हिंदुस्तानी रितु नारायण अपने काम से अमेरिका में मचा रही हैं धूम

दो ही साल में अमेरिका में छा गया रितु नारायण का स्टार्टअप 'ZUM'

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भारत से कैलिफोर्निया (अमेरिका) में जा बसी इंजीनियर रितु नारायण ने थोड़े ही समय में एक कामयाब स्टार्टअप खड़ा कर लिया है। पिछले दो वर्षों से उनके स्टार्टअप की पूरे अमेरिका में धूम मची हुई है। उनकी राइड एंड केयर कंपनी ZUM ने आज कामकाजी अमेरिकी महिलाओं के स्कूली बच्चों को सुरक्षित और सस्ती परिवहन सेवा की सुविधा देकर कई सौ करोड़ का बिजनेस खड़ा कर लिया है।

ZUM की फाउंडर रितु नारायण, फोटो साभार ट्विटर
ZUM की फाउंडर रितु नारायण, फोटो साभार ट्विटर
रितु नारायण की राइड एंड केयर कंपनी ZUM ने आज कामकाजी अमेरिकी महिलाओं के स्कूली बच्चों को सुरक्षित और सस्ती परिवहन सेवा की सुविधा देकर कई सौ करोड़ का बिजनेस खड़ा कर लिया है। इस छात्र परिवहन सेवा की एक और विशेषता यह है कि इसमें कंपनी की ज्यादातर वर्कर महिलाएं हैं।

अमेरिका का शहर कैलिफोर्निया दुनिया का कोई दूसरा अजूबा नहीं है और न ही उसकी आबादी में रह रही कामकाजी महिलाओं की तरह ही भारतीय महानगरों की नौकरीपेशा अथवा व्यवसायी महिलाओं की पारिवारिक मुश्किलें कुछ अलग हैं। बच्चे हर परिवार में होते हैं और उनकी शिक्षा-सुरक्षा के प्रति पैरेंट्स की हर वक्त चिंताएं बनी रहती हैं। मसलन, रोजमर्रा की एक चिंता तो यही रहती है कि वह स्कूल समय से जाएं, समय से घर लौटें और इस दौरान वह उसी तरह सुरक्षित-सकुशल रहें, जैसे अपने परिजनों, घर-परिवार के बीच रहते हैं। इसी चिंता ने भारत से कैलिफोर्निया (अमेरिका) में जा बसी इंजीनियर रितु नारायण को एक इतना कामयाब बिजनेस आइडिया दे दिया कि पिछले दो वर्षों से उनके स्टार्टअप की पूरे अमेरिका में धूम मची हुई है।

रितु नारायण की राइड एंड केयर कंपनी ZUM ने आज कामकाजी अमेरिकी महिलाओं के स्कूली बच्चों को सुरक्षित और सस्ती परिवहन सेवा की सुविधा देकर कई सौ करोड़ का बिजनेस खड़ा कर लिया है। इस छात्र परिवहन सेवा की एक और विशेषता यह है कि इसमें कंपनी की ज्यादातर वर्कर महिलाएं हैं। रितु नारायण इस समय बच्चों के लिए ऑन-डिमांड सवारी और देखभाल करने वाली कंपनी ZUM की संस्थापक सीईओ हैं।

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रितु अपनी टीम के साथ
रितु अपनी टीम के साथ

