पांच लाख रुपयों से बनाई देश की सबसे बड़ी फर्नीचर कंपनी

उदयपुर (राजस्थान) के लोकेंद्र राणावत और वीरेंद्र राणावत के 'वुडन स्ट्रीट' स्टार्टअप की हैरतअंगेज दास्तान...

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फर्नीचर कारोबार अब तरह-तरह के बिजनेस मॉडल का रूप लेने लगा है। इस पर नए-नए स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं। राजस्थान के राणावत ब्रदर्स, महाराष्ट्र की अनु टंडन का फर्नीचर स्टार्टअप इस बिजनेस की तमाम संभावनाओं के द्वार खोलता है। राणावत ब्रदर्स तो मात्र पांच लाख की लागत से 'वुडन स्ट्रीट' स्टार्टअप शुरू कर देश छह महानगरों में अपने कारोबार का विस्तार कर चुके हैं।

बिजनेस पार्टनर्स के साथ वीरेंद्र राणावत
बिजनेस पार्टनर्स के साथ वीरेंद्र राणावत
इनकी खासकर आधुनिक घरों के लिए ज्यादा मांग रहती है। कंपनी डाइनिंग टेबल, डाइनिंग टेबल सेट, फ़्यूटन बेड, सेंटर टेबल, टीवी स्टैंड, बुकशेल्व, सोफा सह बिस्तर, बार अलमारियों आदि की इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए स्वयं अपनी टीम भी उपलब्ध कराती है।

उदयपुर (राजस्थान) के लोकेंद्र राणावत और वीरेंद्र राणावत के 'वुडन स्ट्रीट' स्टार्टअप की दास्तान भी कुछ कम हैरतअंगेज नहीं है। अभी तीन साल पहले ही मात्र पांच लाख रुपए की लागत से वुडन स्ट्रीट नाम से अपना छोटा सा बिजनेस शुरू करने वाले राणावत की कम्पनी आज देश की तीसरी सबसे बड़ी फर्नीचर कम्पनी बन गई है। लोकेंद्र राणावत का कहना है कि वुडन स्ट्रीट का काम शुरू करने से पहले वह बिड़ला ग्रुप में और उनके भाई वीरेंद्र राणावत टाटा ग्रुप में काम कर रहे थे। यह एकमात्र ऐसी कम्पनी है, जो फर्नीचर में भी कस्टमाइज्ड फर्नीचर देती है। यह ई-कॉमर्स कम्पनी ऑनलाइन फर्नीचर उपलब्ध कराती है। इसका मुख्यालय जयपुर (राजस्थान) में है। इसकी बेंगलुरु और मुंबई में भी शाखाएं हैं। ग्राहकों को कंपनी की ओर से तरह-तरह के डिजायन भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

ग्राहक अपनी पसंदीदा डिजायन और लकड़ी के फर्नीचर इस कंपनी के माध्यम से खरीद सकते हैं। देश के हजारों घरों में आज वुडन स्ट्रीट के फर्नीचर्स सजे हुए हैं। इसके फर्नीचरों में एक खास बात ये है कि इन्हे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है। कंपनी खास तौर से लिविंग रूम, बेडरूम, डाइनिंग, स्टडी रूम फर्नीचर उपलब्ध कराती है। इनकी खासकर आधुनिक घरों के लिए ज्यादा मांग रहती है। कंपनी डाइनिंग टेबल, डाइनिंग टेबल सेट, फ़्यूटन बेड, सेंटर टेबल, टीवी स्टैंड, बुकशेल्व, सोफा सह बिस्तर, बार अलमारियों आदि की इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए स्वयं अपनी टीम भी उपलब्ध कराती है।

वुडन स्ट्रीट आधुनिक अपार्टमेंट की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के अतिरिक्त सुविधाओं वाले कलात्मक फर्नीचर्स, लाउंज कुर्सी, रॉकिंग कुर्सी, कॉफी टेबल आदि का भी कारोबार कर रही है। मसलन, लिविंग रूम को सागौन की लकड़ी से सजाया जाता है। एक आरामदायक बेडरूम हर किसी की जरूरत है। कौन ऐसा बिस्तर नहीं चाहता, जो पूरी तरह आरामदायक हो। इस कंपनी के सुसज्जित बिस्तरों वाले सिंगल बेड, डबल बेड, दीवान बेड, ड्रेसिंग टेबल, बंक बेड, अलमारी और आवश्यक स्टोरेज भारी डिमांड में हैं। कंपनी के पास रसोई अलमारियों, क्रॉकरी इकाइयों, डाइनिंग टेबलों की भी एक अनोखी रेंज है। अध्ययन कक्ष फर्नीचर्स की एक विशेष श्रृंखला है। यहां तक कि बच्चों के कमरे के लिए विशेष किस्म के सजावटी फर्नीचर्स हैं।

