शिपिंग कंपनी की नौकरी छोड़ शुरू किया खुद का स्टार्टअप, हर महीने पांच करोड़ की कमाई

बिहार के पुर्णेंदु का करिश्मा, उद्यम से दे रहे कई लोगों को रोजगार

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जब कोई रुपए कमाने पर ही आ जाए तो पूर्णेंदु की तरह रिकार्ड तोड़ उम्मीदें परवान चढ़ सकती हैं। दो साल में ही लाख-दो-लाख नहीं, हर महीने की कमाई पांच करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। शिप की लगी-लगाई नौकरी छोड़कर ट्रांसपोर्ट के कारोबार में उतरे इस शख्स का इस साल 680 करोड़ रुपए तक का सालाना टर्नओवर हासिल करने का लक्ष्य है।

पुर्णेंदु शेखर
पुर्णेंदु शेखर
बयालीस वर्षीय पूर्णेन्दु शेखर ने सन् 1995 में मात्र बाईस वर्ष की उम्र में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को एक ट्रेनीज के रूप में ज्वॉइन कर लिया था। वहां से उन्होंने एक साल की ट्रेनिंग ली। उन्हें चालीस हजार रुपए स्टाइपिन्ड मिला। 

शिपिंग की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ कर एक शख्स ने खुद का ऐसा बिजनेस खड़ा किया कि आज लाख-दो-लाख नहीं, वह करोड़ों रुपए हर महीने कमा रहा है। वह कामयाब शख्स हैं मुजफ्फरपुर (बिहार) के पूर्णेंदु शेखर, और उनका बिजनेस है ट्रांसपोर्ट का। आज उनकी कंपनी अपनी वेबसाइट पर रेल, शिप, जहाज या रोड से होने वाली माल ढुलाई का बेस्ट रेट उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही कंपनी कार्गो के शिपमेंट के लिए शुरुआत से अंत तक काम करती है, वह भी बेहतर कमाई के साथ। कंपनी के पास फिलहाल दो हजार से अधिक रजिस्टर्ड ग्राहक हैं और वह रोजाना औसतन दस कंपनियों इससे जुड़ रही है। इस समय कंपनी के सात ऑफिस में लगभग चार दर्जन से अधिक लोग काम कर रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य इस साल के अंत तक 680 करोड़ रुपए टर्नओवर हासिल करना है। इसका स्टार्टअप चुनौतीपूर्ण तो है लेकिन इसमें कमाई भी अथाह है।

बयालीस वर्षीय पूर्णेन्दु शेखर ने सन् 1995 में मात्र बाईस वर्ष की उम्र में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को एक ट्रेनीज के रूप में ज्वॉइन कर लिया था। वहां से उन्होंने एक साल की ट्रेनिंग ली। उन्हें चालीस हजार रुपए स्टाइपेन्ड मिला। इसके बाद उन्होंने 2003 तक शिप पर काम किया। उनका मन कहीं और लगा हुआ था। अपने शिप के काम में वह ठीक से रम नहीं पा रहे थे। वह अपना बिजनेस शुरू करना चाहते थे लेकिन किसी तरह साल-दर-सार वहां खुद को घसीटते रहे। उन्होंने मई 2016 में नौकरी छोड़ दी और दिसंबर 2016 में एक छोटे से कमरे में ऑफिस बनाकर कोगोपोर्ट नाम से अपनी खुद की लॉजिस्टिक्स कंपनी का काम शुरू किया। कोगोपोर्ट बड़ी कंपनियों के गुड्स ट्रांसपोर्ट करती है। अब वह हर महीने 5.6 करोड़ की कमाई कर रहे हैं। पुर्णेंदु बताते हैं कि उनके मन में हमेशा कुछ अलग करने की ख्वाहिश रही है।

