चैन से सोना है तो घर ले आइए ‘इन्विज़बल बेड’


छोटे घरों में हिट, ‘इन्विज़बल बेड’ हर घर में फिट

छोटे घर के लिए बड़ा बेड

2013 में लांच किया ‘इन्विज़बल बेड’

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आज की दौड़ती भागती दुनिया में लोगों को अपने रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। ऐसे में उनके सामने दिक्कत आती है रहने की और दूसरे सामान की। टीना नाज़ को भी अपना शहर छोड़ दूसरे शहर आना पड़ा। इस वजह से वो एक बेड रुम वाले घर में रहती हैं। 21वीं सदी की होने के कारण उनकी सोच भी अलग है उनके पास अपना सामान तो ही साथ ही ढेर सारी किताबें, संगीत से जुड़ा सामान, किचन का सामान और काफी कुछ। वो दूसरे शहरी लोगों की तरह फिटनेस पर खास ध्यान देती हैं। इसलिए वो हर रोज योग करती हैं। इसके लिए उनको कुछ दिनों पहले तक घर में रखी टेबल, कुर्सियों को हटाकर दूसरी जगह पर रखना पड़ता था। लेकिन अब ये बात पुरानी हो गई क्योंकि अब उनके हाथ लग गया है एक इन्विज़बल बेड। चौंकिए मत! ये एक ऐसा फर्नीचर है जिसमें बिस्तर, टेबल और सेल्फ सब कुछ है और इसकी खास बात ये है कि जब इनकी जरूरत नहीं होती तो ये दीवार में बदल जाता है। हाइड्रोलिक्स असिस्ट सिस्टम लिफ्ट के जरिये इसे आसानी से खोला या बंद किया जा सकता है।

कहते हैं जरूरत ही इंसान को कुछ नया करने का मौका देती है। प्रशांत हविनहल और किरण केजी ने भी जगह बचाने के लिए इन्विज़बल बेड को डिजाइन किया है। दरअसल ये लोग बेंगलौर में 360 वर्गफीट वाले एक अपार्टमेंट में रहते थे। जगह कम होने के कारण इनका फर्नीचर सही जगह पर नहीं आ पाता था। जिसके कारण इऩ लोगों ने एक ऐसा बेड डिजाइन किया जिसको दीवार पर भी खड़ा किया जा सके। पश्चिमी देशों में इसे मरफी बेड भी कहते हैं। इसके साथ साथ इन लोगों ने दीवार पर फिट होने वाली टेबल को भी डिजाइन किया। जब इनके दोस्तों और पडोसियों ने इनके काम को देखा तो सब इनकी तारीफ करने लगे। जिसके बाद इन्होने इस काम को करने का फैसला लिया।

प्रशांत हविनहल और किरण केजी
प्रशांत हविनहल और किरण केजी

इन लोगों के काम की शुरूआत बेंगलौर के केआर मॉर्केट की गलियों से शुरू हुई। वहां मौजूद कारपेंटर इनके बताये डिजाइन को समझ नहीं पाते थे। इसलिए इन लोगों ने तय किया कि ये कारपेंटर की जगह फैब्रिकैटर से बात करेंगे। संयोग से उनको एक फैब्रिकैटर मिल भी गया जिसे ऐसे कामों में महारत हासिल थी हालांकि वो ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन इस इंडस्ट्री में वो बरसों काम कर चुका था। प्रशांत का कहना है कि अगर उसे सही जानकारी दी जाए तो वो कुछ भी कर सकता था।

