झारखंड की इन दो बच्चियों ने बहादुरी से रोका अपना बाल विवाह

टीचर ने दी बच्चियों को हिम्मत, मना किया बाल विवाह करने से...

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झारखंड के जमशेदपुर के स्टील हब से करीब 25 किमी दूर, पुंसा गांव के मिडिल स्कूल में पढ़ने वालीं 15 साल की सरिता और उनकी 14 वर्षीय दोस्त माली किसी सितारे से कम नहीं हैं। दोनों ने अपने परिवारों को बोल दिया कि वो शादी नहीं करेंगी। उनके शिक्षक प्रदीप कुमार की मदद से उनमें ऐसा करने का आत्मविश्वास आया।

वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2010-2011 के अनुसार झारखंड, राजस्थान और बिहार के बाद भारत में उच्चतम बाल विवाह दर वाला राज्य है। और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़कियों के बाल विवाह का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 44 और शहरी क्षेत्रों में 21 है। यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, 19 साल से अधिक उम्र की मां के बच्चों की तुलना में बाल दुल्हन के बच्चों की संख्या 60 प्रतिशत अधिक है।

ऐसे में इन बच्चियों की बहादुरी एक बड़ी जीत है। और उस लड़ाई में अग्रणी शिक्षक प्रदीप हैं, जिनके पास छात्रों का अपना एक समूह हैं। जिनके साथ वो घर घर जागकर जागरूकता फैलाते हैं।

झारखंड के जमशेदपुर के स्टील हब से करीब 25 किमी दूर, पुंसा गांव के मिडिल स्कूल में पढ़ने वालीं 15 साल की सरिता और उनकी 14 वर्षीय दोस्त माली किसी सितारे से कम नहीं हैं। दोनों ने अपने परिवारों को बोल दिया कि वो शादी नहीं करेंगी। उनके शिक्षक प्रदीप कुमार की मदद से उनमें ऐसा करने का आत्मविश्वास आया। वे अपने साथी छात्रों और शिक्षक के साथ-साथ एक-दूसरे के घर गईं और अभी शादी न कराने के लिए अपने परिवारों को सफलतापूर्वक आश्वस्त कर लिया।

वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2010-2011 के अनुसार झारखंड, राजस्थान और बिहार के बाद भारत में उच्चतम बाल विवाह दर वाला राज्य है। और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़कियों के बाल विवाह का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 44 और शहरी क्षेत्रों में 21 है। यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, 19 साल से अधिक उम्र की मां के बच्चों की तुलना में बाल दुल्हन के बच्चों की संख्या 60 प्रतिशत अधिक है। जिसमें भी उन बच्चों के पहले ही जन्मदिन से पहले मरने की संभावना है। यूनिसेफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 15-19 वर्ष की आयु वाले विवाहित लड़कियों के प्रसव के दौरान मरने की दो बार अधिक संभावनाएं हैं। ऐसे में इन बच्चियों की बहादुरी एक बड़ी जीत है। और उस लड़ाई में अग्रणी शिक्षक प्रदीप हैं, जिनके पास छात्रों का अपना एक समूह हैं। जिनके साथ वो घर घर जागकर जागरूकता फैलाते हैं।

14 साल की माली तब सकते में आ गई जब एक दिन उसकी बहन ने स्कूल से घर बुलवा लिया। माली उस घटना के बारे में इंडियन एक्सप्रेस को बताती हैं, घर में मेहमान थे जिनसे मैं कभी नहीं मिली थी। मेरी मां ने मुझे सबको चाय देने के लिए कहा। मुझे आश्चर्य हुआ जब बाद में मुझे बताया गया कि ये लोग मेरे ससुराल वाले हैं, इस घर में मेरी शादी होने वाली है। आने वाले तूफान से सहमी हुई माली ने ये बात अपनी मित्र सरिता को बताया। उन दोनों ने अपने शिक्षक को ये बात बताई। शिक्षक प्रदीप के मुताबिक, जब माली और सरिता ने ये बाल विवाह वाली बात मेरी नोटिस में लाई तो मैं छात्रों के एक समूह के साथ उनके माता-पिता से मिलने गया। तो मैंने उनको समझाया कि नाबालिग की शादी करवाना गैर कानूनी है। बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। शादी के लिए स्कूल छोड़कर माली के बचपन को बर्बाद कर रहे हैं आप लोग। इतनी कम उम्र में किसी बच्ची को दुल्हन बना देने से उसकी गर्भावस्था के दौरान मृत्यु भी हो सकती है। इसके साथ ही साथ उनके स्वास्थ्य को कई तरह के सहित जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

कुछ हफ्तों के भीतर, सरिता ने पाया कि उसके माता-पिता भी उसकी शादी की योजना बना रहे थे। शिक्षक प्रदीप, माली सहित अपने कई छात्रों के साथ सरिता के घर गए और उसके घर वालों को भी काफी विस्तार से बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाया। वो तभी वहां से उठे जब घरवालों ने ये हामी भर दी कि सरिता की केवल 18 साल की उम्र के बाद ही शादी करेंगे। शिक्षक प्रदीप ने उन्हें समझाया कि एक बच्ची गर्भ धारण करने के लिए जैविक रूप से फिट नहीं होगी। अभी सरिता को पढ़-लिख लेने दीजिए फिर और अधिक शिक्षित और उपयुक्त दूल्हे पाने का बेहतर मौका मिलेगा।

गौरतलब है कि जमशेदपुर के आसपास के इलाकों में बाल विवाह में धीरे-धीरे गिरावट आई है। स्कूल में वापसी कर चुकी माली कहती हैं कि वह एक शिक्षक बनना चाहती है, क्योंकि सभी गांव के स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। प्रदीप कुमार ने कहा, सरिता और माली बहादुर लड़कियां हैं और हम हमेशा उनकी शिक्षा का समर्थन करेंगे और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने में मदद करेंगे।

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