'जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स', टी-शर्ट खरीदिए, नेकी कीजिए

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आप याद करो अपने कॉलेज के वो दिन, जब आप किसी उत्सव या छात्रों के ग्रुप के लिए टी-शर्ट खरीदने के लिए इधर से उधर भागा करते थे। कितने टी-शर्ट खरीदने हैं, इसकी जानकारी नहीं होने से कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता था, ये तो वो छात्र ही बेहतर बता सकते हैं जिनके कंधे पर ये जिम्मेदारी होती थी।

जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स (JoaT) एक ऐसा उपाय है, जो इस समस्या का समाधान करने में छात्रों की मदद के साथ ही छात्रों को ऐसे काम में योगदान करने का भी भरोसा देता है जिनका वो ख्याल रखते हैं। जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स कपड़ों की एक ऐसी कंपनी है, जो छात्रों को लक्ष्य कर शुरू की गई है।

इन लोगों ने इंपैक्टथ्रेड नाम से एक अनोखा कॉन्सेप्ट तैयार किया है जिससे बड़े ऑर्डर देने पर छात्रों को सामाजिक तौर पर किसी काम में मदद करने का भी मौका मिलता है। इंपैक्टथ्रेड के जरिए जैक ऑफ ऑल थ्रेड ग्राहकों को प्रति टी-शर्ट 10-20 रुपये अतिरिक्त देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और दान में मिली रकम को एक निश्चित सामाजिक कार्य में इस्तेमाल किए जाते हैं। उन लोगों ने पहचान और जागरुकता के लिए अंगूठे के आकार का एक इंपैक्टथ्रेड हर्ट छपवाया है।

उन्हें आप थ्रेडलेस, टी-स्प्रिंग और सेवेनली के शानदार मेल के तौर पर सोचें!

उन्होंने हाल ही में खास कारोबारी सामान की क्राउडफंडिंग के लिए भारत का पहला प्लेटफॉर्म RAISE लॉन्च किया है। RAISE के जरिए लोगों को फायदे की गारंटी के साथ अपने कपड़े तैयार कर खुद बेचने का मौका देता है। इस पर हर तरह के प्रोजेक्ट्स हैं, मसलन, कॉलेज टीस, फैन ग्रुप्स, विट्टी डिजाइन, ऑर्टवर्क और वो सबकुछ जिससे कोई समाज सेवा की जा सके। हमारी मुलाकात सिंगापुर स्थित इसके एक संस्थापक यशवर्धन कनोई से हुई, जिनसे हमने कई ऐसी बातें जानी, जिनसे जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स की गाड़ी और तेज निकल पड़ी।

योर स्टोरी: जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स, इंपैक्टथ्रेड और RAISE के लिए प्रेरणा क्या थे?

यश: सिंगापुर में हाई स्कूल के आखिरी वर्षों में मैं थिएटर का दीवाना हो गया था और मैं अक्सर स्टूडियो में ही रहा करता था। इसलिए थिएटर सोसायटी की जो टी-शर्ट थी, वो मेरे लिए मेरे स्कूल यूनिफॉर्म से भी ज्यादा गर्व की चीज हुआ करती थी। हाई-स्कूल के बाद मैं बैंगलोर में इसी जोश को स्कूल के अलावा दूसरे किसी रोचक काम में इस्तेमाल करना चाहता था।

दो दोस्तों के साथ मैंने ‘द कैंपस स्टोर’ की शुरुआत की थी। ये नाकाम रहा, लेकिन एक साल बाद मैं और पिछले काम में साझीदार रहे मेरे एक साथी अपूर्व फिर मिले और हमने एक और कोशिश करने की ठानी, लेकिन इस बार एक मजबूत टीम के साथ। आकाश और प्रतिभा को भी हमने अपने साथ शामिल किया और इस तरह जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स की शुरुआत हुई।

हमारे अनोखे मॉडल के जरिए हम कॉलेज के छात्रों को इसके साथ आने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