बड़े काम, बड़ी सफलता की शुरुआत सबसे पहले किसी व्यक्ति की खुद की सोच से होती है। ऐसा ही हुआ रितु नारायण के साथ। जब अमेरिका शिफ्ट हुईं, कामकाजी महिला होने के नाते उन्हें सबसे पहले ड्यूटी के दौरान समय निकालकर अपने दोनो बच्चों को स्कूल से पिकअप करने की कठिनाई से जूझना पड़ा। जब रोजमर्रा वह इस समस्या का सामना करने लगीं तो एक दिन उनके मन में अचानक खयाल आया कि यह दिक्कत तो अमेरिका की बाकी कामकाजी महिलाएं भी उठा रही होंगी। क्या ऐसी कोई परिवहन सेवा बच्चों के लिए शुरू नहीं की जा सकती है, जो नौकरी पेशा औरतों के स्कूली बच्चों को समय से ले जाए और सुरक्षित-सकुल रोज घर छोड़ जाए! इसके बाद वह इस दिशा में सक्रिय हो गईं। रितु ने अपने तकनीकी अनुभवों का फायदा उठाते हुए सिलिकॉन वैली में स्कूली बच्चों के लिए एक तेज़ तकनीक करियर प्रबंधन वाली ZUM कंपनी बनाई। गौरतलब है कि रितु दिल्ली से कम्प्यूटर साइंस में स्नातक होने के साथ ही ईबे, याहू, ओरेकल और आईबीएम जैसी कंपनियों में लगभग 15 साल तक काम कर चुकी हैं।

स्टार्टअप के समय रितु नारायण का मानना था कि हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा सेवा-प्रदाता चाहते हैं। वह ऐसा हो कि बच्चे को, खासकर उनके स्कूली बच्चे को घर से बाहर किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। स्कूल की जिम्मेदारी वहां के प्रबंधन से पूरी हो जाती है लेकिन घर से स्कूल के बीच का समय परिवहन व्यवस्थाओं के हवाले होता है, जिसकी अपेक्षित गारंटी न मिलना अभिभावक की एक बड़ी चिंता होती है। बच्चे अभिभावकों के भविष्य का पहला सपना होते हैं। वह उन पर कुछ भी न्योछावर करने के लिए तैयार रहते हैं। उनकी उड़ान, उनके करियर, उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए वह अपने बूते पर धन-सम्पदा को आड़े नहीं आने देते हैं।

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रितु अपने दो भाईयों के साथ, जिनके साथ मिलकर रितु ने ZUM शुरू की है
रितु अपने दो भाईयों के साथ, जिनके साथ मिलकर रितु ने ZUM शुरू की है

ZUM शुरू करने से पहले रितु नारायण ईबे में काम कर रही थीं। उन्हें अपने स्कूली बच्चों की ठीक से देखभाल करने में तरह तरह की कठिनाइयां आड़े आ रही थीं। उनकी जिम्मेदारी वश वह न ठीक से नौकरी कर पा रही थीं, न उनकी अपेक्षित ढंग से देखभाल। जिस अपने बच्चों के लिए उन्हें किसी पूर्णकालिक मददगार की जरूरत महसूस हो रही थी, उन्हें लगा कि उसी तरह हर कामकाजी मां को जूझना पड़ रहा होगा। इतना ही नहीं, जब उन्होंने बहुत छोटे स्तर पर वर्ष 2016 में ZUM की पिकअप एंड ड्रॉप सेवा शुरू की, अनेक स्कूल भी उनके संपर्क में आते गए और वहां के प्रबंधन को भी ZUM की सुविधा कारगर और फायदे की भी लगी। इस तरह स्कूल भी अपने बच्चों के परिवहन के लिए उनकी कंपनी से जुड़ते चले गए। 

चूंकि कंपनी का ध्यान वर्किंग वूमेन पर था, इसलिए रितु को लगा कि इस पेशे में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को ही काम पर रखा जाए। इस तरह ZUM में ज्यादातर महिलाओं को नौकरी पर रखा गया। कंपनी में मुश्किल से दस-पांच परसेंट कर्मी ही जेंट्स हैं। कंपनी ने सेवा शुरू करते समय ही खास तौर से दो बातों पर विशेष ध्यान रखा, एक तो बच्चे को रास्ते में कम से कम वक्त जाए, साथ ही आर्थिक दृष्टि से अभिभावकों के लिए उनकी परिवहन सेवा सबसे सस्ती, सुविधाजनक और बच्चों के लिए सुखद हो। यह दायित्व ZUM की महिला कर्मी बखूबी पूरी सफलता के साथ निभाने लगीं। जब ZUM का काम-काज चल निकला तो एक बार रितु नारायण के दिमाग में ये बात भी आई कि अमेरिका में उनसे पहले और किसी का इस ओर ध्यान क्यों नहीं गया!

