रिलेशनशिप: लिली और झेंग के रोबोट दूल्हा-दुल्हन

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फ्रांस में किसी महिला के रोबोट से शादी रचाने की बात हो या भोपाल में भावी दुल्हनों के विदाई के समय रोने की ट्रेनिंग लेने का वाकया, दोनो आधुनिक परिघटनाएं वैसे तो मामूली लगती हैं लेकिन दो स्त्रियों की दो तरह की सच्चाइयों से गुजरते हुए आधुनिक आधी आबादी के बारे में बहुत कुछ सोचने के लिए विवश करती हैं।

रोबोट से शादी करने वाले लोग
रोबोट से शादी करने वाले लोग
लिली नाम की एक लड़की को रोबोट से प्‍यार हो गया है। उसकी उम्र लगभग उन्नीस साल है। उसके दिल पर इस समय 'इनमूवेटर' नामक थ्री-डी प्रिन्‍टेड रोबोट राज कर रहा है।

आधुनिक जीवन और समाज चाहे जितना बौद्धिक, ताजादम, मानवीय और प्रगतिधर्मी हो चुका हो, पूरी दुनिया की आधी आबादी यानी स्त्री वर्ग आज भी तरह-तरह की प्रतिकूलताओं, विडंबनाओं, सामंती अवशेषों, पतनशील पूंजीवादी मूल्यों से दो-चार हो रहा है। सुख हो या दुख, दोनो मनःस्थितियां उसे डराती, सहमाती हैं। देखिए न, कि हर शादी में ख़ुशी का माहौल होता है लेकिन बहू बन चुकी कन्या आंसुओं के सैलाब में तैर रही होती है। किसी जमाने में लड़कियां विदाई के वक्त फफक-फफक कर रोती रही हैं। उनको देख पूरे घर वाले भी रो पड़ते थे लेकिन, आजकल की कई लड़कियां अब पहले की तरह संवेदनशील नहीं रहीं। ज्यादातर नर्वस होने के कारण पहले की तरह रोने में माहिर नहीं। जबकि लड़कियों की डिमांड रहती है कि उनकी शादी यादगार बन जाए और शादी में होने वाली हर एक्टिविटी रियल लगे।

शादी की एल्बम की तस्वीरों में रियल जान डालने के लिए ही दुल्हन ये जद्दोजहद करती हैं। विदाई के समय तो पत्थर दिल आदमी भी रो पड़ता है लेकिन आज की विडंबना ये है कि मध्य प्रदेश में लड़कियों को रोने की ट्रेनिंग दी जा रही है। भोपाल में राधारानी नाम की एक महिला दुल्हनों को रोना सिखाती है। इसके लिए वह कोर्स चलाती है। यह सात दिन का कोर्स होता है। भावी दुल्हन को प्रॉपर तरीके से रोने की एक्टिंग सीखनी होती है। राधा का कहना है कि वर्तमान समय में शादी भले ही पैसे से पूरी हो जाती हो पर रोना तो घर वालों को ही होता है और यह काम बहुत ही मुश्किल होता है, इसलिए ही यह कोर्स शुरू किया गया है ताकि दुल्हन अपनी विदाई के समय नेचुरल तरीके से रोती हुई दिखे। अब इसे विडंबना नहीं कहें तो और क्या!

याद करिए, पिछले साल ही यह सूचना आम हुई थी कि भारत में भी सर्जन के बजाए अब रोबोट ऑपरेशन करेंगे। अमेरिका में तो रोबोटिक ऑपरेशन में जो एक्सपेरिमेंट हुए हैं, उनका एक्सपीरिएंस बहुत शानदार रहा है। इसके बाद हमारे देश में भी इस तरह की सर्जरी शुरू हो गई। हर महीने करीब 700 सर्जरी इसी टेक्नोलॉजी के जरिए हो रही हैं यानी रोबोट के माध्यम से सालाना करीब 8,500 ऑपरेशन हो रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक आगामी दो वर्षों में ऐसी सर्जरी की तादाद बीस हजार का आकड़ा पार कर सकती है। आधी दुनिया से जुड़ा यह मामला ऑपरेशन का नहीं, उसको जीवन साथी बनाने का है। इन दिनो यह तिलस्मी किस्सा नए जमाने की रिलेशनशिप को लेकर सुर्खियां बना हुआ है।