इंपैक्टथ्रेड के लिए प्रेरणा: हमलोग सामाजिक तौर पर कुछ जोश से परिपूर्ण काम करना चाहते थे। लेकिन हम एक चंदे के बक्से से अलग कुछ करना चाहते थे। हमलोग कॉलेज के दौरान शानदार टी-शर्ट को मिलने वाली वाह-वाही को कैश कराना चाहते थे।

इंपैक्टथ्रेड की स्थापना मोवेंबर और पेप्सी की बेहद रोचक प्रेरणा से हुई।

मोवेंबर एक सामाजिक धारणा है, जिसके तहत नवंबर के महीने में लोग अपनी मूंछें बढ़ाते हैं। उनके दोस्त कोई मदद तो नहीं कर सकते लेकिन हैरान होकर उनसे पूछते जरूर हैं कि ऐसा क्यों है? जवाब में उन्हें बताया गया कि प्रोस्टेट कैंसर के प्रति जागरुकता फैलान के लिए वो ऐसा करते हैं। मतलब साफ है, किसी चीज के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए ऐसा कुछ किया जाना चाहिए जो साफ-साफ तौर लोगों को दिखाई दे।

पेप्सी ने फ्रेशनेस लेबल की शुरुआत की। कोला की गुणवत्ता जांचने का ये बिलकुल नया तरीका था। ये ऐसी सोच थी जो पसंद आने लगी, हम कॉलेज में पहने जाने वाले कपड़े के मानक माप का तरीका इजाद करेंगे, एक ऐसा मानक जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा। क्या आपका कॉलेज-टी कोई असर डाल सकता है?

RAISE के लिए प्रेरणा: RAISE की शुरुआत भी बेहद रोचक है। जिस मार्केटिंग क्लास में मैंने पेप्सी के बारे में पढ़ा था, उसी क्लास में मैंने ग्रुपॉन ग्रुप का डिस्काउंट मॉडल भी पढ़ा था। कॉलेज के उन छात्रों के लिए जो अपने लिए रिटेल क्या है, ये पता नहीं लगा पाते हैं, उनके लिए ये काफी रोचक था। ये एक ऐसा काम था, जहां बिक्री में कोई जोखिम नहीं था और इसके साथ इसके काफी असर होने की संभावनाएं थीं। लेकिन इसके लिए एक प्लेटफॉर्म तैयार करना काफी डराने वाला था, यही वजह थी कि इस आइडिया पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।

एक साल से भी ज्यादा समय के बाद, मैंने इस्राइल में एक हाई-टेक कंपनी के नए प्रोडक्ट के लॉन्च के छह महीने तक मार्केटिंग का प्रबंधन किया। अब मुझे काफी कुछ समझ में आ गया था कि इस तरह की चीजें कैसे काम करती हैं और अब वही मैं जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स में भी लागू करने वाला था।

योर स्टोरी: आपकी टीम कितनी बड़ी है और सह-संस्थापकों का बैकग्राउंड क्या है?

यश: हमलोग चार सह-संस्थापक हैं। मैं सिंगापुर के एनयूएस में यूनिवर्सिटी स्कॉलर्स प्रोग्राम के तहत इंजीनियरिंग और लिबरल आर्ट्स का छात्र रहा हूं। मैंने टीम को एकत्रित किया, उसकी दिशा तय की और हर किसी के काम को और बेहतर करने की कोशिश की। मैं अपने कैंपस में लाल पायजामे में घूमने वाले के तौर पर जाना जाता था।

अपूर्व अग्रवाल बैंगलोर के PESIT से इंजीनियरिंग की छात्र है। वो डाटासेट्स, वित्त और साझेदारी के सारे काम संभालती हैं। इसके साथ ही वो किसी भी चीज को खास तरीके से करने में भी माहिर हैं।

आकाश दत्ता सिंगापुर के NAFA में एनिमेशन के छात्र हैं। जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स के शानदार विजुअल्स की जिम्मेदारी उन्हीं की है और इसके साथ ही वो डिजाइन मंकीज को भी वो ही संभालते हैं।

प्रतिभा नायर बैंगलोर के MVIT से बायोटेक की छात्र हैं। वो प्रोडक्शन लाइन को तो संभालती ही हैं, इसके साथ ही वो जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स के ग्राहकों के सवालों के भी जवाब देती हैं और भारत में मार्केटिंग का पूरा काम देखती हैं।