पुर्णेंदु शेखर
पुर्णेंदु शेखर

ट्रांसपोर्ट का स्टार्टअप मुनाफे की दृष्टि से एक अत्यंत संभावनाशील कारोबार है। यात्रियों को ढोने की बात हो या सामान की, देश में ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में कारोबार की असीम संभावनाएं हैं। सरकार का भी परिवहन सुविधाओं को बढ़ावा देने पर खासा जोर है। इस दिशा में सरकार सड़कों के निर्माण पर खासा जोर दे रही है। नई सड़कों के निर्माण के साथ ही ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में कारोबार के नए मौके सामने आ रहे हैं। इससे नए कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं तो पुराने ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के लिए भी विस्तार की संभावनाएं पैदा हुई हैं। इसीलिए देश के प्रमुख पंजाब नैशनल बैंक की एक अच्छी योजना 'फ्लीट फाइनेंस' है। इसके माध्यम से बिना कुछ गिरवी रखे एक करोड़ रुपए तक का कर्ज लिया जा सकता है।

इस योजना का लाभ ट्रांसपोर्ट के कारोबार में पहले से लगे और साथ ही इस कारोबार में उतरने के इच्छुक लोग इसका लाभ उठा सकते हैं। यात्रियों या सामान ढोने के लिए वाहन खरीदने के इच्छुक व्यक्ति या कंपनी (एसोसिएशन) इसका लाभ उठा सकती है। कर्ज के लिए आवेदन करने वाले के पास आवश्यक ड्राइविंग लाइसेंस या वैध लाइसेंस रखने वाला ड्राइवर होना चाहिए, जो वाहन चला सके। कर्ज लेने वाले के पास यात्रियों या सामान की ढुलाई के लिए संबंधित विभाग से मिला परमिट होना चाहिए। लेनदार के पास पर्याप्त अनुभव होना चाहिए और व्यवसाय कौशल होना चाहिए। एक या उससे ज्यादा ट्रक/बस रखने वाले ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स भी इसके हकदार होंगे। इस योजना के माध्यम से स्टैंडर्ड विनिर्माण कंपनियों द्वारा बनाए गए नए या पुराने वाहन खरीदे जा सकते हैं। चेसिस, बॉडी बनाने की लागत सहित वाहन पर आने वाले कुल खर्ज का 90 फीसदी लिया जा सकता है। नए वाहनों के लिए मार्जिन 10 फीसदी, पुराने वाहनों के लिए 25 फीसदी निर्धारित किया गया है।

स्टार्टअप के लिए सबसे पहले जरूरी है आप जिस काम को शुरू करना चाहते हैं, उसके बारे में जानें। ट्रांसपोर्ट यानी माल को व्यवस्थित तरीके से उनके निर्धारित स्थानों तक पंहुचाना। खुद की ट्रांसपोर्ट कंपनी शुरू करते समय पहला कदम होता है, कंपनी का रजिस्ट्रेशन। इसमें तीन चीजें जरूरी होती हैं। शॉपएक्ट लाइसेंस, उद्योग आधार तथा जीएसटी नम्बर। इसमें केवल 10,000 रुपये का खर्चा आता है। उसके बाद खुद के वाहन खरीदे जा सकते हैं। फायदे की बात ये है कि आजकल कई सारे बैंक इसके लिए 80 फीसदी लोन दे रहे हैं। बस 20 फीसदी धन की व्यवस्था करनी होती है। एक कंपनी ज्यादा से ज्यादा दस वाहन लोन लेकर खरीद सकती है।

इन 10 वाहनों के लिए चालक रखने होंगे। इसमें और भी कई स्कोप होते हैं, जैसे ओला उबर से आप अपने वाहनों को जोड़ सकते हैं। फायदे की बात ये है कि ओला उबर अब हर शहर तक पहुंच चुकी है, तो आप भी इससे जुड़कर अच्छे से अपने काम को आगे बढ़ा सकते हैं। बिजनेस बढ़ाने का एक प्लेटफार्म जस्ट डॉयल डॉट कॉम भी है। इसकी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जहां पर चार हजार रुपये में आपकी कंपनी का रजिस्ट्रेशन हो सकता है। इससे फायदा ये होगा कि अपने ही शहर में अपनी कंपनी के तमात कस्टमर मिल जाएंगे। ध्यान रखना होगा कि कस्टमर के सामान आदि को व्यवस्थित तरीके से पंहुचाया जा रहा है या नहीं। इस दौरान अपने वाहनों की भी बराबर सर्विसिंग करानी होगी अन्यथा कस्टमर को सेवा समय पर न मिलने पर कंपनी की गुडविल को खतरा पैदा हो सकता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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