छोटे व्यापारियों को कैशलेस व्यापार करने की आजादी देता 'ftcash'

डच बैंक इंडिया के पूर्व डिप्टी सीएफओ संजीव चाढ़क और ग्रांड थार्नटन के साथ कार्यरत रहे दीपक कोठारी के दिमाग की उपज है ‘एफटीकैश’इसके माध्यम से सब्जीवाले और दूधवाले जैसे छोटे व्यापारी भी अपने उपभोक्ताओं के साथ मोबाइल आधारित लेनदेन कर सकते हैंफिलहाल मुंबई के पवई में 150 से अधिक दुकानदार सफलतापूर्वक कर रहे हैं प्रयोग और कर चुके हैं 10 लाख रुपये से अधिक का लेनदेनमुख्यतः मोबाइल फोन के माध्यम से लेनदेन करने और सामान खरीदने के बाद भुगतान करने की आजादी देता है ‘एफटीकैश’

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आॅफलाइन व्यापारियों के लिये लेनदेन के काम को आसान करने के क्रम में संजीव चाढ़क दुनिया के सामने ftcash (एफटीकैश) के विचार के साथ सामने आए। हुआ यूँ कि संजीव एकदिन अपने मोबाइल से सड़क के किनारे सब्जियां बेचने वाले को संब्जियों का आर्डर दे रहे थे और व्यस्त होने के चलते विक्रेता ने उनसे व्हाट्सएप्प के माध्यम से अपना आॅर्डर भेजने की गुजारिश की। संजीव के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब आॅफिस में उन्हें पता चला कि उस विक्रेता ने उनकी गैरहाजिरी में सारी सब्जियों को उनके घर तक पहुंचा दिया है और लेनदेन की यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही आसान और निर्विघ्न रही।

हालांकि असली परेशानी तब सामने आई जब भुगतान का समय आया। संजीव कहते हैं, ‘‘विक्रेता को अपना भुगतान लेने के लिये उस समय एक व्यक्ति को मेरे घर भेजना पड़ा जब मैं घर पर मौजूद था। बस उसी समय मेरे मस्तिष्क में विचार कौंधा कि कुछ ऐसा तरीका ईजाद किया जाए जिसके माध्यम से छोटे विक्रेता भी इलेक्ट्राॅनिक माध्यम से भुगतान प्राप्त कर सकें।’’ इसके बाद छोटे स्तर पर व्यापार कर रहे व्यापारियों को आसानी से अपने उपभोक्ताओं के साथ लेनदेन की सुविधा उपलब्ध करने के इरादे से जिबंेी की स्थापना की गई। यह एक ऐसा मोबाइल चलित मंच है जिसके माध्यम से आॅफलाइन विक्रेता मोबाइल तरीके से भुगतान प्राप्त करने के अलावा अपना विज्ञापन कर सकते हैं और यहां तक कि अपने उपभोक्ताओं को ईनाम से भी नजाव सकते हैं।

संजीव का कहना है कि भारत में ई-काॅमर्स बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है लेकिन फिर भी खुदरा बिक्री का कुल 1 प्रतिशत हिस्सा ही इसके हिस्से में आता है। संजीव कहते हैं, ‘‘एफटीकैश के माध्यम से हमारा इरादा खुदरा बिक्री के शेष 99 प्रतिशत हिस्से को अपने कब्जे में लेने का है।’’ हमारे अधिकतर लेनदेन दूधवाले या सब्जीवाले जैसे छोटे आॅफलाइन विक्रेताओं के साथ होते हैं।

उपभोक्ताओं और विक्रेताओं के साथ काम करने का तरीका

वे आगे जोड़ते हैं कि एफटीकैश के माध्यम से आॅफलाइन फुटकर विक्रेताओं के साथ लेनदेन का काम बेहद आसान हो जाता है और आप अपने आसपास स्थित व्यापारियों या सेवा प्रदाताओं के साथ नकद लेनदेन से मुक्त हो जाते हैं। उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन के माध्यम से बिल प्राप्त करने के अलावा आसानी से भुगतान भी कर सकते हैं। संजीव कहते हैं, ‘‘व्यापारी इस मंच का प्रयोग करते हुए अपने उत्पादों को स्थानीय स्तर पर प्रमोट कर सकते हैं और अपने निष्ठावान उपभोक्ताओं को पुरस्कृत भी कर सकते हैं।’’

यह कंपनी डिजिटल प्लेटफाॅर्म को अपनाने के लिये एक सरल और प्रभावी लागत वाला तरीके प्रदान करती है। उपभोक्ता घर बैठे अपने आसपास के दुकानदारों के बारे में जान सकते हैं और व्यापारी भी उन्हें छोटे से छोटा सामान उपलब्ध करवाकर रिमोट से या फिर इलेक्ट्राॅनिक तरीके से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार से इनकी पहुंच बहुत अधिक बढ़ जाती है।

एफटीकैश की अवधारणा को मूर्त रूप देने से पहले संजीव डच बैंक इंडिया के साथ डिप्टी सीएफओ के रूप में कार्यरत थे। दूसरे सहसंस्थापक दीपक कोठारी संजीव के साथ जुड़ने से पहले ग्रांड थार्नटन के साथ काम कर रहे थे। इस जोड़ी ने वर्ष 2014 में अपनी प्रारंभिक यात्रा प्रारंभ की और तीन महीनों से भी अधिक समय विचार-विमर्श और क्षेत्रों के सर्वेक्षण करने के अलावा विभिन्न उपभोक्ताओं और व्यापारियों के साथ बातचीत करने में व्यतीत किया।