इनके अलावा हमारे पास अच्छे अधिकारियों की एक टीम है, कैंपस एंबेस्डर्स और डिजाइन मंकीज हैं जो भारत के साथ-साथ सिंगापुर और मध्य-पूर्व देशों में फैले हैं। ये लोग जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स में काम करने के अनुभव को दुनिया में सबसे बेहतरीन अनुभव बनाते हैं।

योर स्टोरी: आप कितने समय से इससे जुड़े हैं और अब तक कितने कामयाब हुए हैं?

यश: जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स पिछले डेढ़ साल से चल रहा है। अभी तक ये अच्छा सफर रहा है। हमें शुरुआत के दो महीने बाद से ही अच्छा कारोबार मिलने लगा था, यहां तक कि कई बड़े अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूल भी हमें ऑर्डर देना चाहते थे। हमने अलग-अलग देशों में लोगों को काम पर रखा, मीडिया में अपने प्रोडक्ट का प्रचार कराया और फिर कुछ नेक कार्यों के साथ जुड़े। इससे हमें काफी फायदा हुआ।

लेकिन अभी तक काम में तेजी नहीं आई है। इससे पहले तक हमारा मकसद इसके साथ-साथ एक और शुरुआत करनी थी, और इसी वजह से हमलोग धीमी चाल में आगे बढ़ रहे थे। पर जैसा कि मैंने पहले बताया कि पिछले साल मैंने इस्राइल में 10 मिलियन डॉलर के स्टार्टअप में काम किया और वहां काम करने के बाद समझ गया कि आखिर एक स्टार्टअप कैसे चलता है। मेरे सह-संस्थापक भी जल्दी ही ग्रेजुएट होने वाले थे और वे सभी जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स को कामयाब होते देखना चाहते थे, यानी कभी खत्म न होने वाली रातें, एस्प्रेसो शॉट्स और वक्त पर काम का पूरा न होना, ये सब तय था।

RAISE को अभी कुछ दिनों पहले ही शुरू किया है और इसे लेकर लोगों का रुझान बहुत ही अच्छा रहा है।

सिर्फ दो दिनों में ही हमें 60 से ज्यादा अलग-अलग बैकग्राउंड वाले यूजर्स मिल गए। फिलहाल RAISE के यूजर्स में छात्र, कॉलेज के ग्रुप, डिजाइनर्स, सोशल ग्रुप, टीचर और यहां तक कि खुदरा विक्रेता भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए आपको बता दें कि एक शख्स ऐसा है जो RAISE का इस्तेमाल अपने आर्ट स्कूल को फंड करने के लिए कर रहा है, तो दूसरा वो शख्स है जो ट्रेन की चपेट में आने की जिंदगी बदल देने वाली घटना के बाद संघर्ष करते हुए अपनी कामयाबी की दास्तां लोगों तक पहुंचाना चाहता है।

आमतौर पर भी हमने समय के साथ जबरदस्त विकास देखा है। हमें करीब-करीब हर रोज नए लोगों के ईमेल मिलते हैं, और ये जानकर अच्छा लगता है कि देश के दूर-दराज के छात्र भी हमारी सोच को समझते हैं और इससे न सिर्फ खुद को जोड़ कर देखते हैं बल्कि एक छात्र के तौर पर कुछ बदलाव भी लाना चाहते हैं। हमलोग आगे की सोचकर काफी उत्साहित हैं।

योर स्टोरी: थ्रेडलेस और टीस्प्रिंग से जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स किस तरह अलग है?

