सफलता के 7 टिप्स, बनाये नये उद्यमियों को सुपरहिट

क्या करें, क्या ना करें...वक्त का कैसे करें इस्तेमाल...दिनचर्या में कैसे लाएँ बदलाव...

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अक्सर कई लोग सुबह 10 बजे ऑफिस पहुंच कर सबसे पहले ई-मेल देखते हैं, उसके बाद मीटिंग में व्यस्त हो जाते हैं और अपने साथियों से गपशप करने के बाद फिर से ई-मेल या फेसबुक में वक्त बिताते हैं। इस दौरान वो थोड़ा बहुत काम भी कर लेते हैं। तब तक वक्त लंच का हो जाता है। कुछ ऐसा ही सिलसिला लंच के बाद भी चलता है। लंच के बाद थोड़ा बहुत काम, ई-मेल देखना और शाम 5:30 बजे का इंतजार घर जाने के लिए होता है।

जब कोई नौकरी छोड़ अपना उद्यम शुरू करता है,  यह दिनचर्या पूरी तरह तब बदल जाती है । हर उद्यमी की अलग कहानी होती है, लेकिन उनमें कुछ चीजें एक समान होती हैं जो उनको भीड़ से अलग रखती हैं।

वो जानते हैं उनको क्या करना है

कोई भी उद्यमी अपने दिन की शुरूआत बेतरतीब तरीके से शुरू नहीं करता। उसे मालूम होता है कि उसे दिन भर में क्या करना है। उसके पास छोटे वक्त के लिए योजनाएँ और लंबे समय के लक्ष्य के बारे में जानकारी होती है। इनको पूरा करने के लिए वो निष्ठा से अपने काम में जुट जाता है। ज्यादातर उद्यमी दिन भर के कामों की सूची बना लेते हैं और पिछले सप्ताह किये गए काम के बारे में फिर से जानकारी लेते हैं। इतना ही नहीं सोने से पहले अगले दिन करने वाले काम की योजना बना लेते हैं। इसलिए वो तय कर लेते हैं कि सुबह उनको कब उठना है।

काम को प्राथमिकता

उद्यमियों के लिए सिर्फ काम की सूची बना लेना ही काफी नहीं होता, उन्हें अच्छी तरह मालूम होता है कि उनको दिन भर में क्या काम नहीं करना है। यूँ तो दो तरह के काम जरूरी और महत्वपूर्ण होते हैं । जरूरी काम के लिए उद्यमी को ज्यादा ध्यान देना होता है, लेकिन हर काम महत्वपूर्ण नहीं होता। उदाहरण के लिए टेलिफोन कंपनी के कॉल सेंटर में पिछले महिने ज्यादा बिल की शिकायत करना जरूरी नहीं होता है। उद्यमी सबसे पहले महत्वपूर्ण चीजों का निपटारा करता है। इसके बाद वो दूसरे कामों को निपटाता है। कोई भी उद्यमी 80/20 के नियम को मानता है इसमें 80 प्रतिशत उत्पादकता होती है जबकि 20 प्रतिशत काम और वो इस चीज को करने में खासे माहिर होते हैं।

मल्टी टास्किंग

ज्यादातर उद्यमी किसी खास क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं, लेकिन उनको दूसरे क्षेत्रों में भी उतना ही अच्छा बनना होता है। किसी भी उद्यमी के लिए सीईओ का मतलब चीफ एवरीथींग ऑफिसर होता है। उद्यमी को एक अच्छा प्रोग्रामर होना चाहिए, जो कई तरह के काम करने में झिझके नहीं। फिर चाहे बात परीक्षण, डिजाइन, विपणन, बिक्री, ग्राहक सहायता, काम पर लोगों को रखने, सेल्स और यहां तक कि कुर्सियों की सफाई की हो। जैसे ही संस्थान का विकास होता है उद्यमी हर क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ रखता है, लेकिन उसे सारे कामों की जानकारी होनी चाहिए।

काम पर विश्वास

उद्यमी कभी भी सफलता पाने के लिए छोटे रास्ते को नहीं तलाशते। वो अपने काम से प्यार करते हैं और उस पर अपना 100 प्रतिशत खर्च कर देते हैं। वो भगवान से लॉटरी जीतने में मदद नहीं मांगते।

पढ़ाई, पढ़ाई, पढ़ाई

उद्यमी सिर्फ मजे के लिए नहीं पढ़ते, बल्कि सीखने के लिए पढ़ते हैं। ताकि उनके जीवन को अलग दिशा मिल सके। उद्यमी किसी की जीवनी, उद्यमशीलता, आध्यात्मिकता, मानव मनोविज्ञान और अपने काम से जुड़े बहुत सारे ब्लॉग पढ़ते हैं। इसके अलावा वो बहुत सारी पत्रिकाओं के अलावा हर रोज अखबार पर भी नजर डालते हैं।

टीवी नहीं देखते

ये वो चीज़ है जिसे ज्यादातर उद्यमी करते हैं। वो अपना समय टीवी देखने में बर्बाद नहीं करते। उद्यमी इसकी जगह पिक्चर या डॉक्यूमेंट्री देखने में अपना वक्त गुजारते हैं। उनको टीवी के रिमोट से दूर रहना पसंद होता है।

अच्छे से सोना

कोई भी उद्यमी अपनी नींद से समझौता नहीं करता। ये तथ्य किसी से छुपा नहीं है कि रात में अच्छी नींद स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होती है। कई बार उद्यमी बताते हैं कि कई बार अपने काम के कारण उनकी रातों की नींद गायब हो जाती थी, लेकिन धीरे धीरे उन्होने इस पर काबू पाना सीख लिया। तभी तो कहते हैं कि स्वस्थ्य दिमाग स्वस्थ्य शरीर में ही निवास करता है।