किसी के भी होश उड़ा देने वाले अनोखे प्रेमालाप का यह वाकया फ्रांस का है। लिली नाम की एक लड़की को रोबोट से प्‍यार हो गया है। उसकी उम्र लगभग उन्नीस साल है। उसके दिल पर इस समय 'इनमूवेटर' नामक थ्री-डी प्रिन्‍टेड रोबोट राज कर रहा है। लिली बता रही है कि उसने रोबोट से इंगेजमेंट भी कर ली है और अब शादी भी उसी से करेंगी। उसे पूरा भरोसा है कि वह इस रोबोट के साथ खुशी का जीवन बिता सकती है। लिली ने सोशल मीडिया में इसका खुलासा तो पिछले साल दिसंबर में ही कर दिया था कि वह खुद को रोबोसैक्‍सुअल कहलाना पसंद करती है। उसका मानना है कि उसकी इस रिलेशनशिप से आदमी और रोबोट के बीच की दूरियां कम होंगी। रोबोट एक्‍सपर्ट्स कहते हैं कि इसमें ज्‍यादा चौंकने की जरूरत नहीं है। आने वाले वक्त में लोगों की लाइफस्टाइल में गुणात्मक छलांग आने वाला है। वर्ष 2025 से काफी पहले इंसान और रोबोट के बीच गहरे रिलेशन काफी तेजी से बढ़ेंगे। लोग इंसानों से ज्यादा रोबोट से लगाव रखेंगे और उन्ही के साथ रहना, खाना-पीना, सोना पसंद करेंगे।

लेकिन सवाल तो कल को रोबोट सोचने लगे, अपने मन की करने लगे, प्यार या नफरत करना सीख जाए तो क्या होगा? आदमी ऐसा हो चला है कि खुद की संवेदना के मरने से ज्यादा डर उसे मशीनों के संवेदनशील होने से लगता है। इसी लीक पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं, जहां रोबोट्स का इमोशन मुख्य किरदार होता है। शांति के दिनों में न्यूटन क्रोस्बी ने अमेरिका के लिए ढेरों रोबोट बनाए, जो लोगों से हिल-मिल सकें, लोगों की ड्रिंक में बर्फ मिला सकें, उनके लिए गाने बजा सकें, एक रोज ऐसे ही एक रोबोट पर बिजली गिर पड़ती है और वो ज़िंदा हो जाता है। अपनी अक्ल चलाने लगता है, अच्छा-बुरा समझने लगता है और फैसले लेने लगता है। स्टेपनी और न्यूटन जैसे दोस्त भी बना लेता है।

रोबोट को लैब से निकलकर आम लोगों के बीच पहुंचा देख उसे बनाने वाली संस्था नोवा लैब उसके पीछे पड़ जाती है और नंबर-5 को ख़त्म करने के मंसूबे पालने लगती है। दरअसल, दो सौ साल पहले एचजी वेल्स ने एक कहानी लिखी थी। एक साइंटिस्ट रोबोट बनाता है। जहां उसकी लैब होती है, ठीक उसी के नीचे एक बगीचा है। वहां अकसर कपल्स आकर बैठते हैं। कपल्स की बातें रोबोट सुनता है और प्यार करना सीख जाता है। वह वैज्ञानिक की बेटी से प्यार करने लगता है लेकिन एक दिन उसी लड़की को मार डालता है। वैज्ञानिक वजह खोजता है तो पता चलता है कि रोबोट इस तरह का प्रोग्राम्ड था कि उसके सीने से लगने वाले को मार डाले। वैज्ञानिक की बेटी जब उसके गले लगी तो रोबोट ने वही किया।