यश: थ्रेडलेस सिर्फ कलाकारों पर केंद्रित है और वो क्राउडफंडिंग का इस्तेमाल नहीं करता है। वे पूरी तरह से खुदरा काम करते हैं। क्राउडफंडिंग आसान और साफ है। जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स इन दोनों से अलग डिजाइन करता है। डिजाइन मंकी की हमारी टीम RAISE के यूजर्स के साथ जुड़कर कुछ महान करने की कोशिश करती है। कई बार हमारे ग्राहक हमें किसी ड्रॉइंग का फोटो भेजते हैं और हमारी टीम उसे शानदार रेडी-टू-प्रिंट डिजाइन में तब्दील कर देती है।

भारत में कॉलेज के छात्रों के बाजार के अनुभव को देखते हुए जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स तय जरुरतों को भी टागरेट करता है। RAISE के साथ हम शुरुआत में जिन जरूरतों को पूरा कर रहे हैं उनमें उत्सवों के दौरान और ग्रुप टी के अधिक संख्या में ऑर्डर हासिल करना शामिल है। हम लोग इस बात को लेकर अक्सर परेशान रहते हैं कि हर रोज ऑर्डर की मात्रा बदलती रहती है और ऑर्डर देने वाला शख्स कलम और कागज लेकर इधर से उधर दौड़ता रहता है। हम अपने और ग्राहकों के इस दर्द को कुछ कम करना चाहते थे।

कॉलेज उत्सवों के दौरान छात्र यूनियन एकमुश्त ऑर्डर देकर कीमत तय करते हैं और फिर छात्रों से इसके लिए पैसे उगाहते हैं। हमें ये बुरा लगता था कि छात्र इसे समझते नहीं थे और समझते थे कि हमारी कीमत बहुत ज्यादा है। इसके साथ ही हमें ये भी बुरा लगता था कि हमारे प्रोडक्ट की अधिक कीमत की वजह को भी ये समझते नहीं थे। ज्यादा ऑर्डर देने का मतलब इनवेंटरी लॉस होता है और कम का मतलब छात्र यूनियन के लिए शॉर्टेज कॉस्ट। हम इसी परेशानी को ठीक करना चाहते थे।

यही वजह है कि हमारे ब्रांड, इसकी मार्केटिंग, कीमत और इस्तेमाल करने के तरीके इत्यादि कॉलेज के छात्रों के मार्केट को ध्यान रखकर ही तैयार किए गए हैं। हम मानते हैं कि इससे काफी बदलाव आया है।

योर स्टोरी: आप टी-शर्ट के प्रोडक्शन को कैसे मैनेज करते हैं?

यश: हम दक्षिण भारत में अपने उत्पादन के अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ समय-समय पर साझीदारी करते हैं। प्रत्येक साझीदारी को नियमित अंतराल पर समीक्षा की जाती है। प्रतिभा हमेशा इस बाद को सुनिश्चित करती हैं कि हमारे उत्पादों की गुणवत्ता कभी खराब न हो क्योंकि हमें अपने बेहतर गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट पर गर्व है और यही वजह है कि लोग हमें पैसे भी देते हैं।

इस मामले में भी हम कुछ विकास देख रहे हैं। एक साल पहले, हमें एक प्रोडक्शन हाउस से करीब-करीब ये कहते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया कि हम उनका वक्त न जाया करें। अब ऐसा है कि हमें हर हफ्ते नए उत्पादन कंपनियों के आवेदन आते हैं और वो हमारे साथ साझेदारी करना चाहते हैं।

योर स्टोरी: जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स पैसे कैसे कमाता है?

यश: जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स RAISE के ग्राहकों से प्रति यूनिट के बदले एक समान कीमत वसूलती है। ये कीमत उन्हें बताए गए खर्च में शामिल होती है। हम उनकी कमाई से कुछ भी नहीं लेते हैं।

योर स्टोरी: जैक ऑफ ऑल थ्रेड्स का दुस्साहसी मकसद क्या है?

यश: भारत के हर शहर के छात्र कुछ खास बनाने और बेचने के लिए RAISE का इस्तेमाल करना चाहते हैं।

योर स्टोरी: ऐसी कौन बड़ी चीज है जिसके लिए आपकी टीम इन दिनों काम कर रही है?

यश: हम RAISE को हर तबके के लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे कि वो जान सकें कि वो क्या इस्तेमाल कर रहे हैं। ये स्थिति ठीक उसी तरह है जैसे कुछ साल पहले तक एप्प स्टोर को लेकर थी, यहां तक कि हम भी ये समझ नहीं पाए थे कि लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

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