया गया। उन्होंने सोचा कि जब प्राइवेट स्कूल के बच्चे अंग्रेजी बोलते हैं तो क्यों न सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी अंग्रेजी बोलें। फिर शुरुआत गांव के खेलों से की गई। गांव के बच्चे जिन खेलों को छत्तीसगढ़ी भाषा में बोलकर खेला करते थे, उसे यहाँ के शिक्षकों ने पहले अंग्रेजी में बदला फिर यही खेल स्कूल परिसर में पढ़ाई के दौरान खेला जाने लगा। खेल के दौरान छत्तीसगढ़ी शब्दों की जगह अंग्रेजी शब्दों को शामिल किया और बच्चों से इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा गया। देखते ही देखते ये शब्द बच्चों की जुबान पर बस गए।

इसके बाद साधारण बोलचाल के अंग्रेजी शब्दों को बोलने का अभ्यास बच्चों से कराया गया। अब स्कूली छात्र -छात्राएं आम बातचीत के दौरान अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्कूली छात्र और छात्राओं का कहना है कि स्कूल के शिक्षकों ने खेल के माध्यम से अंग्रेजी सिखाई जिसे सीखने में उन्हें आसानी हुई। खेल के अलावा कविता और गानों के जरिया भी अंग्रेजी की ऐसी घुट्टी पिलाई कि अंग्रेजी बच्चों के आचरण और बोलचाल में बस गई। अब बच्चे क्लास के बाहर आपस में बात भी अंग्रेजी में ही करते हैं और आगे चलकर कोई शिक्षक बनाना चाहता है तो कोई प्रशासनिक अधिकारी।

राजनांदगांव जिला मुख्यायल से लगभग 70 किलो मिटर दूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के जंगलो के बीच बसे इस गांव में लोगो को हिंदी भी ठीक से बोलने नहीं आती और इनके बच्चे गांव के ही प्राथमिक स्कूल में पढ़ रहे हैं और इस स्कूल में पदस्थ शिक्षकों के अथक प्रयास से आज फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे हैं। इस स्कूल में कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक की कक्षाएं लगती हैं और इस स्कूल में हिंदी माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाता है लेकिन इन शिक्षकों ने मन में ठाना की सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी प्राइवेट से कम नहीं हैं और यहाँ के बच्चे भी अंग्रेजी बोल सकते हैं।

स्कूल के एक शिक्षक का कहना है कि तीन साल पहले एनसीईआरटी ने सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी की बेहतर पढ़ाई के लिए शोध के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया था, जिसमें शिक्षकों ने वहीं से प्रशिक्षण लिया और तकनीकी जानकारी हासिल की थी, साथ ही यह भी जाना कि बच्चो को कैसे सरलता से अंग्रेजी सिखाई जा सकती है। बस इसी लाइन पर ये शिक्षक आगे बढ़ते गए। सबसे पहले इस स्कूल के कक्षा चौथी और पांचवी के बच्चों को अंग्रेजी विषय के बारे में जानकारी दी गई और पढ़ाई करवाई गई।

यह घटना साबित करती है कि सरकार बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जो कार्यक्रम और प्रशिक्षण दे रही है उसका सही और व्यापक इस्तेमाल किया जाए तो गांव की दशा बदलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। मुंहडबरी में जो शिक्षा की क्रांति आई वह इसका प्रमाण है।

मुहडबरी प्राथमिक स्कूल के शिक्षक रुपेश देशमुख बताते हैं कि ब्लॉक के पिछड़े इलाके मुहडबरी गांव के स्कूली बच्चे पहले ज्ञान के नाम पर बिल्कुल शून्य थे लेकिन शिक्षकों के इस प्रयोग से अब बच्चे अंग्रेजी बोल पा रहे हैं। इस स्कूल में कुल 65 बच्चे पढ़ाई करने आते हैं। वहीं कक्षा पहली और दूसरी में पढ़ने वाले बच्चे भी आसानी से अंग्रेजी का अक्षर ज्ञान सीख रहे हैं। नक्सल प्रभावित होने के कारण यह इलाका वैसे ही आभावों से जूझता है और यहाँ का बचपन अशिक्षा की भेंट चढ़ जाता है।

गांव में बच्चों के पालकों का कहना है की शिक्षकों ने जो प्रयोग किया है उसी का नतीजा है की बच्चे अंग्रेजी बोल रहे हैं और अब लगता ही नहीं कि हमारे बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हैं, क्योकि शिक्षकों की वजह से अब यहां के सरकारी स्कूल किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं हैं।

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