पिछले लगभग पांच दशकों में खासकर भारतीय समाज इतना ज्यादा बदला है कि उस पर बड़े-बुजुर्गों को यकीन नहीं होता है। रिश्ते-नाते, प्यार-व्यवहार सब कुछ बदल चुका है। स्त्रियों के साथ बुढ़ापे का अकेलापन तो और भी खतरनाक होता जा रहा है। टीवी सीरियल अपने दर्शकों के लिए बदलते रिश्तों की दास्तानें दिन-रात सुना ही रहे हैं। हर आदमी को अपने जीवन में एक पार्टनर की तलब रहती है लेकिन रोबोट और कुत्तों से याराना के वाकये पिछले कुछ दशकों में कॉमन हो चले हैं। यह सच है कि समाज में वक्त के साथ महिलाओं का जीवन के प्रति नजरिया भी बदला है, उनकी शिक्षा, परवरिश, रहन-सहन आदि सभी कुछ बदला है, जिससे उनकी सोच में भी काफी सकारात्मक बदलाव हुए हैं।

अब वे केवल दूसरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लिए भी जीना चाहती हैं। वे अपने प्रति पहले से काफी उदार और सख्त हुई हैं लेकिन सच यह भी है कि मनुष्य पुतला नहीं होता है, पशुप्रेम अथवा मशीनी संवेदना आदमीयत को कहीं नैपथ्य में धकेल रही है। यदि स्त्रियां भी उसका शिकार होने लगी हैं तो इसमें आश्चर्यचकित होने जैसी कोई बात नहीं। आज महिलाएं अपने विचारों को खुलकर दूसरों के सामने रखती हैं। उसे किसी की कोई बात पसंद आए, तो तारीफ करने में भी झिझक नहीं करतीं, वहीं कोई बात नापसंद हो तब भी मन में दबाकर नहीं बैठती हैं।

फ्रांस की लिली की स्वीकारोक्ति ऐसी ही स्थितियों की देन है। ब्रिटेन में तो एक 87 वर्षीय महिला ने अपने कुत्ते के गम में जान दे दी। पशुओं की नर्स रह चुकी जोन मैरी क्रोहर्स्ट नाम की इस महिला को एक दिन अपने घर में मृत पाया गया। उसने अधिक मात्रा में दवाइयां खाकर खुदकुशी कर ली थी। छानबीन के दौरान उसके घर में उसका लिखा एक नोट भी मिला। उसमें लिखा था- 'आपने मेरा कुत्ता ले लिया, आपने मेरी जान ले ली।' दरअसल उस घटना से करीब छह साल पहले मैरी ने एक बचाव केंद्र से कुत्ता लिया था। उसके बाद एक दिन जब वह स्वयं बीमार पड़ी, उसे अस्पताल में दाखिल करा दिया गया। उसके बाद केंद्र के लोग उस कुत्ते को उठा ले गए। मैरी जब स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौटी तो वह कुत्ते का विछोह सहन नहीं कर सकी। ऐसे में जमशेदपुर (झारखण्ड) में एक आईटी संस्थान की प्रबंध निदेशिका रंजना का लिखा भी पढ़ लेना चाहिए कि 'स्वयं को पूरी तरह से खोज पाना और निश्चित तौर पर बता देना कि 'मैं ये हूँ', आसान तो नहीं। यह तो एक अनवरत खोज है।

अंततः एक नाम, एक शरीर नहीं बल्कि व्यक्ति द्वारा जीवन में प्रतिपादित कर्म ही उसकी पहचान बनते हैं। फिलहाल के लिए यह कह सकती हूँ कि मैं एक माँ, एक बेटी, एक पत्नी, एक नारी हूँ।' इसीलिए रोबोट से शादी और विदाई के समय रोने की ट्रेनिंग, दो स्त्रियों की दो तरह की सच्चाइयों से गुजरते हुए आधुनिक आधी आबादी के बारे में बहुत कुछ सोचने के लिए विवश करती हैं। लिली की तरह ही चीन में पिछले साल एक इंजीनियर को जब गर्लफ्रेंड नहीं मिली तो उसने खुद के बनाए रोबोट से ही शादी कर ली। 31 वर्षीय झेंग जियाजिया और उसकी रोबोट दुल्हन यिंगिंग की ‘वेडिंग सेरेमनी’ में परिवार और दोस्त शामिल हुए। तीस किलो की इस फीमेल रोबोट के साथ अब वह बाकी जिंदगी जीना चाहता है। इस सेरेमनी में झेंग की मां भी मौजूद रहीं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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