अहमदाबाद के इस वर्ल्ड क्लास विद्या मंदिर में गरीब बच्चों की पढ़ाई होती है मुफ्त

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इस सिस्टम को बदलने के लिए अहमदाबाद में एक ऐसा स्कूल चलता है जहां गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा, कपड़े और भोजन की व्यवस्ता की जाती है। स्कूल का मकसद गरीबों के बच्चों को मुफ्त में अच्छी शिक्षा प्रदान करना है।

अडाणी विद्या मंदिर
अडाणी विद्या मंदिर
स्कूल में बच्चों को एडमिशन देने से पहले एक छोटा सा टेस्ट लिया जाता है, ताकि देखा जा सके कि बच्चे का पढ़ने में मन लगता है या नहीं। इसके अलावा बच्चों के अभिभावकों की आय को भी ध्यान में रखा जाता है। 

बच्चों को डिजिटलाइज्ड उपकरणों और कंप्यूटर के जरिए शिक्षा दी जाती है। ब्लैकबोर्ड की जगह डिजिटल बोर्ड और प्रोजेक्टर लगे हुए हैं। कंप्यूटर लैब की भी व्यवस्था है।

कहने को तो देश में शिक्षा हासिल करना हर किसी का मूल अधिकार है, लेकिन शिक्षा का अधिकार सिर्फ संविधान और कानून के दायरे में ही सीमित है। आज हकीकत कुछ और है। देश में सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों की हालत बद से बदतर होती चली जा रही है। वहीं प्राइवेट स्कूलों की फीस इतनी बढ़ चुकी है कि कोई भी आम इंसान वहां अपने बच्चों को पढ़ाने का सपना भी नहीं देख सकता। इस सिस्टम को बदलने के लिए अहमदाबाद में एक ऐसा स्कूल चलता है जहां गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा, कपड़े और भोजन की व्यवस्ता की जाती है। स्कूल का मकसद गरीबों के बच्चों को मुफ्त में अच्छी शिक्षा प्रदान करना है।

देश के मशहूर उद्योगपति गौतम अडाणी द्वारा इस स्कूल का संचालन किया जाता है। गौतम की पत्नी प्रीति अडाणी इस स्कूल का कामकाज देखती हैं। स्कूल में बच्चों को एडमिशन देने से पहले एक छोटा सा टेस्ट लिया जाता है, ताकि देखा जा सके कि बच्चे का पढ़ने में मन लगता है या नहीं। इसके अलावा बच्चों के अभिभावकों की आय को भी ध्यान में रखा जाता है। यहां उन्हीं के बच्चों को एडमिशन मिलता है जिनका सालाना आय डेढ़ लाख से कम होती है। यानी ये स्कूल सिर्फ गरीबों के लिए है। स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को फ्री में कॉपी, किताबें, लन्च, स्कूल ड्रेस और आने-जाने की सुविधा भी मुफ्त प्रदान करवाई जाती है।

अडाणी स्कूल के बच्चे
अडाणी स्कूल के बच्चे

इस स्कूल की स्थापना 2008 में हुई थी। सीबीएससी माध्यम से चलने वाले इस स्कूल में लगभग 1300 बच्चे पढ़ाई करते हैं। यहां कक्षा तीन से लेकर बारहवीं तक की पढ़ाई होती है। सुविधाओं के मामले में ये किसी भी बड़े स्कूल से कम नहीं है। बच्चों को डिजिटलाइज्ड उपकरणों और कंप्यूटर के जरिए शिक्षा दी जाती है। ब्लैकबोर्ड की जगह डिजिटल बोर्ड और प्रोजेक्टर लगे हुए हैं। कंप्यूटर लैब की भी व्यवस्था है। यहां के बच्चों को खेलकूद जैसा स्किल के अलावा सेल्फ डिफेंस की टेक्निक सिखाई जाती है, जिससे वे आत्मरक्षा कर सकें।

इंडिया टीवी से बात करते हुए स्कूल में पढ़ने वाले अमन सैयद ने कहा, 'यह स्कूल बाकी सभी प्राइवेट स्कूलों से कई मायनों में अलग है। यहां दिन में दो बार प्रार्थना होती है। एक बार सुबह स्कूल आने पर और दूसरी बार शाम को स्कूल से घर जाने पर। इससे छात्रों के भीतर अच्छे चरित्र का निर्माण होता है और वे अनुशासन का पालन करते हैं।' लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल खोलने का मकसद गरीब छात्रों को फ्री में क्वॉलिटी एजुकेशन प्रोवाइड करना था। यहां पर कई सारे बच्चे ऐसे भी हैं जिनके सर से पिता का साया उठ चुका है और उनकी मांएं मजदूरी करके रोजी-रोटी चलाती हैं।

बच्चों के लिए कंप्यूटर लैब
बच्चों के लिए कंप्यूटर लैब

प्रीति अडाणी बताती हैं, 'हमारे यहां पढ़ाने वाले अध्यापक पूरी तरह से बच्चों के विकास को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हम एक्सपेरिमेंटल तरीके से किसी भी चीज को सिखाने का प्रयास करते हैं। हम नहीं चाहते की बच्चों की पढ़ाई किताबों तक सिमट कर रह जाए। इसके अलावा चरित्र का निर्माण भी एक अहम चीज है जिस पर हमारे पाठ्यक्रम में खास ध्यान दिया जाता है। पूरी दुनिया में इन दिनों नैतिकता का पतन होता जा रहा है। हमारी कोशिश है कि बच्चों में उन मूल्यों को भरने का प्रयास किया जाए।'

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