चंबल के बीहड़ों में मुंबई की 'सोन चिरैया'

फोर्ब्स की '30 अंडर 30' की लिस्ट में बॉलीवुड अमीर अभिनेत्री भूमि पेडनेकर 

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फोर्ब्स इंडिया की ओर से जारी की गई '30 अंडर 30' यानी 31 दिसंबर 2017 तक 30 साल से कम उम्र की अमीर हस्तियों की लिस्ट में एक नाम नवोदित अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का भी है।भूमि मुंबई में 18 जुलाई 1989 को जन्मीं, पली-बढ़ी और पढ़ी-लिखी हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई मुंबई में जुहू स्थित आर्य विद्या मंदिर से पूरी की। उनके पिता महाराष्ट्र के हैं और माँ हरियाणवी। अपनी मेहनत और अभिनय की योग्यता से दर्शकों को आकर्षित करने वाली भूमि एक वक्त में अपनी फिजिकल प्रॉब्लम्स से निराश होने लगी थीं...

भूमि पेडनेकर
भूमि पेडनेकर
'दम लगा के हईशा', 'टॉयलेट-एक प्रेम कथा' और 'शुभ मंगल सावधान' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकीं भूमि को हाल ही में फोर्ब्स इंडिया की "30 अंडर 30" की लिस्ट में शामिल किया गया है।

फोर्ब्स इंडिया की ओर से जारी की गई '30 अंडर 30' यानी 31 दिसंबर 2017 तक 30 साल से कम उम्र की अमीर हस्तियों की लिस्ट में एक नाम नवोदित अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का भी है। हाल के वर्षों में फिल्म 'दम लगा के हईशा' से भूमि के सिनेमाई करियर की शुरुआत हुई है। इस फिल्म ने बेहतर कारोबार किया। इसी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ डेब्यू अभिनेत्री अवार्ड भी मिला। इसके अलावा इसी फिल्म के लिए उनको प्रोड्यूसर्स गिल्ड फिल्म अवॉर्ड्स, स्क्रीन अवार्ड्स, ज़ी सिने अवार्ड्स, स्ट्रडस्ट अवार्ड्स, बिग स्टार एंटरटेनमेंट अवार्ड्स और इंटरनेशनल फिल्म अकादमी पुरस्कार मिले।

वर्ष 2015 में बॉलीवुड डेब्यू करने वाली भूमी पेडनेकर अब हर तरह की फिल्में कर रही हैं। उनकी शानदार परफॉर्मेंस फिल्म इंडस्ट्री की उम्मीदें परवान चढ़ाने लगी है। उनकी अभिनेता आयुष्यमान खुराना के साथ पहली ही फिल्म 'दम लगा के हईशा' ने सिनेमाघरों को गुलजार कर दिया था। इस फिल्म में उन्होंने एक शादीशुदा औरत का किरदार निभाया। बड़े पर्दे पर उतरने से पहले उन्होंने यश राज बैनर तले सहायक निर्देशक के रूप में कदम रखा। वही से उनके करियर ने नई दिशा पकड़ी। काम के दौरान निर्देशक मनीष शर्मा ने भूमि का अभिनय के प्रति लगाव देख उन्हें अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन कर लिया। यश राज बैनर के ही साथ उन्होंने तीन फिल्मों के समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए।

भूमि पेडनेकर मुंबई में 18 जुलाई 1989 को जनमीं और पली-बढ़ी, पढ़ी-लिखी हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई मुंबई में जुहू स्थित आर्य विद्या मंदिर से पूरी की। उनके पिता महाराष्ट्र के हैं और माँ हरियाणवी। अपनी मेहनत और अभिनय की योग्यता से दर्शकों को आकर्षित करने वाली भूमि एक वक्त में अपनी फिजिकल प्रॉब्लम्स से निराश होने लगी थीं। गौरतलब है कि फिल्म इंडस्ट्री में फैटी अभिनेत्रियों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। वह अभिनेत्री तो होने से रहीं, अक्सर उन्हें या तो मां-मौसी जैसे रोल कुबूलने पड़ते हैं या पेशे की दिशा बदल लेने पड़ती है। भूमि पेडनेकर अपने वेट लॉस का सारा क्रेडिट मां और इंटरनेट को देती हैं। वह अपना स्वास्थ्य सही रखने की हर तरह की जानकारियां इंटरनेट से हासिल करती हैं।

भूमि को बचपन से ही बैडमिंटन खेलना, पार्क में दौड़ लगाना, ब्रिस्‍क वॉक करना काफी पसंद है। वह जिम भी जाती रही हैं, जिससे उनका वेट मेंटेन रहता है। रोज़ सुबह मॉनिंग वॉक, दुपहर में जिम और कभी कभार वॉलीबॉल, बैडमिंटन या स्‍विमिंग कर लेती हैं। कमोबेश रोजाना ही बॉलीवुड के गानों पर स्वास्थ्य सही रखने के लिए डांस भी करती हैं। जब शरीर का फैट फिल्मी करियर में आड़े आने लगा तो भूमि ने हार नहीं मानी। फिल्‍म 'दम लगा के हईशा' रिलीज होने के बाद जनवरी 2016 में उनका वजन 85 किलो तक पहुंच गया था। इस फिल्म के लिए उन्हें अपना वजन पंद्रह किलो बढ़ाना पड़ा था। वैसे भी उनको चटपटी चीजें बहुत पसंद हैं।

