'तंदरुस्त' पर जाएं और घर बैठे मज़ा लें स्वस्थ भोजन का...

बैंगलोर के फिटनेसप्रेमी दो युवाओं पुष्पेश दत्त और सुधांशु शर्मा ने दिसंबर 2014 में की शुरुआत‘तंदरुस्त’ अपने उपभोक्ताओं को प्रतिदिन नाश्ता, लंच और स्नैक्स के 4 भोजन करवाता है उपलब्धमापे हुए पोषण और गिनी हुई कैलोरियों से परिपूर्ण होता है इनके द्वारा परोसा हुआ स्वस्थ भोजनआने वाले दिनों में बैंगलोर के अलावा देश के अन्य शहरों में भी पांव पसारने का है इरादा

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दिसंबर 2014 में फिटनेस के प्रति जुनूनी दो युवाओ पुष्पेश दत्त और सुधांशु शर्मा द्वारा प्रारंभ किया गया Tandurust (तंदरुस्त) बैंगलोर में रह रहे स्वस्थ खाने के शौकीनों के विभिन्न समूहों को मापे हुए पोषण और गिनी हुई कैलोरियों से भरपूर भोजन उपलब्ध करवा रहा है।

इस जोड़ी का यह मानना है कि एक परम सुखी जीवन का आनंद वही व्यक्ति ले सकता है जो जो एक स्वस्थ मस्तिष्क और शरीर का स्वामी हो। प्रारंभ में इन दोनों में मिलकर अपने कुछ मित्रों और सहयोगियों के लिये कुछ प्रायेगिक प्रदर्शन किये और कुछ समय बाद ‘तंदरुस्त’ के बीटा संस्करण के साथ सामने आए।

‘तंदरुस्त’ की नींव रखने से पहले सुधांशु कृषि से संबंधित उत्पादों को निर्यात करने वाले एक स्टार्टअप की सह-स्थापना कर चुके थे। इससे पहले वे एम्फेसिस के साथ व्यापार विश्लेषक के रूप में कार्यरत थे। इस उद्यम की स्थापना से पहले पुष्पेश एचएसबीसी के साथ इक्विटी अनुसंधान विश्लेषक के रूप में काम कर रहे थे।

अपने साथ जुड़े उपभोक्ताओं को नाश्ते, लंच और स्नैक्स में स्वस्थ भोजन उपलब्ध करवाने की दृष्टि से पुष्पेश ने ‘तंदरुस्त’ के ब्रांड नाम के साथ अपना उद्यम प्रारंभ करने से पहले 6 महीने की अवधि के दौरान व्यंजनों की एक पूरी श्रृंखला विकसित की।

पुष्पेश दत्त और सुधांशु शर्मा
पुष्पेश दत्त और सुधांशु शर्मा
पुष्पेश कहते हैं, ‘‘आपको अधिकतम लाभ लेने के लिये सही पोषण को अपनी रोजमर्रा की जीवनशैली में समाहित करना पड़ता है। मैंने पोषण के बारे में पर्याप्त ज्ञान प्राप्त किया और संतुलित आहार और व्यायाम पर अपना ध्यान केंद्रित कर मात्र 3 महीनों में 12 किलो वजन कम किया।"

सुधांशु और पुष्पेश दोनों ने इन उद्यम को शुरू करने के लिये अपने निजी संसाधनों के अलावा मित्रों और परिवार से 13 लाख रुपये का निवेश किया है।

‘तंदरुस्त’ अपने उपभोक्ताओं को दैनिक रूप से प्रचलित 6 में से चार भोजन उपलब्ध करवाने का प्रयास करता है और प्रतिदिन करीब 170 से 180 भोजन उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाता है। इनके उपभोक्ताओं में एचएसबीसी, गोल्डमैन सैच्स, किस्को, नारायण हृदयाला इत्यादि कई बड़े और जाने-माने नाम शामिल हैं। इन्हें खाने के लिये दोबारा मिलने वाले आदेशों की संचया लगभग 80 प्रतिशत है।

‘तंदरुस्त’ ने अपने पहले 7 महीनों में 10 हजार से भी अधिक आॅर्डर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह खाद्यटेक स्टार्टअप सदस्यता आधारित माॅडल पर संचालित होती है जहां उपभोक्ता साप्ताहित या मासिक भोजन योजना के लिये सहमत होता है और जिसमें नाश्ते, लंच और स्नैक्स की व्यवस्था होती है। इनके प्रति भोजन की कीमत 60 रुपये से लेकर 120 रुपये के बीच रहती है।

