पाकिस्तान और ईरान जैसे मुस्लिम मुल्क में भी हजारों लोग कर रहे योग

0

तमाम मज़हबी वर्जनाओं को अनसुना कर अब पाकिस्तान, ईरान आदि मुस्लिम बहुल देशों में भी लोग बड़ी तादाद में योग करने लगे हैं। इनमें सिर्फ पुरुषों ही नहीं, महिलाओं की भी अच्छी-खासी संख्या देखा जा रही है। पाकिस्तानी टीवी पर योग दिखाया जा रहा है। खबरों से पता चल रहा है कि अब तो इस्लामाबाद, लाहौर, करांची, डेरा इस्माइल खान के देहाती इलाकों में भी लोग योग कर रहे हैं।

योग करते मुस्लिम 
योग करते मुस्लिम 
पाकिस्तान के आतंकवाद पीड़ित शहर डेरा स्माइल खान में बहुतायत में मर्द ही नहीं, औरतें भी योग करने लगी हैं। यहां के लोग आतंकवादी हरकतों से भयानक तनाव में रहते हैं। जो लोग योग कर रहे हैं, उन्हें ऐसे तनावों से राहत मिलने लगी है। 

दुनिया के मुस्लिम बहुल देशों पाकिस्तान, ईरान आदि के लोग भी अब तेजी से योग की ओर आकर्षित होने लगे हैं। पंतजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव की भी इच्छा है कि उन्हें मौका मिला तो वह पाकिस्तान जाकर वहां के लोगों को योग सिखाना चाहेंगे। कुछ वर्ष पहले ईरान के राजदूत गुलाम रजा अंसारी हरिद्वार में बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ पहुंचे थे तो उन्होंने कहा था कि योग से दुनिया को जीवन से संबंधित नई दृष्टि मिली है। भारत और ईरान के बीच कई आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समानताएं हैं। ईरान में भी योग को प्रोत्साहित किया जाएगा। पहले केवल इस्लामाबाद के एक बड़े पार्क में हर सुबह लोगों को योग करते देखा जाता था लेकिन अब करांची और लाहौर में भी योग कराया जा रहा है।

सबसे अहम बात है कि योग करने वालों में महिलाएं और बच्चे भी होते हैं। यहां तक कि एक जगह पर तो एक महिला ही योग प्रशिक्षक के तौर पर काम कर रही है। पाकिस्तान में योग का बढ़ता क्रेज कई लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। कई पाकिस्तानी युवा योग सीखकर दूसरे देशों में इसका प्रचार-प्रसार करने में जुटे हैं। इसी साल जून-2018 में पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार 'डॉन' ने लाहौर से एक तस्वीर जारी की थी, जिसमें कई मुस्लिम लोगों को एक पार्क में योग करते दिखाया गया था। डॉन पेपर में छपी तस्वीर में लाहौर के शालीमार गार्डन में सुबह योग और प्राणायाम करते मुसलमानों को देखा गया। पाकिस्तान से यह तस्वीर ऐसे वक्त में जारी हुई, जबकि भारत में मुसलमानों के योग न करने की बातें की जाती हैं।

आज भी दुनिया के और भी कई देश ऐसे हैं, जो योग को हिंदू और बौद्ध मान्यताओं से जोड़ कर देखते हैं। वर्ष 2012 में ब्रिटेन में एक चर्च ने एक योग क्लास को बैन कर दिया था। अमेरिका के पादरी जॉन शैंडलर योग को 'शैतानी' बता चुके हैं। ओम और मंत्रों, श्लोकों के उच्चारण को लेकर ऐसे लोगों का मानना है कि इनका उच्चारण मुस्लिम मजहब के खिलाफ है। कुछ समय पहले सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि योग इस्लाम के खिलाफ है। एक मुसलमान सिर्फ इबादत के लिए अल्लाह के सामने सिर झुकाता है। वह सूर्य नमस्कार करके सूरज के सामने क्यों सिर झुकाए। कुछ साल पहले जब पहला योग दिवस मनाया गया था तो इस मौके पर पाकिस्तान जाने वाले योग प्रशिक्षक को वीजा देने से इनकार कर दिया गया था। इस प्रशिक्षक को वहां जाकर भारतीय दूतावास के कर्मचारियों को योग करवाना था।