फिल्म में आयुष्मान खुराना के साथ भूमि
फिल्म में आयुष्मान खुराना के साथ भूमि

उन्‍होंने उस फिल्म का ऑफर एक्‍सेप्‍ट कर लिया और हर दिन कैलोरी से भरा खाना खाने को मजबूर हुई थीं। जब वह उस फिल्‍म का न्‍यू कमर अवार्ड लेने स्‍टेज पर पहुंची तो देखकर लोगों के होश फाख्ता हो गए थे। उस वक्त भूमि पहले वाली ओवरवेट लड़की नजर नहीं आ रही थीं, बल्‍कि उन्‍होंने अपना फिगर बाकी की हिरोइनों की तरह छरहरा बना लिया था। इसके लिए उनको काफी कड़ी डाइट और मेहनत करनी पड़ी। वह तब भी अपनी मन पसंद सभी चीज़ें खाती रहीं लेकिन चेंज के साथ। जैसे रोजाना फलों का एक गिलास जूस या अंडे, मिस्‍सी रोटी या टोस्‍ट, पोहा या उपमा, सब्‍जी, रोटी, चिकन चावल या केवल दाल चावल। उन्‍होंने गेहूं की रोटियों के बजाए मल्‍टीग्रेन रोटियां और चावल की जगह राजगिरा खाना शुरू किया।

इसके साथ जितनी भी तली-भुनी चीज़ें थीं, उसको केवल ऑलिव ऑइल में भी फ्राई कर के खातीं। एलोवेरा जूस पी कर बॉडी को डिटॉक्‍स करने लगीं। आज भी वह रोजाना एलोवेरा का जूस पीती हैं, जिससे उनके शरीर से दूषित पदार्थ निकल जाएं और उनकी बॉडी डिटॉक्‍स हो जाए। इसके अलावा ग्रीन टी पीना वह कभी नहीं भूलती हैं। चीज़, बटर और जंक तो तौबा-तौबा। यह सब खाना तो बिल्‍कुल ही बंद कर दिया है। उन्होंने चार-पांच महीनों में ही अपने शरीर की चर्बी को खत्म कर लिया। शक्‍कर की जगह खजूर का सीरप, शुद्ध शहद और गुड़ खाने लगीं। पानी का सेवन बढ़ा दिया। एक लीटर पानी में, तीन खीरे, कुछ पुदीने की पत्‍तियां और उसमें चार नींबू निचोड़ कर फ्रिज में ठंडा कर के दिन भर पीतीं।

'दम लगा के हईशा', 'टॉयलेट-एक प्रेम कथा' और 'शुभ मंगल सावधान' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुकी भूमि ने हाल ही में एक दिन आगरा में ताजमहल का दीदार किया। धौलपुर में अपनी नई फिल्म 'सोन चिरैया' की शूटिंग के दौरान उन्हें यहां पहुंचना पड़ा। ताज के दीदार की खुशी उन्होंने सोशल मीडिया के फ्रेंड्स से भी साझा कर ली। कई पोज में फोटो खिंचवाने के साथ उन्होंने इन्हें अपलोड किया। बिना किसी बाउंसर और सुरक्षाकर्मी के भूमि पेडनेकर ने शूटिंग टीम की महिला सदस्यों के साथ ताज का दीदार किया। उनके आने की किसी को भनक तक न लगी। भूमि को ताज में भी कोई पहचान न सका। उन्होंने सेंट्रल टैंक और डायना सीट पर फोटोग्राफी कराई।

फिल्म निर्देशक अभिषेक चौबे और लीड किरदार सुशांत सिंह राजपूत के साथ जिला धौलपुर (राजस्थान) के चंबल के बीहड़ों में 'सोन चिरैया' की शूटिंग में वह बुंदेलखंडी ग्रामीण महिला की भूमिका में रहीं। इस फिल्म में सुशांत डकैत बने हैं। इस फिल्म में आशुतोष राणा, मनोज वाजपेयी, रणवीर शौरी आदि अन्य मुख्य कलाकार हैं। 'इश्किया' और 'उड़ता पंजाब' जैसी फिल्म बनाने वाले निर्देशक अभिषेक चौबे चंबल के डाकुओं के जीवन पर आधारित एक नई तरह की फिल्म बना रहे हैं। बॉलीवुड में चंबल के डाकुओं पर कई फिल्में बनी हैं, लेकिन इन फिल्मों की कहानी के केंद्र में सिर्फ डकैती, खून खराबा और लूटपाट ही दिखाया जाता रहा है।

अभिषेक अपनी फिल्म में चंबल के डाकुओं के जीवन का दूसरा पहलू दिखाना चाहते हैं। फिल्म को लेकर सबसे बड़ी बात किरदारों का लुक और भाषा है। फिल्म में बुंदेलखंडी भाषा दर्शकों को सुनने को मिलेगी। इसके लिए भूमि पेडनेकर को एक लोकल कोच और थिएटर आर्टिस्ट्स की मदद से बुंदेलखंडी भाषा भी सीखनी पड़ी है। भूमि अपने काम के प्रति काफी डेडिकेटेड रहती हैं। 33 वर्षीय भूमि अपने किरदार की तह तक जाने के लिए हमेशा पूरी तरह से सन्नध रहती हैं। इस फिल्म को क्रिटिकस और दर्शकों ने खूब सराहा। सुशांत के साथ की अपनी फिल्म के बोल्ड ऐक्शन उल्लेख पर भूमि कहती हैं कि सेक्स एजुकेशन हमारे देश में एक हौवा की तरह है। कोई इस पर बात नहीं करना चाहता! हमारी फिल्म शादी से पहले सेक्स और सेक्स एजुकेशन के बारे में बताती है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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