दुनिया में सबसे ज़्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ बने निकेश अरोड़ा

इस शख़्स की सैलरी जानकर आप हो जायेंगे हैरान...

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गाजियाबाद के निकेश अरोड़ा अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर कंपनी पालो ऑल्टो में 858 करोड़ रुपए के सालाना पैकेज पर दुनिया में सबसे ऊंचा वेतन पाने वाले सीईओ बन गए हैं। जब वह भारत से गए थे, कंपनियां उन्हें नौकरी देने से मना कर देती थीं। वह कहते हैं, भारत में ई-कॉमर्स बिजनेस का भविष्य उज्ज्वल है।

निकेश अरोड़ा
निकेश अरोड़ा
इंडियन एयरफ़ोर्स में ऑफिसर पिता की संतान निकेश ने स्कूल की पढ़ाई दिल्ली में एयरफ़ोर्स के ही स्कूल से की थी। इसके बाद 1989 में उन्होंने बीएचयू आईटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में ग्रैजुएशन किया और विप्रो में नौकरी करने लगे। 

सॉफ्ट बैंक और गूगल में काम कर चुके गाजियाबाद (उ.प्र.) के पचास वर्षीय निकेश अरोड़ा दुनिया में सबसे ज़्यादा तनख़्वाह पाने वाले 858 करोड़ के पैकेज पर साइबर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर कंपनी पालो ऑल्टो के सीईओ बन गए हैं। इसके अलावा उन्हें कंपनी की ओर से 268 करोड़ रुपए के शेयर मिलेंगे, जिन्हें वह सात साल तक नहीं बेच सकते। अगर वह इस दौरान पालो अल्टो नेटवर्क के शेयर की कीमत तीन सौ प्रतिशत बढ़ाने में कामयाब रहे तो उन्‍हें 442 करोड़ रुपए और मिलेंगे। इसके साथ ही निकेश अपने पैसे से पालो अल्टो नेटवर्क के 134 करोड़ रुपए के शेयर खरीद सकते हैं और इतनी ही कीमत के शेयर उन्हें कंपनी की ओर से दिए जाएंगे।

इतनी ऊंची तनख्वाह पाने वाले निकेश अरोड़ा ने वेतनभोगियों के मामले में माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला और पेप्सी की इंदिरा नूयी को भी पछाड़ दिया है। निकेश कहते हैं कि मेरी सैलरी को लेकर लोग काफी गुणा-भाग करते हैं। लोगों को सही-सही जानकारी नहीं है। लेकिन हां, अगर मैं परफॉर्म नहीं करता हूं तो मैं इसे लौटा दूंगा। निकेश अरोड़ा बताते हैं कि उनकी जिंदगी में एक मोड़ दौरा ऐसा भी आया था, जब उन्हें कंपनियों नौकरी देने से मना कर दिया करती थीं। जिस समय वह अमरीका गए थे, घर से मिले तीन हज़ार डॉलर से ही उन्हें दिन काटने पड़े थे।

इंडियन एयरफ़ोर्स में ऑफिसर पिता की संतान निकेश ने स्कूल की पढ़ाई दिल्ली में एयरफ़ोर्स के ही स्कूल से की थी। इसके बाद 1989 में उन्होंने बीएचयू आईटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में ग्रैजुएशन किया और विप्रो में नौकरी करने लगे। इसके बाद ये नौकरी छोड़कर वह अभी और पढ़ाई करने के लिए वह अमरीका चले गए। उनकी शादी किरण से हुई थी। उनसे एक बेटी भी हुई लेकिन बाद में दोनों का रिश्ता टूट गया और उन्होंने 2014 में आयशा थापर से शादी रचा ली। बोस्टन की नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए करने के बाद वर्ष 1992 में वह फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट में एनलिस्ट बन गए। इस नौकरी के साथ-साथ वह बोस्टन कॉलेज में फ़ाइनेंशियल प्रोग्राम रात की क्लास में पढ़ाई भी करते रहे और इस क्लास में टॉप कर गए।