उसी दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी कहा था कि योग इस्लाम की भावना के खिलाफ है लेकिन कुछ दिन पहले ही बीबीसी लंदन की एक सचित्र रिपोर्ट में दिखाया-बताया गया है कि पाकिस्तान के आतंकवाद पीड़ित शहर डेरा स्माइल खान में बहुतायत में मर्द ही नहीं, औरतें भी योग करने लगी हैं। यहां के लोग आतंकवादी हरकतों से भयानक तनाव में रहते हैं। जो लोग योग कर रहे हैं, उन्हें ऐसे तनावों से राहत मिलने लगी है। विचारणीय है कि जिन्हें योग इस्लाम विरोधी दिखता है, उन्हें पाकिस्तान और ईरान से सबक लेना चाहिए। डेरा स्माइल खान के लोगों के लिए योगभ्यास दवा बन चुका है। इस्लामाबाद में तमाम लोग रोजाना नियमित रूप से योग करने लगे हैं। उन्हें इससे काफी फायदा हो रहा है। भारत में योग का प्रशिक्षण ले चुके शमशाद हैदर पाकिस्तान में लोगों को योग सीखा रहे हैं। वह नमाज के साथ-साथ योग भी कराते हैं। वह योग को विज्ञान मानते हैं। उनका कहना है कि योग को किसी मजहब से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। शमशाद के कई साथी भी पाकिस्तान के अन्य शहरों में योग सिखाने लगे हैं। योग करने वाले पाकिस्तानी नागिरकों का कहना है कि उन्हें योग करने के बाद अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों से आराम मिलने लगा है।

पाकिस्तान में पेशे से इंजीनियर योग गुरु मोहम्मद वजाहत अली खान अफरीदी करांची में लगाए गए एक योग शिविर में लोगों को बताते हैं कि योग अब पाकिस्तानी समाज में आसानी से स्वीकार किया जा रहा है। बुजुर्गों और कुछ अलग-अलग लोगों के साथ योग करने का यह एक शानदार अवसर है। पाकिस्तान में रह रहे संजेश धनजा बताते हैं कि करांची में हजारों लोग यहां के विभिन्न क्लबों, स्वतंत्र समूहों की ओर से आयोजित योग शिविरों में भाग लेने लगे हैं। इस्लामाबाद स्थित सफा मॉल में एक योग शिविर का नेतृत्व करने वाले बाकर बताते हैं कि हर आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं ने योग को अब अपनी दिनचर्या का नियमित हिस्सा मान लिया है। ऐसे शिविरों में सरकारी अधिकारियों को भी भाग लेते देखा गया है।

पाकिस्तान में अब तो इस्लामाबाद, लाहौर और करांची जैसे बड़े शहरों के अलावा देहातों में भी लोगों को योग करते देखा जा सकता है। उनके लिए योग सिर्फ सेहत की दवा है। अब पाकिस्तानी टीवी पर भी योग से जुड़े कार्यक्रम आने लगे हैं। लाहौर में सिर्फ महिलाओं के लिए चलने वाले इंडस योग हेल्थ क्लब की प्रशिक्षक आरिफा जाहिद कहती हैं कि घर-बाहर की तमाम जिम्मेदारियों के चलते आदमी इतना बिखर चुका है कि उसे सिर्फ योग जोड़ सकता है। एक वक्त था जब आरिफा खुद अपनी घुटनों की तकलीफ से परेशान थीं। तमाम इलाज के बावजूद जब तकलीफ दूर नहीं हुई तो वह योग को आजमाने लगीं। इससे उन्हें इतना फायदा हुआ कि उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी योग सिखाने का फैसला कर लिया। आज उनके क्लब में योग सीखने वालों की अच्छी खासी भीड़ रहती है। योग से जुड़ा उनका एक कार्यक्रम भी टीवी चैनल पर आता है।

डेरा इस्माइल खान निवासी डीआई आतंकवादी हिंसा के कारण वर्षों से तनाव में रहते थे। योग से उन्हें राहत मिल रही है। पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष वसीम अकबर बताते हैं कि यहां दशकों से सांप्रदायिक और आतंकवादी हिंसा की लहरों ने यहां के निवासियों को चिंता और निराशा में डुबो रखा है। अब ऐसे लोगों को योग तनावमुक्त करने लगा है। उधर, मुस्लिम गणतंत्र ईरान में भी योग लोकप्रिय हो रहा है। वहां इसे खेल की तरह समझा जाता है। टेनिस और फुटबॉल जैसे खेलों के संघ यानी फेडरेशनों की तरह वहां योग फेडरेशन भी है। वहां के एक योग शिक्षक का कहना है कि योग फेडरेशन के कार्यक्रमों में प्रत्येक आसन के फायदों पर चर्चा भी होती है। उनके छात्रों का कहना है कि योगभ्यास से उनकी एकाग्रता बढ़ी है।

यह भी पढ़ें: स्किल डेवलपमेंट के बिजनेस से दो युवा बने करोड़पति

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

Related Stories

Stories by जय प्रकाश जय