भारतीय हॉकी टीम का वह खिलाड़ी जिसने मैच के लिए छोड़ा था पिता का अंतिम संस्कार

आज भी किराए के मकान में रहने को मजबूर

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क्रिशन की उम्र जब 12 साल थी तभी उनकी मां का देहांत हो गया। आभाव और गरीबी से जूझते हुए मुश्किल परिस्थितियों के बीच क्रिशन हॉकी खेलते रहे। उनका चयन भारतीय जूनियर हॉकी टीम के लिए हो गया, लेकिन इसी बीच उन्हें एक और आघात लगा। वह जब अपना पहला इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने इंग्लैंड जा रहे थे तभी उन्हें पिता के निधन की खबर मिली।

क्रिशन बी पाठक
क्रिशन बी पाठक
इतनी कठिन हालात में भी क्रिशन ने अपने खेल पर पूरा ध्यान दिया। छह महीने बाद जब जूनियर हॉकी विश्वकप हुआ तो उसमें भारतीय टीम ने फतह हासिल की। यह संभव हो पाया था क्रिशन जैसे खिलाड़ियों की बदौलत जिसने मुश्किल परिस्थितियों में दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 

पूरी दुनिया में महानतम खिलाड़ियों की लिस्ट बनाई जाए तो उनमें से अधिकतर ऐसे होंगे जिन्होंने जिंदगी में अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए कठिन परिस्थितियों और हादसों से गुजरते हुए अपना मुकाम बनाया होगा। भारत में भी ऐसे खिलाड़ियों की कमी नहीं है। 2006 में जब भारतीय क्रिकेट टीम के वर्तमान कप्तान और शानदार बैट्समैन विराट कोहली कर्नाटक के खिलाफ रणजी मैच खेल रहे थे तभी खबर मिली कि उनके पिता का देहांत हो गया है। पिता की मौत की खबर सुनना कितना असहनीय हो सकता है, इसकी कल्पना शायद ही की जाए। लेकिन वह मैच मुश्किल स्थिति में था इसलिए विराट ने पिता के अंतिम संस्कार में न जाने का फैसला कर लिया। उस मैच में उन्होंने 90 रन बनाकर मैच बचा लिया था।

विराट की खेल के प्रति यह जुनून और प्रतिबद्धता से साबित हो जाता है कि उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए कितनी मेहनत की है। उनके लिए एक मैच की अहमियत क्या थी। ऐसे ही एक और खिलाड़ी का नाम है क्रिशन पाठक जिसकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जल्द ही होने वाले एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम की तरफ से दूसरे गोलकीपर के तौर पर चुने जाने वाले क्रिशन पाठक ने भी संघर्ष की राह पर चलकर भारतीय हॉकी टीम में अपनी जगह बनाई है।

क्रिशन के पिता तेक बहादुर पंजाब के कपूरथला में क्रेन ऑपरेटर थे। वह अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए नेपाल में अपना गांव-घर छोड़कर कपूरथला आए थे। क्रिशन भी अपने पिता के काम में हाथ बंटाते थे और कभी-कभी कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने पहुंच जाते थे ताकि थोड़े और पैसे मिल जाएं। क्रिशन की उम्र जब 12 साल थी तभी उनकी मां का देहांत हो गया। आभाव और गरीबी से जूझते हुए मुश्किल परिस्थितियों के बीच क्रिशन हॉकी खेलते रहे। उनका चयन भारतीय जूनियर हॉकी टीम के लिए हो गया, लेकिन इसी बीच उन्हें एक और आघात लगा। वह जब अपना पहला इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने इंग्लैंड जा रहे थे तभी उन्हें पिता के निधन की खबर मिली।

मैच के सिर्फ दो दिन बचे थे और उनके पिता हृदयघात की वजह से चल बसे। उस वक्त क्रिशन की उम्र सिर्फ 20 साल थी। लेकिन यह सीरीज काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी क्योंकि 2016 छह महीने बाद जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप होना था और उसके पहले तैयारी का यही एक मौका था। टाइम्स ऑफ इंडिया को दी गई जानकारी में क्रिशन ने बताया, 'मेरी जिंदगी तमाम अनिश्चितताओं से जूझती रही है। मैं अब अनाथ हो चुका हूं। अब घर पर मेरा कोई इंतजार नहीं करता। मेरे पास कोई ऐसी जगह भी नहीं है जिसे मैं अपना घर कह सकूं।' क्रिशन कहते हैं कि अगर उनकी जिंदगी में हॉकी नहीं होती तो कब के ड्रग के शिकार हो गए होते और उनकी जिंदगी पता नहीं कैसे बीत रही होती।

क्रिशन ने भी विराट कोहली की तरह अपना दिल बड़ा करते हुए विराट फैसला ले लिया। उन्होंने पिता के अंतिम संस्कार को छोड़ते हुए इंग्लैंड मैच खेलने चले गए। हालांकि जूनियर हॉकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा था कि वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में चले जाएं उनकी जगह वैसी ही बनी रहेगी। क्रिशन कहते हैं, 'यह मेरे लिए सबसे कठिन घड़ी थी। मैं समझ नहीं पा रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए। मैंने अपने कुछ रिश्तेदारों और बहन को फोन किया जो कि नेपाल में रहते हैं। उन्होंने मुझसे वापस लौटने का दबाव नहीं डाला। यहां तक कि उन्होंने कहा कि मैं देश के लिए खेलने जा रहा हूं और मुझे हौसला रखना चाहिए। हरेंद्र सर ने भी मुझे हर तरह से सपोर्ट किया, लेकिन मैंने खेलने का फैसला कर लिया था।'

इतनी कठिन हालात में भी क्रिशन ने अपने खेल पर पूरा ध्यान दिया। छह महीने बाद जब जूनियर हॉकी विश्वकप हुआ तो उसमें भारतीय टीम ने फतह हासिल की। यह संभव हो पाया था क्रिशन जैसे खिलाड़ियों की बदौलत जिसने मुश्किल परिस्थितियों में दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जूनियर टीम के कोच हरेंद्र अब सीनियर टीम के कोच बन गए हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने उस वक्त क्रिशन को वापस जाने को कहा था लेकिन उसने कहा कि उसके पिता उसे भारत के लिए खेलते हुए देखना चाहते थे। उसकी इस बात से मुझझे लगा कि क्रिशन वाकई में एक योद्धा है।'

क्रिशन अभी कपूरथला में अपने एक चाचा के साथ किराए के घर में रहते हैं। इस घर की छत सीमेंट की चादर से बनी है। जब जूनियर हॉकी टीम 2016 का वर्ल्ड कप जीतकर आई थी तो पंजाब सरकार ने हर खिलाड़ी को 25 लाख रुपये देने का वादा किया था। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि अभी तक किसी को एक भी रुपये नहीं मिले हैं। क्रिशन कहते हैं कि अगर उन्हें पैसे मिलेंगे तो वह अपने लिए एक घर बनवाएंगे।

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