अब राइड कैंसिल करने पर ओला और उबर ड्राइवर्स को देना होगा 25,000 रुपये जुर्माना

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दिल्ली सरकार अब टैक्सियों को लेकर अपनी नीति और सख्त करने जा रही है। इसके तहत यदि किसी ऐप बेस्ड कैब एग्रिगेटर का ड्राइवर आपके पिक-अप पॉइंट पर आने से इनकार करता है तो फिर उस पर 25,000 रुपये तक का फाइन लगेगा।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
एक बार नियम लागू होने के बाद, ऐप-आधारित सभी एग्रीगेटर्स को दिल्ली में ऑपरेट करने के लिए विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होगा। इसके अलावा उन्हें 24x7 कॉल सेंटर भी चलाना होगा व परिवहन विभाग के नियंत्रण केंद्र के साथ सभी कैबों के लाइव जीपीएस डेटा को भी साझा करना होगा। 

कई बार ऐसा होता है जब आप अपने मोबाइल से कैब बुक करते हैं और ओला या उबर के ड्राइवर लास्ट टाइम पर आने से मना कर देते हैं। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में ये समस्या काफी ज्यादा अखरती है। ड्राइवरों की इन हरकतों से लोगों का काफी समय बर्बाद होने के साथ-साथ वे अपने ऑफिस या किसी अन्य जरूरी काम पर समय से नहीं पहुंच पाते हैं। हालांकि अब इसका समाधान किया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए बड़ा प्रस्ताव रखा है। दरअसल दिल्ली सरकार अब टैक्सियों को लेकर अपनी नीति और सख्त करने जा रही है। इसके तहत यदि किसी ऐप बेस्ड कैब एग्रिगेटर का ड्राइवर आपके पिक-अप पॉइंट पर आने से इनकार करता है तो फिर उस पर 25,000 रुपये तक का फाइन लगेगा।

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार जो नीति बना रही है उसके मुताबिक अगर कोई यात्री छेड़खानी या ड्राइवर के गलत व्यवहार की शिकायत करता है तो इसकी शिकायत एग्रिगेटर को पुलिस में दर्ज करानी होगी। अगर वह एग्रिगेटर (ओला, उबर या अन्य) ऐसा करने में असफल रहता है तो उसपर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, दिल्ली सरकार अपनी इस नीति के तहत सर्ज प्राइसिंग पर नियंत्रण रखने और सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करने पर जोर दे रही है।

पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर सतेंद्र जैन के नेतृत्व वाले पैनल द्वारा तैयार किए गए "ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स नियम, 2017" और "सिटी टैक्सी योजना, 2017" के ड्राफ्ट को जल्द ही फाइनल कर दिल्ली कैबिनेट को मंजूरी के लिए भेज सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, दिल्ली के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने कहा, 'दिल्ली में कैब सर्विस अब ट्रासपोर्टेशन का महत्वपूर्ण जरिया है और बड़े पैमाने पर यात्री ऐप बेस्ड ऐग्रिगेटर्स के जरिए यात्रा करते हैं। इन कैब सर्विसेज को रेग्युलेट करने के लिए जल्दी ही नियम तय करने की जरूरत है।'

एक बार नियम लागू होने के बाद, ऐप-आधारित सभी एग्रीगेटर्स को दिल्ली में ऑपरेट करने के लिए विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होगा। इसके अलावा उन्हें 24x7 कॉल सेंटर भी चलाना होगा व परिवहन विभाग के नियंत्रण केंद्र के साथ सभी कैबों के लाइव जीपीएस डेटा को भी साझा करना होगा। एनसीआर टैक्सियों का उपयोग भी एग्रीगेटर्स द्वारा किया जा सकता है बशर्ते उन्हें परिवहन विभाग के नियंत्रण केंद्र को उनकी जीपीएस फीड देनी होगी। अभी कई बार ड्राइवर्स कैब में मोबाइल के जरिए जीपीएस का इस्तेमाल करते हैं लेकिन नई नीति के मुताबिक कैब में एक कम से कम 6 इंच का जीपीएस डिस्पले होना जरूरी होगा जो गाड़ी की मौजूदा लोकेशन बताएगी।

खबरों के मुताबिक एग्रिगेटर को एक नया फीचर भी जोड़ना होगा जिसमें यात्री अपनी लोकेशन और कैब की जानकारी ऐप के जरिए कम से कम 2 लोगों को भेज सकेंगे। यहीं नीति लागू होने के बाद ऐग्रिगेटर्स को ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से तय न्यूनतम और अधिकतम किराये की पॉलिसी को फॉलो करना होगा। कहा जा रहा है कि इस नई नीति से उन ड्राइवरों पर भी लगाम लगेगी जो धर्म, जाति के आधार पर यात्रियों को बैठाने से मना कर देते हैं।

इसके अलावा पूल राइडिंग पर भी कमेटी बड़ा फैसला लेगी। यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में शिकायतों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए ये मसौदा नीति तैयार की गई है। यही नहीं नई नीति के आधार पर सभी ऐग्रिगेटर्स को अपने ऐप में सभी फीचर जल्द उपलब्ध कराने होंगे। इसमें पैनिक बटन भी होगा जो यात्री के दबाते ही स्थानीय पुलिस अलर्ट भेजेगा। ऐप के जरिए ड्राइवर की साफ फोटो और गाड़ी की जानकारी भी बतानी होगी।

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