सुधांशु के अनुसार, ‘‘शरीर के मेटाबोलिस्म को उच्च स्तर पर बनाए रखने के लिये व्यक्ति को अपने दैनिक भोजन में कम से कम 6 संतुलित भोजनों का समावेश करना चाहिये। पोषण से संबंधित ज्ञान की कमी, पौष्टिक भोजन की कमी और कई बार समय की कमी के चलते कई लोग अपने आहार को प्लान नहीं कर पाते हैं। हम एक केंद्रीयकृत रसोईघर में काम करते हैं और निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने और गुणवत्ता बनाए रखने के लिये व्यंजनों से संबंधित प्रक्रिया कागजातों का उपयोग करते हैं।’’

इसके अलावा यह खाद्यटेक स्टार्टअप फेसबुक पेज, वेबसाइट और क्विज़ और ईवेंटों जैसी गतिविधियों के माध्यम से पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में ज्ञान का प्रचार-प्रसार करते रहते हें।

पुष्पेश कहते हैं, ‘‘अधिकतर लोग पिज्जा इत्यादि जैसी अस्वास्थ्यकर खाद्य वस्तुओं पर पैसा खर्च करने को तैयार रहते हैं लेकिन पोषण मापकर तैयार किये हुए स्वस्थ भोजन के लिये 20 रुपये अतिरिक्त खर्च करने से पहले कई बार सोचते हैं। इसका सीधा से मतलब यह है कि ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है जो खाने की स्वस्थ शैलियों को आत्मसात करने के बारे में सक्रिय रूप से विचार करते हों। हमारा प्रयास लोगों को इस बात का अहसास करवाना है कि वे अपने दैनिक भोजन के लिये कुछ अतिरिक्त पैसा खर्च करके खुद को मोटापे, मधुमेह, हृदयरोगों इत्यादि से बचा सकने के अलावा भविष्य के दिनों में चिकित्सा व्यय के रूप में खर्च होने वाली एक मोटी रकम को बचा सकते हैं।’’

वर्ष 2016 तक भारत में खाद्य उद्योग के 18 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा छूने का अनुमान जताया जा रहा है। काम के बोझ से दबे हुए भारतीय उपभोक्तों के स्वस्थ भोजन को चुनने का अनुमान है लेकिन माना यह जा रहा है कि वे ऐसे भोजन को अपने घर या कार्यस्थल पर पर ही पाना चाहेंगे और उनकी यही जरूरत आॅनलाइन खाद्य स्टार्टअप्स के लिये नए अवसरों के द्वार खोलती है।

इसके अलावा एक केंद्रीयकृत रसोईघर का सेटअप एक प्रभावी लागत वाली परिसंपत्ति का माॅडल है जो इस अभियान को अधिक कारगर बनाने के अवसर प्रदान करने के अलावा भोजन की गुणवत्ता को भी बनाए रखने में मदद करता है।

इसके बावजूद कई ऐसी मुश्किल चुनौतियां हैं जिनकी तरफ इस उद्योग को ध्यान देना होगा। चूंकि खाद्य पदार्थ प्राकृतिक माहौल में बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं ऐसे में लाॅजिस्टिक तंत्र के बहुत तेज और कुशल होने की आवश्यकता है। अपनी तरफ से पूरे प्रयास करने के बाद भी ई-रेस्टोरेंट ई-काॅमर्स की तरह कीमतों को काबू में नहीं ला सके हैं ऐसे में इन खाद्यटेक खिलाडि़यों को ईंट और गारे से बने रेस्टोरेंटों से अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

आने वाले दिनों में ‘तंदरुस्त’ की योजना बैंगलोर और अन्य शहरों में विस्तृत रसोईघरों की स्थापना करने की है जिसमें से वर्ष 2017 में दो रसोई और वर्ष 2018 में चार रसोई जोड़ना चाहते हैं। इसके अलावा आने वाले एक वर्ष में ये प्रतिदिन 1000 भोजन उपलब्ध करवाना चाहते हैं।

सुधांशु आगे कहते हैं, ‘‘हम एक परिववर्तनकारी उद्यम का निर्माण करना चाहते हैं जो लोगों को संतुलित और पौष्टिक भोजन के विकल्प उपलब्ध करवाते हुए उन्हें एक स्वस्थ और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने के लिये प्रेरित कर सके। हम लोगों के बीच स्वस्थ भोजन उपलब्ध करवाने के अलावा पोषण की महत्ता के बारे में जागरुकता फैलाने का काम भी सफलतापूर्वक कर रहे हैं।’’

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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