जिसकी ऊंगलियों पर नाचता है इंटरनेट का संसार

16 साल की उम्र में बनाया ब्लॉग इंजनPingoat का किया निर्माणसाल 2010 में बनाया CVMaker

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आप कैसा महसूस करोगे जब आपकी बनाई किसी चीज को मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष इस्तेमाल करें ? कैलाश नाध के लिए ये सामान्य दिन था वो भी तब जब उनकी उम्र महज 16 साल की थी। साल 2003 में जब वर्ल्ड प्रेस का आगमन नहीं हुआ था, तब ब्लॉगिंग इंजन की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी। उस वक्त कैलाश ने बोस्ट मशीन को इजाद किया। ये शुरूआती ब्लॉग इंजन था।

कैलाश नाध
कैलाश नाध

आज कैलाश ZerodhaTrading में मुख्य तकनीकी अधिकारी हैं। इलाहाबाद में जन्मे कैलाश की विज्ञान में गहरी रूचि थी। जब वो आठ साल के थे तभी उन्होने यांत्रिक रोबोट का निर्माण कर लिया था बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के साथ छेड़छाड़ करनी शुरू कर दी थी। जल्द ही उनके पिता का केरल तबादला हो गया। यहां पर उन्होने कम्प्यूटर की पढ़ाई शुरू की। पहले विंडोज 98 और फिर QBasic सीखने के बाद उनको कम्प्यूटर का नशा सा हो गया। इस दौरान वो 14 घंटों तक कम्प्यूटर के सामने बैठे रहते और कई दूसरे प्रोग्राम जैसे सी और पर्ल को सीखा। तो दूसरी ओर पढ़ाई का स्तर भी गिर रहा थे। कैलाश जब सातवीं क्लास में थे तभी उन्होने फ्रीलांस प्रोजेक्ट करने शुरू कर दिये। उन्होने अपना पहला प्रोजेक्ट 5 डॉलर में किया और धीरे धीरे उनकी आमदनी बढ़ने लगी। कैलाश बताते हैं कि एक बार उनकी मां को ये देखकर हैरान हुई कि उनके लिए अमेरिका से 99 डॉलर का चैक आया है।

साल 2003 में जब कैलाश ने बोस्ट मशीन का निर्माण किया था उस वक्त ब्लॉगिंग के लिए कुछ ही प्लेटफॉर्म मौजूद थे। जल्द ही उनको मेहनत का फल मिला और उस दौरान ढ़ाई लाख से ज्यादा डाउनलोड हुए। जल्दी ही बोस्ट मशीन 17 भाषाओं में मिलने लगी। ये वो वक्त था जब मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति के ब्लॉग के लिए इसका इस्तेमाल किया जाने लगा। ये साल 2006 की बात है जब एमएसयू वर्ल्ड प्रेस में बदल गया था। कैलाश की वेबसाइट देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस दौरान वो अपनी उम्र से बढ़कर कई बेहतरीन काम कर रहे थे। 10 वीं तक पहुंचते-पहुंचते कैलाश ने प्लेनेट सोर्स कोड के विजेता के तौर सामने आये।

कैलाश नाध
कैलाश नाध

धुन के पक्के कैलाश ने बोस्ट मशीन बनाने के बाद दूसरों की तरह चुपचाप नहीं बैठे उन्होने अपने काम को जारी रखा और pingoat का निर्माण किया। जिसे उन्होने बाद में बेच दिया। एक दौर में pingoat का शुमार टॉप की 2000 इंटरनेट वेबसाइट में होता था और 8 मिलियन पिंग्स रोज भेजे जाते थे। pingoat सिर्फ एक सर्वर पर काम करता था जिससे कैलाश को काम करने में काफी दिक्कत होती थी ऐसे में कैलाश ने एक अमेरिकी ग्राहक को बेच दिया। इसके बाद इस सेवा को बंद कर दिया गया और लोगों के बीच इसने wrote about it के माध्यम से वापसी की।

इस सफलता के बाद कैलाश ने अपना काम जारी रखा और वो एक से बढ़कर एक चीज बनाते चले गए। खास बात ये थी कि उनकी बनाई चीजों को लोग बढ़ चढ़ कर इस्तेमाल करते। कैलाश का कहना है कि अगर आप कोई चीज बनाते हैं तो वो मिलियन लोगों तक पहुंचनी चाहिए। कैलाश का कहना है कि उन्हे नहीं लगता कि उपयोगकर्ता उनके बनाये उत्पादों पर शुल्क चुकाएंगे इसलिए वो अपने उत्पादों में मुफ्त रखना चाहेंगे। जिस साल कैलाश ने Pingoat बनाया उसी साल उन्होने Splogspot का निर्माण किया। जो स्पैम ब्लॉग के डेटाबेस को खोजता था। इस दौरान उनको कई धमकियां भी मिली। स्पैम बनाने वालों ने उनको जान से मारने की धमकी तक दी लेकिन उन्होने इन धमकियों से डरने की जगह आगे बढ़ना जारी रखा।

दुर्भाग्य से हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में इंटरनेट की तरह नहीं है। तभी तो प्राप्त नंबरों से आपका मूल्यांकन होता है ना कि इस बात से कि आपके बनाये उत्पाद का कितने लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। कैलाश स्कूली दिनों में अक्सर 95 प्रतिशत तक नंबर लाते थे लेकिन उनके माता-पिता को तब निराशा हुई जब मैट्रिक की परीक्षा में उनके 86 प्रतिशत अंक आये। कैलाश का हर चीज को देखने का नजरिया ही अलग था तभी तो वो जब लोगों से मिलते तो वो उनको आब्जेक्ट के तौर पर देखते।

साल 2006 में कैलाश लंदन चले गए जहां पर उनको काम करने की ज्यादा आजादी मिली और उन्होने बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होने Oddpath तैयार किया। जिससे करीब 11 मिलियन लोग जुड़े और जो अमेरिका में काफी बड़ा सर्च इंजन साबित हुआ। जिसे बाद में उन्होने साल 2007 में एक अमेरिकी कारोबारी को बेच दिया। साल 2010 में जब कैलाश ने पीएचडी के लिए आवेदन किया तो उन्होने इंटरनेट पर अपना संक्षिप्त विवरण बनाने के लिए ऐसी किसी वेबसाइट की खोज की, लेकिन उनको निराशा ही हाथ लगी। जिसके बाद कैलाश ने फैसला किया कि वो खुद ही कुछ करेंगे और उन्होने CVMaker बना डाला। अब तक इसका इस्तेमाल करीब डेढ़ लाख लोग कर चुके हैं। हाल ही में उन्होने Olam का निर्माण किया है। जो इंग्लिश भाषा को मलयालम में बदल देता है। जिसमें ऐसे एक लाख शब्दों को डाला गया है और ये संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इसके लिए काफी लोग उनकी मदद कर रहे हैं। कैलाश ने जब कारोबार शुरू करने के बारे में सोचा तब उनकी मुलाकात Zerodha के संस्थापक नितिन कामथ से हुई। बाद में वो उनके साथ जुड़ गये। भविष्य के बारे में कैलाश का कहना है कि वो आम लोगों के लिए ऐसे उत्पाद बनाना चाहते हैं जिनको लोग ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।

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