गांव में टॉयलट बनवाने के लिए अंजनी ने किया संघर्ष, सबके लिए बनीं प्रेरणा

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 टॉयलट न होने की वजह से गांव की महिलाओं को अपनानजनक और असुविधा भरी जिंदगी जीनी पड़ती है। इसे बदलने के लिए गांव की अंजनी ने सोचा और उसे साकार भी कर के दिखाया है।

अंजनी (फोटो साभार- इंडिया टाइम्स)
अंजनी (फोटो साभार- इंडिया टाइम्स)
 अंजनी प्रशासन की मदद से महिलाओं के लिए टॉयलट बनवाने में कामयाब रहीं। अंजनी ने बताया कि वह बचनप से ही एथलीट बनना चाहती थी। उनकी रुचि खेलकूद में थी।

उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले की रहने वाली अंजनी मल्लाह स्वच्छ भारत की असली ब्रांड एम्बैस्डर हैं। उन्होंने अपने संघर्षों की बदौलत गांव में 125 टॉयलट बनवाकर महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण स्वच्छता की दिशा में बड़ा काम किया है। जिन घरों में अंजनी ने टॉयलट बनवाए उनके घर की महिलाएं घर ससुराल छोड़कर मायके नहीं जा रही हैं। टॉयलट न होने की वजह से गांव की महिलाओं को अपनानजनक और असुविधा भरी जिंदगी जीनी पड़ती है। इसे बदलने के लिए गांव की अंजनी ने सोचा और उसे साकार भी कर के दिखाया है।

अंजनी को इस लक्ष्य को हासिल करने में वक्त जरूर लगा, लेकिन उन्होंने आखिरकार सफलता प्राप्त ही कर ली। इंडिया टाइम्स की खबर के मुताबिक संतकबीरनगर जिले के मेडरीपार गांव की रहने वाली अंजनी ने प्रशासन की मदद से महिलाओं के लिए टॉयलट बनवाने में कामयाब रहीं। अंजनी ने बताया कि वह बचनप से ही एथलीट बनना चाहती थी। उनकी रुचि खेलकूद में थी। उनका बचपन उत्तराखंड में बीता लेकिन बाद में वह बस्ती आ गईं। उनके घर में टॉयलट नहीं था और जब उनकी शादी हुई तो भी उन्हें शौच के लिए खुले में जाना पड़ा। इससे उन्हें काफी असुविधा हुई और शर्मिंदगी तो खैर होती ही थी।

वह बताती हैं कि औरतों को शौच के लिए काफी सुबह तड़के घर से निकलना पड़ता था, क्योंकि उजाला होने पर लोग खेतों की ओर जाने लगते हैं और फिर टॉयलट करना काफी मुश्किल हो जाता था। इससे वे काफी आहत हुईं और घर में टॉयलट बनवाने के बारे में सोचने लगीं। लेकिन उनकी बात कोई भी सुनने को तैयार था। कोई भी नेता उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेता था और टाल देता था। उन्होंने तत्कालीन सरकार के एक मंत्री के सामने जाकर उनसे गुजारिश की लेकिन उन्होंने भी ध्यान नहीं दिया। इसके बाद वे जिले के डीएम के पास जा पहुंचीं।

तत्कालीन डीएम सरोज कुमार ने उनकी बात सुनी और उनके गांव में 75 टॉयलेट बनवाने का आदेश दे दिया। लेकिन पूरे गांव के लिए इतने टॉयलट नाकाफी थे। इसलिए उन्होंने तहसील स्तर के अधिकारियों से भी गुहार लगाई। इससे उनके मायके में भी 50 टॉयलेट बनवाने के आदेश दे दिए गए। एथलीट की वजह से अंजनी के अंदर कुछ भी कर गुजरने का जज्बा है। वह बताती हैं कि उन्होंने कम सुविधाओं में भी राष्ट्रीय स्तर की दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। इसीलिए उन्हें स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांड एम्बैस्डर बनाया गया था। आज अंजली न जाने कितनी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और काम कर रही हैं।

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