हाइवे टोल प्लाजा पर जाम कम करने के लिए सरकार ने लॉन्च किए ऐप

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हाईवे पर सफर करने वाले लोग इस ऐप के जरिए फास्टैग खरीद सकते हैं। ये कार्ड खरीदने वाले के पास 24 घंटों में पहुंचा दिए जाएंगे। टोल गेट पर एक लेन पहली सितंबर से खासतौर से फास्टैग्स के लिए रिजर्व रहेगी। 

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
 इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बीच टाई-अप के जरिए बनाया गया है। फास्टैग एक एकाउंट से जुड़ा होता है।

जब गाड़ी किसी टोल प्लाजा की लेन में पहुंचती है तो सेंसर गाड़ी के आगे वाले शीशे से जुड़े टैग को पढ़ता है, चुंगी काटता है और गेट खोल देता है। यूजर्स अब लॉन्च किए गए मोबाइल ऐप से अपनी टोल कारों को रिचार्ज कर सकेंगे।

देश के हाइवेज पर लंबे-लंबे जाम को खत्म और टोल प्लाजा पर लगने वाली गाड़ियों की लाइनें कम करने के लिए सरकार ने मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दो मोबाइल ऐप्स - माइ फास्ट टैग और फास्टैग पार्टनर का शुभारंभ किया जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह के लिए फास्टैग (रेडियो फ्रीक्सेंवी आइडेंटिफिकेशन या RFID कार्ड) की उपलब्धता प्रदान करेंगे। हाईवे पर सफर करने वाले लोग इस ऐप के जरिए फास्टैग खरीद सकते हैं। ये कार्ड खरीदने वाले के पास 24 घंटों में पहुंचा दिए जाएंगे। सरकार राजमार्गों पर सभी टोल लेन में 31 अक्टूबर तक ऐसी व्यवस्था कर देगी कि वहां RFID के जरिए टोल ले लिया जाएगा। टोल गेट पर एक लेन पहली सितंबर से खासतौर से फास्टैग्स के लिए रिजर्व रहेगी। अभी देश में केवल सात लाख गाड़ियों में टोल टैग एक्टिव हैं।

अभी तक इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की ओर से बनाए गए टोल टैग केवल टोल प्लाजा और आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई सहित कुछ बैंकों में ही उपलब्ध थे। इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बीच टाई-अप के जरिए बनाया गया है। फास्टैग एक एकाउंट से जुड़ा होता है, जिससे यूजर इसमें पैसा डालता है। जब गाड़ी किसी टोल प्लाजा की लेन में पहुंचती है तो सेंसर गाड़ी के आगे वाले शीशे से जुड़े टैग को पढ़ता है, चुंगी काटता है और गेट खोल देता है। यूजर्स अब लॉन्च किए गए मोबाइल ऐप से अपनी टोल कारों को रिचार्ज कर सकेंगे।

जिन कारों और दूसरी चार पहिया गाड़ियों में मैन्युफैक्चरर ने आरएफआईडी इंस्टॉल किया हो, वे भी एनएचएआई ऐप के जरिए अपने टैग्स को एक्टिवेट कर सकेंगे। मायफ़ास्टैग एक ऐप है जिसे एंड्रॉइड और आईओएस सिस्टम दोनों के लिए डाउनलोड किया जा सकता है। यूजर इस ऐप से फास्टैग की खरीदारी या रिचार्ज कर सकता है। ऐप लेनदेन करने में मदद करने के अलावा ऑनलाइन शिकायत को हल करने में सहायता प्रदान करता है। एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया, 'एक अलग ऐप लॉच किया गया है। जिन लोगों की गाड़ियों में मैन्युफैक्चरर ने आरएफआईडी टैग्स इंस्टॉल किए हों, वे इस ऐप से इन टैग्स को एक्टिवेट कर सकेंगे।'

अथॉरिटी के एक अधिकारी ने बताया कि 1 अक्टूबर, 2017 से देश के सभी 371 राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा की सभी लेन फास्टैग से युक्त हो जाएंगी। हर एक टोल प्लाज़ा की एक लेन समर्पित फास्टैग लेन होगी, जहां कोई अन्य भुगतान स्वीकार नहीं होगा। बॉर्डर चेक पोस्ट हटाने के बाद सरकार टोल गेट्स पर भीड़ घटाने के लिए काम कर रही है ताकि माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ सके। जीएसटी लागू होने के बाद राजमार्गों पर आवाजाही में दिक्कतें घटने का दावा किया जा रहा है क्योंकि बॉर्डर चेक पोस्ट्स हटाई गई हैं। माल से लदे ट्रकों के अब रोज औसतन 325 किमी दूर तय करने का दावा भी किया जा रहा है, जबकि पहले उनके 200 किमी का ही सफर पूरा कर पाने की शिकायतें थीं।

अब सरकार राजमार्गों पर कंजेशन और घटाना चाहती है और इसमें इलेक्ट्रिक टोल कलेक्शन ही एकमात्र उपाय दिख रहा है। हाल में अदालतों ने कई टोल गेट्स को हटाने के आदेश दिए थे क्योंकि जाम की स्थिति बनने से राजमार्ग बनाने वाली कंपनियों और सरकार की आमदनी को चपत लग रही थी। एनएचएआई के अधिकारी ने कहा, 'मोबाइल एप्लिकेशन से खरीदे गए टोल टैग्स को 24 घंटों में डिलीवर कर दिया जाएगा। यूजर्स उन्हें एनएचएआई, बैंकों की वेबसाइट्स और टोल प्लाजा के पास के कॉमन सर्विसेज सेंटर से खरीद सकते हैं।'

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