ताजा सूचना ये है कि लोकेंद्र राणावत और वीरेंद्र राणावत के स्टार्टअप को अब राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड से भी भारी आर्थिक मदद मिल रही है। हाल ही में राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड ने इस कम्पनी को पांच करोड़ रुपए की फंडिंग की है। ऐसा पहली बार है, जब वेंचर कैपिटल ने किसी ई-कॉमर्स स्टार्टअप की इतनी बड़ी आर्थिक मदद की है। वैसे तो इस समय कम्पनी के देशभर में छह दफ्तर हैं, लेकिन इनमें जयपुर, बेंगलुरू, मुम्बई और पुणे के दफ्तरों सबसे ज्यादा कमाई का स्रोत बने हुए हैं। कम्पनी इसके अतिरिक्त कस्टमर को अपने स्टोर में आकर फर्नीचर देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराती है। हालांकि स्टोर में पसंद आने के बाद भी कस्टमर को प्रोडक्ट ऑनलाइन ही खरीदना पड़ता है।

इसी तरह मुंबई की अनु टंडन विएरा ने गोरेगांव में वेस्ट मटीरियल से स्टाइलिश फर्नीचर तैयार करने का स्टार्टअप शुरू किया है। वह बताती हैं कि जब उनकी उम्र लगभग 50 साल हो चली थी, तब वह अपने पूरे परिवार के साथ ग्रीस की ट्रिप पर गयी थीं। उस ट्रिप ने ही उनकी जिंदगी को एक नया मोड़ दिया और स्टार्टअप की नींव भी उस ट्रिप ने ही रखी। आइलैंड पर उन्होंने एक महिला को देखा, जिसकी उम्र लगभग 60 साल रही होगी, वह फैब्रिक पर कारीगरी करते हुए तरह-तरह की क्रिएटिव चीजें बना रही थी। उस महिला को काम करते हुए देख उनको इतनी खुशी मिली, जितनी उसे पहले कभी किसी नहीं मिली थी। उसी समय उन्होंने अपना स्टार्टअप प्लान कर लिया। उन्होंने सबसे पहले उन चीजों को चुना, जो रिटायर (वेस्ट मटीरियल) हो चुकी रहती हैं। उनकी दिलचस्पी हमेशा फैक्टरीज के बाहर रखे डस्टबिन्स पर रहती।

ग्रीस ट्रिप से भारत लौटने के बाद अनु टंडन सबसे पहले अपने कॉलेज एनआइडी पहुंचीं, जहां वह विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर जाती रहती हैं। कॉलेज में उन्होंने टेक्स्टाइल की रद्दी से बुनाई के लिए तैयार रंगीन सामग्री देखी। इससे उन्हें अपने लिए आइडिया मिला। वह प्लास्टिक और टेक्स्टाइल की रद्दी के साथ घर आयीं और उनपर प्रयोग शुरू किया। मुंबई एक बहुत बड़ा इंडस्ट्रियल शहर है और इसलिए उन्हें रॉ-मटीरियल के लिए कोई खास चिंता नहीं करनी पड़ी। साथ ही, इस आइडिया से उनके स्टार्टअप को एक रचनात्मक रूप भी मिल रहा था। इसमें उन्हें साथ मिला अपनी एक दोस्त का, जिन्होंने उनको मझगांव के पास एक डॉक पर खाली जगह दे दी। वहीं पर उन्होंने वेस्ट मटीरियल्स पर अपने प्रयोग शुरू किए।

वह ऑटो शॉप्स से पुराने टायर, गुजरात-राजस्थान से चिंदी और फैक्टरियों से इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक खरीदती हैं। इन बेकार हो चुकी चीजों से ही वह कुछ नया बनाना जानती हैं। आज उनके स्टार्टअप ने चेन्नई, बेंगलुरु, पुदुचेरी, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे समेत देशभर में 15 डिजाइन स्टोर्स के साथ करार कर रखा है। वहां काम करने वाले उनके कारीगर भी अपने काम से खुश हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वे कुछ नया कर रहे हैं और उनके बनाये उत्पाद पर उनका हक है। कंपनी के कारीगर खुद अपनी तरफ से भी आइडिया लेकर आते हैं, जिनके सुझावों का वह पूरा ख्याल रखती हैं। भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए वह कहती हैं कि वह इसे बहुत बड़ा नहीं बनाना चाहतीं क्योंकि यह सिर्फ पैसों के लिए नहीं है। यह काम वह अपनी और दूसरों की संतुष्टि के लिए और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए कर रही हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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