अरबपति बिज़नेसमैन दिव्यांक तुराखिया के स्टार्टअप्स को ‘फ़र्श से अर्श’ तक तक पहुंचाने के नुस्ख़े 

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 दिव्यांक ने बिज़नेस को स्थापित करने और फिर उसे बढ़ाने के लिए किन-किन चीज़ों की ज़रूरत होती है, इस पर विस्तार से जानकारी दी और कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया। आइए जानते हैं, भारतीय स्टार्टअप्स के प्रति दिव्यांक के नज़रिए और सुझावों के बारे में...

आपको बता दें कि दिव्यांक एक युवा अरबपति बिज़नेसमैन हैं, जिन्होंने बूटस्ट्रैप्ड फ़ंडिंग से अपने अलग-अलग वेंचर्स की शुरुआत की और उन्हें सफलता के उस मुक़ाम तक पहुंचाया कि वे सभी बाक़ी कंपनियों के लिए एक मिसाल बन गए।

आज हम आपको सामने टेक स्पार्क्स इवेंट में अरबपति दिव्यांक तुराखिया और श्रद्धा शर्मा के बीच हुई बातचीत के कुछ अंश पेश करने जा रहे हैं। आपको बता दें कि दिव्यांक एक युवा अरबपति बिज़नेसमैन हैं, जिन्होंने बूटस्ट्रैप्ड फ़ंडिंग से अपने अलग-अलग वेंचर्स की शुरुआत की और उन्हें सफलता के उस मुक़ाम तक पहुंचाया कि वे सभी बाक़ी कंपनियों के लिए एक मिसाल बन गए।

दिव्यांक और उनके भाई भाविन अपनी टेक कंपनी की बदौलत 2016 में ही भारत के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हुए। इस कंपनी की शुरुआत उन्होंने तब की थी, जब वे टीनेज (किशोरावस्था) में थे। दिव्यांक, बार्कले द्वारा जारी की गई स्टार्टअप फ़ाउंडर्स की हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2018 में भी शीर्ष पर थे। दिव्यांक ने बिज़नेस को स्थापित करने और फिर उसे बढ़ाने के लिए किन-किन चीज़ों की ज़रूरत होती है, इस पर विस्तार से जानकारी दी और कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया। आइए जानते हैं, भारतीय स्टार्टअप्स के प्रति दिव्यांक के नज़रिए और सुझावों के बारे में...

स्टार्टअप्स और फ़ंडिंग के बारे में आपकी क्या राय है?

अलग-अलग क़िस्म के व्यवसायों के लिए अलग-अलग तरह की फ़ंडिंग की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा, "बहुत से ऐसे व्यवसाय होते हैं, जिन्हें शुरुआत से ही अच्छी फ़ंडिंग की ज़रूरत होती है और कुछ ऐसे होते हैं, जिन्हें कुछ वक़्त बाद। कुछ व्यवसाय तो इस तरह के भी होते हैं, जिन्हें फ़ंडिंग की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।" डायरेक्ट आई और मीडिया डॉट नेट के अलावा दिव्यांक फ़्लॉक, ज़ेटा और रैडिक्स नाम की कंपनियां भी चलाते हैं।

यह बात मायने नहीं रखती कि आप कब शुरुआत करते हैं। सभी के पास अपने आइडियाज़ हैं। साथ ही, हर आइडिया और इंडस्ट्री के पास पर्याप्त पैसा है। चाहे वह ई-कॉमर्स हो, चाहे पावर या ऑयल। सभी क्षेत्रों में पर्याप्त संभावनाएं और पैसा है। आपको इस तरह से सोचना चाहिए कि अगर हम भारत की 500 शीर्ष कंपनियों में से किसी भी कंपनी के बारे में बात करें तो यह जान पाएंगे कि वे किसी एक ख़ास सेक्टर नहीं हैं। मायने यह रखता है कि आपने अपने आइडिया को साकार बनाने के लिए कितनी वक़्त दिया। वे सभी फ़ैसले भी मायने रखते हैं, जो आप रोज़मर्रा के आधार पर लेते हैं और यही सब चीज़ें आपकी सफलता और असफलता तय करती हैं।

'एक ही सवाल के हो सकते हैं कई जवाब'

हम एक ही समस्या के विभिन्न उपायों के बारे में कैसे सोचते हैं, यह बात की बड़ी अहमियत रखती है। स्कूल में हम सभी को सिखाया जाता है कि एक सवाल का एक ही सही जवाब होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि हर एक सवाल के कई जवाब हो सकते हैं। समय और हालात के हिसाब से जवाब बदल जाता है।

यह बात महत्वपूर्ण नहीं है कि स्टार्टअप की टीम में 2 लोग हैं या फिर किसी स्टार्टअप के पास 10 लोगों की टीम है। महत्वपूर्ण सिर्फ़ यह पहलू है कि 10 लोगों की कंपनी को आगे बढ़ाने का तरीक़ा उस कंपनी के विकास से बिल्कुल ही अलग होगा, जिस कंपनी के साथ 200 लोगों की टीम है। पहुंच, योग्यता और संसाधन, सभी पहलुओं पर अलग तरीक़े से काम करना होगा, इसलिए यह बेहद ज़रूरी है कि जब आपका स्टार्टअप शुरुआती स्तर पर हो तो आप संसाधनों और उनके उपयुक्त इस्तेमाल को सबसे अधिक तवज्जोह दीजिए। सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है, आपका निजी समय और इसलिए हमें जल्द से जल्द अपनी टीम को बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए।

जिस काम का जिम्मा आप किसी और सौंप सकते हैं, उस काम के लिए जल्द से जल्द किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त कर दें। आप जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, आपको मदद की ज़रूरत होती है। 20 लोगों की टीम वाला स्टार्टअप एक बहुत बड़ा स्टार्टअप बनकर उभरे, ऐसा बहुत ही कम होता है। आपको अपनी टीम बढ़ानी होती है और हर महीने आगे बढ़ना होता है।

क्या आपने फ़ंडिंग लेने के बारे में सोचा ही नहीं या फिर आपको फ़ंडिंग मिली ही नहीं?