शहरी भारत में आधुनिक जीवन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में रियल एस्टेट के दाम आसमान से बातें कर रहे हैं वहीं लोग मकानों में जगह को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। खासतौर से युवा लोग जो आलीशान घरों में रहने के लिए ज्यादा पैसा खर्च नहीं कर सकते। तो दूसरी ओर आज के दौर में जितने भी अपार्टमेंट बन रहे हैं वो एक दूसरे से इतने चिपके हुए हैं कि कोई अपने घर की खिड़की खोले तो वो दूसरे के घर में खुलती है। ऐसे में इसका सिर्फ एक ही इलाज है और वो है ज्यादा जगह बनाने के लिए अपने समान को मल्टी फंक्शनल बनाना। शुरूआत में 2 बेडरुम फ्लैट 1200 से 1400 वर्गफुट में बनते थे लेकिन धीरे धीरे इनकी जगहों में कमी आती गई और ये 500 से 800 वर्गफुट में बनने लगे। ऐसे में मकान तो छोटे होते गए लेकिन फर्नीचर जितना बड़ा पहले होता था उतना ही बड़ा अब भी है। लोग आज भी पारंपरिक फर्नीचर को ही अपने छोटे से घर में इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसलिए इन लोगों ने इस दिक्कत को दूर करने का फैसला लिया।

इन लोगों ने अपने काम की शुरूआत एक फैब्रिकैटर को अपने साथ जोड़कर की और किराये पर एक जगह को लिया जहां पर मॉड्यूलर फर्नीचर की जानकारी साझा की। शुरूआत में इनको हर नये काम की तरह कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे धीरे उनकी हर मुश्किल आसान होती गई। कई परीक्षणों के बाद इन्विज़बल बेड को साल 2013 में लांच कर दिया गया। इसका निर्माण इन लोगों ने खुद किया ताकि उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता ना हो। बेड के लिए ग्राहक अक्सर आते थे लेकिन उनको कुछ आशंकाएं रहती थी। जैसे ग्राहक ये जानना चाहते थे कि क्या ये आरामदायक होगा? ये कितने दिनों तक चलेगा? क्या होगा जब ये बेड खुद ही फोल्ड हो जाए? क्या इसमें कोई फंस भी सकता है? तब प्रशांत अपने ग्राहकों को भरोसा देते कि उनका ये उत्पाद 20 हजार बार परीक्षण किया जा चुका है। इसके अलावा इन लोगों ने अपने सभी उत्पादों पर 3 साल की वारंटी भी दी। जिसका अब तक फर्नीचर के बाजार में चलन नहीं था। इन लोगों के मुताबिक शुरूआती दिक्कतों के बाद इन लोगों का काम अगस्त, 2013 से चल निकला और हर महिने ये लोग दोगुने बेड बेचने लगे। एक स्थिति ये आ गई कि इन लोगों को चेन्नई, पांडिचेरी और बेंगलौर से इन्विज़बल बेड की वेबसाइट ऑर्डर आने लगे।

प्रशांत के मुताबिक फर्नीचर के बाजार में कई बड़े लीडर हैं और इनका किसी के साथ कोई मुकाबला नहीं है। इनका कहना है कि इन लोगों का ध्यान बहुआयामी फर्नीचर पर है। इन लोगों के ग्राहक वो हैं जो अपने घर की जगहों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहते हैं। इन लोगों के मुताबिक ऑनलाइन बाजार में Urban Ladder, Fab Furnish जैसे कई कोरोबारी हैं लेकिन ये लोग शुरू से अंत तक टिके रहेंगे। उत्पाद बनाने से लेकर उसे बेचने तक चाहे वो ऑनलाइन बेचा जाए या ऑफलाइन बेचा जाए। इनका कहना है कि अगर ये सिर्फ बेंगलौर जैसे शहर में फर्नीचर के बाजार में 5 प्रतिशत की भी हिस्सेदारी ले लेते हैं तो ये करीब 100 करोड़ रुपये के बराबर होगा। दक्षिण भारत में पैर जमाने के बाद अब इन लोगों की नजर देश के दूसरे हिस्सों पर है। अगले पांच सालों में इनका लक्ष्य 21 शहरों तक इन्विज़बल बेड को पहुंचाना है। इसलिए इनको तलाश है निवेशकों की।

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