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बच्चों की देखभाल के लिए अक्सर अलग-अलग तमाम स्टॉपेज और अतिरिक्त ऐड-ऑन की आवश्यकता होती है। जैसे, पिकअप, ड्रॉप डाउन, चाइल्डकैअर, संरक्षण आदि की जिम्मेदारियां। इस लिहाज से ZUM एक अलग तरह की नए मॉडल वाली कंपनी बनी। इसमें खास तौर से बच्चों के परिवारों को सबसे पहले भरोसे में लिया गया। फिर जब कंपनी की सेवा उनके विश्वास पर खरी उतरती गई, बिजनेस का अपने आप विस्तार होता गया।

स्‍पार्क कैपिटल के जनरल पार्टनर नाबील हयात के दो बच्चे अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे। वह ZUM की सेवा लेने लगे और एक दिन प्रभावित होकर वह स्वयं रितु नारायण की इस कंपनी के सबसे बड़े निवेशक बन गए। इस वक्त ZUM की सेवाएं लेने से कैलिफोर्नियां के लगभग एक हजार स्कूलों को साठ-सत्तर करोड़ रुपए की बचत हो रही है। ZUM की नब्बे फीसदी ड्राइवर महिलाएं बच्चों का उनकी मां की तरह ध्यान रखती हैं। इस उचित देखभाल की जानकारी समय समय पर अभिभावकों को उनके स्वयं के बच्चों से भी मिलती रहती है। ZUM प्रबंधन ने पिछले साल लगभग 55 लाख डॉलर इकट्ठा किया था और अब 123 करोड़ रुपए से कंपनी की दूसरी चेन (बी सिरीज) शुरू हो रही है। अब कंपनी कैलिफोर्नियां के अलावा अन्य बीस प्रमुख शहरों में अपनी सेवा का विस्तार करने जा रही है।

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परिवार के साथ रितु, फोटो साभार फेसबुक
परिवार के साथ रितु, फोटो साभार फेसबुक

रितु नारायण बताती है कि ट्रांसेक्शनल मॉडल पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उनका मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं और प्रदाताओं के साथ मजबूत संबंध बनाना है। आज ZUM के पास एक वफादार ग्राहक आधार है। हम कंपनी से जुड़े परिवारों को विश्वसनीय और सतत देखभाल वाली सेवा प्रदान करते हैं। वह अपने कर्मियों को ड्राइवर या कर्मचारी नहीं बल्कि उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर मानती हैं जो कंपनी के मिशन में विश्वास करते हैं और ऐसे समुदाय का निर्माण करते हैं, जो विश्वास, सम्मान और उद्देश्य की संस्कृति को महत्व देता है। यही सब सोचकर अपनी नौकरी छोड़ने से पहले वह स्टैनफोर्ड बिजनेस स्कूल चली गईं।

स्टैनफोर्ड बिजनेस स्कूल में रितु ने डिजाइन थिंकिंग, लीन लॉन्पपैड और उद्यमिता का प्रशिक्षण प्राप्त किया। ZUM की ड्यूटी में तीन विशेष बातें हैं। पूरे वर्ष व्यस्त परिवारों को बच्चों की तरफ से निश्चिंत रखना, उनकी समयबद्धता का लक्ष्य पूरा करना और बच्चों की सुविधाओं के साथ भावनाओं का भी पूरा-पूरा ध्यान रखना। उनके बिजनेस के विस्तार में ऐप से विशेष तकनीकी सहयोग मिल रहा है। चाइल्डकैअर में उनकी कंपनी 'ऑन-डिमांड' बच्चे की देखभाल के साथ ही उनके सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्या रखती है। बच्चे पूरी एहतियात के साथ लिए जाते हैं। इससे पहले जांच प्रक्रिया में फिंगरप्रिंट, ट्रस्टलाइन प्रमाणीकरण, डीएमवी रिकॉर्ड की जांच, बीमा पुष्टीकरण और व्यक्तिगत साक्षात्कार शामिल हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने में दो-तीन सप्ताह लग जाते हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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