मैंने अपने बिज़नेस के लिए फ़ंडिंग ढूंढने के बारे में कभी सोचा ही नहीं क्योंकि उनके बिज़नेस शुरुआत से ही मुनाफ़े में रहे और उन्हें कभी भी बाहरी निवेश की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।

बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने में समय लगता है। बहुत से स्टार्टअप्स सिर्फ़ इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि उनके फ़ाउंडर्स बीच में ही धैर्य खो देते हैं। जब हमने अपना पहला बिज़नेस शुरू किया था, तब अपने पहले 100 ग्राहक जुटाने के लिए हमें 6 सालों का वक़्त लगा था और फिर अगले 10 उपभोक्ताओं के लिए हमें कुछ और सालों का इंतज़ार करना पड़ा।

आजकल लोगों को तरक्की की बहुत जल्दी रहती है। आप पैसा बना सकते हैं और तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं। बहुत से लोगों को लगता है कि इस सोच के साथ आगे बढ़ने से उनका सपना जल्द ही पूरा हो जाएगा और लोगों की सफलता का मानक यही होता है कि वे कितना पैसा कमाते हैं। लेकिन भारत का स्टार्टअप ईकोसिस्टम अभी अपने बेहद शुरुआती दौर में है। अधिकतर कंपनियों के लिए, स्थानीय बाज़ार ही अभी विकासशील अवस्था में हैं। इसके अलावा आप दूसरा कोई मानक नहीं निर्धारित कर सकते।

क्या आपके सभी बिज़नेस हमेशा से ही मुनाफ़े में रहे?

मेरे पास कोई विकल्प ही नहीं था। जब मैंने शुरुआत की थी, तब मेरे पास बिल्कुल भी पैसा नहीं था और इस हिसाब से मुझे हर हालत में अपने बिज़नेस को फ़ायदेमंद बनाना था। हमने हमेशा इस बात की कोशिश की कि हमारे साथ काम करने वाले लोग आगे बढ़ें और उनके करियर का सही विकास हो। हम समय-समय पर उन्हें प्रेरित भी करते रहे। हमारी इस सोच की वजह से ही टीम के सभी योग्य लोग हमारे साथ बने रहे।

समय पर आपका ज़ोर नहीं!

समय आपके हिसाब से नहीं चलता। आपको किसी भी बिज़नेस की शुरुआत यह सोचकर करनी चाहिए कि आप हमेशा इस बिज़नेस को जारी रखेंगे और आपको इस तरह के ख़्याल से बचना चाहिए कि आप किसी बिज़नेस को शुरू करने के तीन या चार साल के भीतर उससे अलग हो जाएंगे।

अगर आपका पार्टनर आपकी कंपनी में वैल्यू अडिशन कर सकता है और आप इस मौक़े को भुनाना चाहते हैं तो उस वक़्त आपको अपने पार्टनर की सलाह मान लेनी चाहिए। ज़्यादातर कंपनियों में लोग 5-15 सालों के भीतर एग्ज़िट लेते हैं। फ़ाउंडर को अपने एग्ज़िट के बारे में सोचे बिना ही अपने बिज़नेस को आगे बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए।

एक स्टार्टअप का फ़ाउंडर होने के नाते आप एक दिन में 12-15 घंटों तक काम करते हैं, लेकिन मायने यह रखता है कि आप इस दौरान कितनी गंभीरता से कौन सा काम करते हैं। आपको हर हफ़्ते ख़ुद से यह सवाल करना चाहिए कि आप अपनी कंपनी को बेहतर बनाने के लिए क्या ख़ास कर सकते हैं और आपको हर हफ़्ते ख़ुद से यह सवाल करना चाहिए।

बिज़नेस को चलाने में भावनात्मक पहलू की कितनी अहमियत होती है?

इस बात का पता लगाना बेहद ज़रूरी है कि आपको क्या काम नहीं करना चाहिए था, कौन सा काम और भी अच्छे ढंग से किया जा सकता था और किन चीज़ों पर आपको अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है। हर सुबह उठने के बाद मेरे ज़हन में हज़ारों बातें आती हैं और फिर मैं सोचता हूं कि उनमें से कौन सी 4-5 चीज़ें सबसे महत्वपूर्ण हैं। ये सबकुछ सोचने के बाद ही मैं अपने पूरे दिन की योजना तैयार करता हूं।

किसी भी बिज़नेस को शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए जुनून की ज़रूरत होती है। अगर मेरी बात करें तो मैंने चीज़ों से अधिक लोगों के लिए भावनात्मक हूं। मैं अपने बिज़नेस के लिए इमोशनल नहीं हूं। मैं अपने साथ काम करने वाले लोगों से दिल से जुड़ा रहता हूं।

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