इतना ही नहीं, इसी दौरान उन्होंने दो-तीन वर्ष के भीतर चार्टर्ड फ़ाइनेंशियल एनलिस्ट की भी पढ़ाई कर ली। अब वह फिडेलिटी टेक्नोलॉज़ी में फाइनेंस के उप-प्रमुख बन गए। बाद में उन्होंने कुछ वक्त के लिए पटनम इन्वेस्टमेंट को ज्वॉइन कर लिया। वहां से वह पहुंच गए डॉयचे टेलीकॉम। निकेश अरोड़ा ने पालो ऑल्टो में मार्क मिकलॉकलीन की जगह ली है। मार्क 2011 से पालो अल्टो नेटवर्क के सीईओ थे। हालांकि‍ मार्क अब भी कंपनी के बोर्ड वाइस चेयरमैन बने रहेंगे लेकिन निकेश अरोड़ा बोर्ड के चेयरमैन भी होंगे। सॉफ़्ट बैंक में रहते हुए भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर में भारी निवेश का श्रेय निकेश अरोड़ा को दिया जाता है। वर्ष 2015 में उनको ग्लोबल इंडियन में श्रेष्ठ काम के लिए ईटी कॉर्पोरेट सम्मान से नवाज़ा जा चुका है।

पालो अल्टो कंपनी अमेरिका की सिलिकन वैली में है। इस कंपनी के शेयर में हाल के दिनो में अनुमान के विपरीत काफी गिरावट आने लगी थी, जबकि मुनाफे में 29 फ़ीसदी की बढ़ोतरी। कंपनी को न शेयर में गिरावट, न ही इसके बावजूद मुनाफे में इतनी अधिक बढ़ोतरी का भी अंदाजा था। इतनी मोटी तनख्वाह पर निकेश अरोड़ा की ज्वॉइनिंग ने बड़े-बड़ों को चौंका दिया है। एक ऐसे ही प्रमुख टिप्पणीकार का कहना है कि अरोड़ा के पास साइबर सिक्यॉरिटी का अनुभव नहीं है। यद्यपि निकेश अरोड़ा के पास क्लाउड और डेटा डीलिंग का अच्छा-खासा अनुभव है और इस समय साइबर सिक्योरिटी डेटा एनलिसिस की समस्या से गंभीर रूप से घिर चुकी है।

निकेश ने करियर में उस वक़्त छलांग आई जब उन्हें गूगल में नौकरी मिली। वर्ष 2004 से 2007 सात तक वह गूगल के यूरोप ऑपरेशन प्रमुख रहे। वर्ष 2011 में वह गूगल में चीफ बिजनेस ऑफिसर बन गए और इसके साथ ही उस श्रेणी में आ गए, जिन्हें गूगल कंपनी सबसे ऊंची सैलरी देती है। वर्ष 2014 में जब निकेश ने गूगल कंपनी से अपने को अलग किया, उस वक्त उनकी सालाना सैलरी 50 मिलियन डॉलर थी। वहां से उन्होंने सॉफ्ट बैंक ज्वॉइन कर लिया। सॉफ्ट बैंक में उन्हें ग्लोबल इंटरनेट इन्वेस्टमेंट प्रमुख की जि‍म्मेदारी मिली। वहां उन्हें बैंक के बोर्ड में शामिल कर लिया गया। यहां उन्होंने 483 मिलियन डॉलर के शेयर ख़रीदे। इस कंपनी में वह जून 2016 तक रहे।

निकेश अरोड़ा जिस वक्त सॉफ्टबैंक के संस्थापक मसायोशी सन की जगह पर अध्यक्ष नियुक्त हुए थे, उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि नए बिजनेस के लिए अभी सही वक्त है, लेकिन कुछ लोग अब भी भ्रम में हैं और वे जल्द इस पुराने हैंगओवर से निकल आएंगे। निकेश भारत में ई-कॉमर्स बिजनेस के फलने-फूलने के प्रति आश्वस्त हैं और वे कई अन्य नए उद्यमों में निवेश की योजना भी बना रहे हैं। वह बताते हैं कि भारत का समय अब आ गया है। अगले 10 सालों में भारत में काफी प्रगति होगी। नए उद्यम भारत में नए उपभोक्तावाद को जन्म देंगे। भारत अब निवेश के लिए और ज्यादा अच्छी जगह बनता जा रहा है और यहां कई नए उद्यम रफ्तार पकड़ने वाले हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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