बच्चों की सुरक्षा में ना रहे कोई चूक, 'LOCUS' ऐप है अचूक

माता-पिता रख सकते हैं बच्चे पर नजरबच्चों को मुश्किल हालात से निकाले Locus ऐपGPS और GPRS से जुड़ा है Locus ऐप

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बच्चे की देखभाल और उनकी सुरक्षा का पहला दायित्व माता-पिता का होता है। यही वजह है कि रितेश पांड्या और विश्वनाथ वी बालुर भी अपने बच्चों के लिए सुरक्षित और शांत वातावरण चाहते थे। अपनी इसी इच्छा से प्रेरित होकर इन दोनों ने मिलकर Locus नाम के एक मोबाइल ऐप को तैयार किया। इस ऐप के जरिये कोई भी अभिभावक अपने बच्चों पर निगाह रख सकता है और वो ये जान सकते हैं कि उनका बच्चा कब कहां पर हैं।

रितेश के मुताबिक “हर माता-पिता अपने बच्चों को बताते हैं कि उनको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, क्या सही है क्या गलत इतना ही मुश्किल हालात से निपटने के लिए कई अभिभावक अपने बच्चों को मोबाइल भी देते हैं, लेकिन स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध होता है। इसलिए हम लोगों का लक्ष्य था कि बच्चों को हर पल सुरक्षित रहने का अहसास हो।”

दरअसल साल 2012 के दौरान रितेश अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में थे और उसी साल 2 मई को वहां पर एक धमाका हुआ था। तालिबान ने जिस जगह पर ये धमाका किया था रितेश उस जगह से कुछ ही दूरी पर मौजूद थे। इस धमाके की वजह से पास के स्कूल में मौजूद कई लोगों की जानें चली गई। जिसका परिणाम ये हुआ कि लोगों में घबड़ाहट और गड़बड़ी के हालात पैदा हो गए। हर कोई स्कूल में पढ़ने वाले अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर परेशान था।

रितेश पांड्या
रितेश पांड्या

इस घटना ने रितेश को अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सोचने पर मजबूर किया कि कैसे मुश्किल हालात में बच्चे अपने अभिभावकों से दूर मदद ले सकते हैं। अपनी इसी सोच को अमीजामा पहनाने के लिए रितेश ने तकनीकि सह-संस्थापक की खोज शुरू कर दी। इस घटना के कुछ समय बाद रितेश भारत लौट आए और ऑन मोबाइल ग्लोबल में नौकरी करने लगे। यहां पर उनकी मुलाकात विश्वनाथ से हुई जो इंजीनियरिंग विभाग के निदेशक थे।

एक दिन लंच के दौरान रितेश ने अपने विचार विश्वनाथ के सामने रखे। जिसके बाद दोनों ने तकनीक पर काफी खोज की जिसके बाद इन लोगों को लगा कि इस समस्या का हल ढूंढा जा सकता है। जिसके बाद विश्वनाथ ने अपना तकनीकि ज्ञान, तो रितेश ने अपने विचारों को गूंथना शुरू किया। इसी दौरान बेंगलुरू के एक स्कूल में बच्चे के साथ छेड़छाड़ की एक घटना सामने आई। इस घटना के बाद ये लोग अपनी योजना को और सक्रियता से पूरा करने में जुट गए और बच्चों की सुरक्षा के लिए इन लोगों ने Tatya Tech Pvt Ltd की स्थापना की। Locus GPS और GPRS स्कूल परिचय पत्र पर आधारित है और हर बच्चा इसे आसानी से अपने साथ ले जा सकता है। बच्चे की आईडी से कोई भी अभिभावक अपने मोबाइल ऐप के जरिये ये पता कर सकता है कि उसका बच्चा कहां पर हैं। इस तरह बच्चों पर 24 घंटे नजर रखी जा सकती है।

इस ऐप के जरिये ना सिर्फ बच्चे पर नजर रखी जा सकती है बल्कि ऐप से ये भी पता चल सकता है कि स्कूल में बच्चा सुरक्षित जगह पर है या असुरक्षित जगह पर। ऐसे में अगर कोई बच्चा असुरक्षित जगह पर जाता है तो अभिभावकों को उनके मोबाइल पर इसका संदेश मिलना शुरू हो जाता है। इतना ही घर से स्कूल जाते हुए या स्कूल से घर आते हुए बच्चा जिस वाहन में आ रहा है वो निर्धारित स्पीड पर चल रहा है या ज्यादा तेज तो नहीं है इसकी जानकारी भी ऐप के जरिये अभिभावकों को मिल जाती है। इसके अलावा बच्चों के पास अगर मोबाइल है तो वो कहीं बंद तो नहीं है या फिर वो कम चार्ज तो नहीं है इसकी जानकारी भी अभिभावकों को तुरंत मिल जाती है। इस उपकरण की खास बात ये है कि बच्चा जब मुश्किल में हो तो वो कॉल करने की जगह एक पैनिक बटन दबाकर अपने अभिभावकों के साथ जुड़ सकता है। जिससे उनको पता चल सके कि बच्चा किस हाल में है और वो उसके मुताबिक कार्रवाई कर सकें।

सुरक्षा के अलावा इस ऐप में कई और भी फीचर हैं जो अभिभावकों और अध्यापकों को जोड़ने का काम करते हैं। इस ऐप के जरिये अभिभावक स्कूल में चल रही गतिविधियों की जानकारी ले सकते हैं। बच्चे को दिए गए गृहकार्य और दूसरी महत्वपूर्ण सूचनाएं भी वो इससे हासिल कर सकते हैं।

विश्वनाथ वी
विश्वनाथ वी

इस ऐप की शुरूआत पिछले साल हुई थी तब से अब तक रितेश पांड्या और विश्वनाथ वी ने बेंगलुरू में 40 से ज्यादा स्कूल और 700 से ज्यादा अभिभावकों को इसकी जानकारी दी है। इसी का परिणाम है कि फिलहाल Locus को लेकर 4 स्कूलों ने इनके साथ करार किया है। इन स्कूलों में सेंट फ्रांसिस, कैथेड्रल स्कूल और शिक्षा सागर शामिल हैं। इसके अलावा कई और भी स्कूल हैं जो इनके साथ जुड़ना चाहते हैं। फिलहाल इन दोनों का लक्ष्य स्कूलों की संख्या में और इजाफा करने पर है। खास बात ये है कि अगर कोई अभिभावक अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए Locus का इस्तेमाल करना चाहता है तो उसके लिए वेबसाइट के माध्यम से वो जानकारी जुटा सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर में ये ऐप मौजूद है लेकिन इसके लिए अभिभावकों को कीमत चुकानी होगी।

फिलहाल इन लोगों की टीम में कुल 8 लोग हैं। इनमें से 5 लोग तकनीक की जानकारी रखते हैं जबकि दो लोग सेल्स और मार्केटिंग का काम देखते हैं। इन लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शुरूआती स्तर पर अपनी टीम को प्रेरित करना है जब कोई आय ना हो रही हो। इसके लिये ये लोग अपनी टीम से नियमित तौर पर बातचीत करते रहते हैं और अपनी प्रगति से जुड़ी हर जानकारी उनको देते हैं। फिलहाल रितेश और विश्वनाथ को तलाश है सही निवेशक की। इसके अलावा ये लोग दो और ऐप बनाने में जुटे हुए हैं जिसका खुलासा इन लोगों ने नहीं किया है।

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