भारत के डॉक्टरों का कारनामा, एशिया में पहली बार ट्रांसप्लांट किया लड़की का हाथ

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डॉ. ने बताया कि अब तक दुनिया में ऐसे केवल 9 प्रत्यारोपण किए गए हैं। कहा जा रहा है कि यह दुनिया में पहली बार हुआ कि किसी महिला को पुरुष के हाथ लगाए गए।

अपने माता-पिता के साथ (फोटो साभार- द न्यू इंडियन एक्सप्रेस)
अपने माता-पिता के साथ (फोटो साभार- द न्यू इंडियन एक्सप्रेस)
श्रेया का एक्सिडेंट पिछले साल सितंबर में हुआ था। वह उस बस में सवार थीं जो उन्होंने पुणे से अपने कॉलेज पहुंचने के लिए ली थी। इस भयानक हादसे में उनके दोनों हाथ बस के नीचे दब गए थे।

काफी कोशिश के बाद जब उन्हें बाहर निकाला गया तो उन्हें हाथों में कोई हरकत नहीं नजर आई। डॉक्टरों ने भी हाथ को सही करने की काफी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए और अंत में उसे कोहनी से काटना ही पड़ा।

अभी तक आपने हार्ट, किडनी या लीवर ट्रांसप्लांट के बारे में सुना होगा, लेकिन भारत के डॉक्टरों ने एक नया कारनामा किया है। डॉक्टरों ने ऐक्सिडेंट में अपने दोनों हाथ खो चुकी श्रेया को फिर से दोनों हाथ जोड़ दिए। पिछले साल एक बस ऐक्सिडेंट में इंजिनियरिंग की छात्रा श्रेया सिद्धनगौड़ा के दोनों हाथों ने काम करना बंद कर दिया था। श्रेया मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से केमिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हें एर्णाकुलम राजागिरी कॉलेज के बी. कॉम के छात्र सचिन का हाथ मिला है। सचिन का बाइक ऐक्सिडेंट हुआ था जिसके बाद लंबे समय तक वे अस्पताल में भर्ती रहे और आखिर में डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

देश के सर्वश्रेष्ठ सरकारी अस्पताल एम्स में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड डॉ. सुब्रमण्य अय्यर के नेतृत्व में यह ऑपरेशन लगभग 13 घंटे चला जिसमें 20 सर्जन और 16 एनेस्थीसियिस्टों की टीम शामिल थी। श्रेया का एक्सिडेंट पिछले साल सितंबर में हुआ था। वह उस बस में सवार थीं जो उन्होंने पुणे से अपने कॉलेज पहुंचने के लिए ली थी। इस भयानक हादसे में उनके दोनों हाथ बस के नीचे दब गए थे। काफी कोशिश के बाद जब उन्हें बाहर निकाला गया तो उन्हें हाथों में कोई हरकत नहीं नजर आई। डॉक्टरों ने भी हाथ को सही करने की काफी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए और अंत में उसे कोहनी से काटना ही पड़ा।

श्रेया की सर्जरी करने वाले डॉ. अय्यर ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा, 'इस सर्जरी में काफी जटिलताएं थीं। ऐसे ऑपरेशन में हमें स्नायु, धमनियों, विभिन्न तंत्रिकाओं और मांसपेशियों की सटीक पहचान करनी थी, जो कि काफी चुनौतीपूर्ण काम था। श्रेया के दोनों प्रत्यारोपण उसकी ऊपरी बांह में किए गए।' डॉ. ने बताया कि अब तक दुनिया में ऐसे केवल 9 प्रत्यारोपण किए गए हैं। कहा जा रहा है कि यह दुनिया में पहली बार हुआ कि किसी महिला को पुरुष के हाथ लगाए गए। श्रेया ने इस मौके पर कहा, 'जब मुझे पता चला कि भारत में भी हाथों का ट्रांसप्लांट संभव है तो लगा कि मेरी विकलांगता बस थोड़े दिनों की है। मुझे काफी मदद मिली और आने वाले कुछ सालों में मैं फिर से अपनी सामान्य जिंदगी जी सकूंगी।'

श्रेया का ट्रांसप्लांट ऑपरेशन तो सफल रहा, लेकिन डॉक्टर भी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि एक एक महिला को किसी पुरुष का हाथ ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। श्रेया को भी इस बात की परवाह नहीं थी कि उसे किसी पुरुष का हाथ लगाया जा रहा है। अच्छी बात यह रही कि श्रेया की बॉडी ने ट्रांसप्लांट किए गए ऑर्गन को लेकर कोई अस्वीकार्यता नहीं प्रदर्शित की। हालांकि श्रेया को पूरी जिंदगी दवाएं खानी पड़ेंगी ताकि उसका शरीर हाथों को किसी भी समय रिजेक्ट न कर दे। अभी उसकी हाथों की उंगलियों, कंधों और कलाई ने मूवमेंट करना शूरू कर दिया है। लेकिन कोहनी को घुमाने के लिए अभी उसे कुछ सप्ताह का इंतजार करना होगा।

इस सर्जरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सीनियर प्लास्टिक सर्जन मोहित शर्मा के मुताबिक श्रेया आने वाले एक साल में 85 प्रतिशत मूवमेंट रीगेन कर सकती है। श्रेया अपने माता-पिता की इकलौती बेटी है। उसके पिता फकीरगौड़ा सिद्धनगौड़र टाटा मोटर्स में सीनियर मैनेजर हैं और पुणे में रहते हैं। हालांकि आने वाला समय श्रेया के लिए काफी कठिन होगा क्योंकि उसे वजन उठाने में काफी दिक्कत होगी। उसके माता-पिता हॉस्पिटल के पास ही रहते हैं ताकि श्रेया को समय से डॉक्टरों को दिखा सकें। उसके माता-पिता ने कहा, 'श्रेया का यहां के डॉक्टरों से अच्छा तालमेल है और वे इसकी मेडिकल हिस्ट्री भी अच्छे से जानते हैं।'

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