प्रक्रियाओं को लागू करना

संजीव कहते हैं, ‘‘प्रारंभिक दौर में व्यापारियों और उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाओं को जानने के लिये उन्हें बिना किसी प्रोटोटाइप के यह समझाना कि यह उत्पाद उनके लिये कैसे काम करेगा अपने आप में काफी दिलचस्प अनुभव था। इन बिल्कुल छोटे स्तर के व्यापारियों को इस अवधारणा से रूबरू करवाना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हुआ। समय के साथ जैसे-जैसे उत्पाद अपना आकार लेता गया और हमने लोगों को इसका डेमो दिखाना प्रारंभ किया दोनों पक्षों से जुड़े लोग इसे स्वीकारते हुए अपनाने को तत्पर दिखे।’’

संजीव का कहना है कि उनका यह उत्पाद व्यापारियों के नजरिये बिल्कुल नया था और उन्हें इसे अपनाने में थोड़ा समय लगा। व्यापारी सदियों से पुराने तरीकों से व्यापार करने के आदी हैं और वे लोग अपने तौर-तरीकों में आसानी से बदलाव करने के लिये तैयार नहीं हैं। हालांकि उनका मानना है कि हाल-फिलहाल में व्यापार की दुनिया में कदम रखने वाले लोग इस उत्पाद को अपना रहे हैं और जल्द ही दूसरे लोग भी इसे अपनाने के लिये आगे आएंगे।

विकास और कार्यशैली

यह मंच इसी वर्ष जून में प्रारंभ किया गया था और फिलहाल मुंबई के पवई में क्रियशील है और आने वाले दिनों में इनका इरादा मुंबई के दूसरे इलाकों में अपना विस्तार करना है। इस कंपनी के मंच पर 150 से भी अधिक व्यापारी पंजीकृत हैं और अबतक यह लोग 10 लाख रुपयों से भी अधिक का लेनदेन इस मंच के माध्यम से कर चुके हैं।

एफटीकैश व्यापारियों से प्रत्येक लेनदेन के बदले एक निश्चित शुल्क वसूलकर अपने लिये राजस्व जुटाता है। इसके अलावा जब व्यापारी अपने उपभोक्ताओं को विज्ञापन इत्यादि पेश करते हैं तो वे एफटीकैश को को भी भुगतान करते हैं। इसके साथ ही इस टीम को भरोसा है कि जैसे-जैसे इनका नेटवर्क बढ़ेगा राजस्व जुटाने के और नए रास्ते सामने आएंगे।

संजीव आगे बताते हैं, ‘‘बीते 12 से 18 महीनों में हमारे द्वारा लक्षित किये जाने वाले व्यापारियों के समूह प्रौद्योगिकी को अपनाने के प्रति सकारात्मक हुए हैं। अब से पांच वर्ष पूर्व स्मार्टफोन सिर्फ कुछ चुनिंदा अभिजात्य वर्ग के लोगों के पास ही होता था लेकिन आज के दौर में छोटे से छोटा व्यापारी भी एक स्मार्टफोन का मालिक है और वह अपने व्यापार को बढ़ाने के लिये व्हाट्सएप्प जैसी एप्लीकेशनों का उउपयोग कर रहा है। उपभोक्ताओं की अवधारणा में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है और उन्हें अब खरीददारी के दौरान सुविधा चाहिये। वे अब रविवार या छुट्टी के दिन घर के बाहर सब्जी खरीदने के बजाय किसी भी दिन दफ्तर में बैठे सब्जी विक्रेता का भुगतान करने में आसानी महसूस करते हैं।’’

नकदी के लेनदेन के बिना काम करता बाजार

इस टीम को विश्वास है कि जैसे-जैसे छोटे व्यापारी अपने व्यवसाय को आगे ले जाने के क्रम में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिये खुलकर सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे ही भारत का बाजार तेजी के साथ विकास कर रहा है। इस टीम का कहना है कि एफटीकैश इन व्यापारियों का भागीदार बनकर इन्हें आगे बढ़ने में मदद करने के लिये हरदम तैयार है।

संजीव कहते हैं, ‘‘हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और हमें उम्मीद है कि वर्ष 2016 में मार्च के महीने तक हमारे साथ 2000 से अधिक व्यापारी जुड़ चुके होंगे। हम इस देश में छोटे स्तर पर व्यापार करने वाले व्यापारियों की प्रमुख चुनौतियों का सकारात्मक हल पेश करने में कामयाब रहेंगे। हमारा इरादा अपने आसपास के छोटे व्यापारियो को आॅनलाइन खिलाडि़यों के साथ प्रतिस्पर्धा के लिये सक्षम बनाने के अलावा उपभोक्ताओं को भी उसी स्तर की सुविधा प्रदान करने का है।’’

विश्व की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में फ्लिंट और लेवलअप जैसी उत्पाद काफी लोकप्रिय हैं जो उपभोक्ताओं को मोबाइल मंच के माध्यम से भुगतान करने के लिये प्रेरित करते हैं। हालांकि अभी तक भारतीय बाजार लेनदेन के लिये बिना नकदी के माॅडल को अपनाने के प्रयास में हैं लेकिन अभी भी बहुत छोटा वर्ग ही इस दिशा में आगे बढ़ा है। एक तरफ जहां सिर्फ 11 प्रतिशत शहरी आबादी कैशलेस लेनदेन की प्रक्रिया को अपना रही है वहीं आईडीएफ और आईएएफएआई का प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ 0.43 प्रतिशत बाजार ही अभी कैशलेस लेनदेन को अपना पाया है।

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

Stories by Nishant Goel